
HIGHLIGHTS
- ऑन-ग्राउंड एक्शन: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना समाहरणालय के नए भवन का कोना-कोना खंगाला; अधिकारियों को दिए डेडलाइन के निर्देश।
- छठ व्रतियों को सौगात: कलेक्टेरियट घाट से सभ्यता द्वार तक बनेगी नई सड़क; मॉर्निंग वॉकर्स के लिए भी होगा खास ट्रैक।
- हाई-टेक कलेक्टेरियट: 6.32 एकड़ में फैला आधुनिक परिसर; सोलर प्लांट, वेस्ट ट्रीटमेंट और 440 से ज्यादा वाहनों की पार्किंग।
- विरासत और विकास: हाई कोर्ट के आदेश पर पुराने भवन के ऐतिहासिक खंभों को परिसर में किया गया सुरक्षित।
पटना | 16 मार्च, 2026
पटना की पहचान और प्रशासनिक केंद्र ‘पटना समाहरणालय’ (Patna Collectorate) अब पूरी तरह बदल चुका है। सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस नवनिर्मित परिसर का सघन निरीक्षण किया। गंगा की लहरों के किनारे खड़ी यह आलीशान इमारत अब न केवल पटना का प्रशासनिक हब है, बल्कि मुख्यमंत्री के ‘निश्चय’ का जीता-जागता उदाहरण भी है।
5वें माले से मेट्रो तक: सीएम का ‘सुपर’ मुआयना
मुख्यमंत्री ने समाहरणालय के पांचवें तल पर पहुँचकर मीटिंग हॉल, उप विकास आयुक्त (DDC) कार्यालय और अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) सदर के दफ्तरों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि काम की गुणवत्ता और जनता की सहूलियत में कोई कमी नहीं होनी चाहिए।
- कनेक्टिविटी: मुख्यमंत्री ने डबल डेकर पुल का भी निरीक्षण किया और मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (PMRC) के साथ समन्वय बैठाकर बाकी बचे कार्यों को युद्ध स्तर पर पूरा करने को कहा।
- सुरक्षा: परिसर में बन रहे वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्यालय को भी जल्द पूरा करने का टॉस्क दिया गया है।
कलेक्टेरियट घाट से सभ्यता द्वार: भव्यता का नया रास्ता
पटनावासियों के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि कलेक्टेरियट घाट से सभ्यता द्वार तक एक नई सड़क बनाई जा रही है।
”यह सड़क केवल रास्ता नहीं है, बल्कि छठ व्रतियों के लिए एक बड़ी राहत होगी। सुबह की सैर करने वालों को भी इससे बेहतरीन माहौल मिलेगा।” – मुख्यमंत्री के निर्देश
एक नज़र: कैसा है नया समाहरणालय परिसर?
सुविधा | विवरण |
|---|---|
कुल निर्मित क्षेत्र | 28,388 वर्गमीटर |
भूखंड | 6.32 एकड़ (पुराने परिसर में ही) |
पार्किंग | 204 खुली पार्किंग + 240 बेसमेंट पार्किंग (कुल 444) |
पर्यावरण | 40 किलोवाट सौर ऊर्जा संयंत्र, जल एवं सिवर ट्रीटमेंट प्लांट |
विरासत | पुराने भवन के ऐतिहासिक ‘स्तंभों’ का प्रदर्शन (हेरिटेज लुक) |
इतिहास के पन्नों से: 2017 की ‘निश्चय यात्रा’ का फल
यह प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री के दिल के करीब रहा है। वर्ष 2017 में जब उन्होंने पुराने जर्जर भवन को देखा था, तभी इसे तोड़कर एक आधुनिक और एकीकृत परिसर बनाने का निर्णय लिया गया था। विवादों और कानूनी अड़चनों (हेरिटेज बचाओ आंदोलन) के बाद, आज यह भवन अपनी पूरी भव्यता के साथ तैयार है, जिसमें पुराने कलेक्टर भवन की ऐतिहासिक यादों को भी सहेज कर रखा गया है।
VOB का नजरिया: क्या पटना का नया ‘नर्व सेंटर’ सुशासन की रफ्तार बढ़ाएगा?
पटना समाहरणालय का यह नया रूप केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है, बल्कि यह बदलते बिहार की प्रशासनिक सोच को दर्शाता है। एक ही परिसर में डीएम, एसएसपी, डीडीसी और एसडीओ जैसे बड़े कार्यालयों का होना आम जनता के लिए ‘सिंगल विंडो’ सुविधा जैसा है। मुख्यमंत्री का खुद जमीन पर उतरकर निरीक्षण करना यह बताता है कि 31 मार्च की क्लोजिंग से पहले वे सभी प्रमुख प्रोजेक्ट्स को फिनिशिंग लाइन तक पहुँचाना चाहते हैं। अब चुनौती यह है कि इस हाई-टेक परिसर में सरकारी काम भी उतना ही ‘हाई-टेक’ और पारदर्शी हो।


