33,464 करोड़ की परियोजनाओं की डीपीआर पर हुई बैठक, अनीसाबाद-एम्स एलिवेटेड कॉरिडोर से लेकर विक्रमशिला सेतु तक शामिल
पटना।बिहार में सड़क नेटवर्क को भविष्य के अनुरूप तैयार करने के लिए पथ निर्माण विभाग ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गति तेज कर दी है। विभागीय सभाकक्ष में मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने 2025-26 की वार्षिक कार्य योजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ी 52 बड़ी परियोजनाओं की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) की समीक्षा की।
बैठक में पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल सहित वरीय पदाधिकारी और अभियंता मौजूद रहे। प्रस्तुतीकरण के माध्यम से मंत्री को बताया गया कि इन 52 परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 33,464 करोड़ रुपये है।
एलिवेटेड कॉरिडोर से लेकर बाईपास और सेतु तक
जिन प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा हुई, उनमें अनीसाबाद-एम्स एलिवेटेड कॉरिडोर, विक्रमशिला सेतु, औरंगाबाद फोरलेन बाईपास, सिंहेश्वर बाईपास, अरवल से बिहार शरीफ सड़क परियोजना और कई रेलवे ओवर ब्रिज शामिल हैं।
इनमें से 36 परियोजनाओं की डीपीआर एनएच विंग, 14 परियोजनाओं की बीआरपीएनएनएल और 2 परियोजनाओं की बीएसआरडीसीएल द्वारा तैयार की जा रही है।
4,645 करोड़ की योजनाएं पहले ही स्वीकृत
बैठक में बताया गया कि अरवल बाईपास, दाउदनगर बाईपास, मगरदेई घाट हाई लेवल ब्रिज, एनएच-322, ढाका मोड़ से बलझोर, न्यू गंडक ब्रिज और समस्तीपुर-दरभंगा एनएच-322 जैसी परियोजनाएं पहले ही स्वीकृत हो चुकी हैं। इनकी कुल लागत 4,645 करोड़ रुपये है।
इसके अलावा 15 फरवरी तक छह और परियोजनाओं की डीपीआर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को भेजी जाएगी।
‘भविष्य को ध्यान में रखकर बनें बाईपास’
मंत्री डॉ. जायसवाल ने साफ कहा कि बाईपास केवल वर्तमान ट्रैफिक के लिए नहीं, बल्कि आने वाले 25 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए जाएं। उन्होंने निर्देश दिया कि बाईपास शहरों से पर्याप्त दूरी पर हों और आबादी व यातायात के दबाव को देखते हुए उनका अलाइनमेंट तय किया जाए।
डीपीआर में देरी पर सख्ती
मंत्री ने डीपीआर तैयार करने में आ रही बाधाओं को जल्द दूर करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जहां भी अड़चन है, वहां पीएमओ, मंत्रालय और केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखकर समाधान कराया जाएगा।
उन्होंने अलाइनमेंट अप्रूवल, डीपीआर सबमिशन, स्क्रूटनी और मंत्रालय में फाइल भेजने की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर देरी न होने देने को कहा।
राम जानकी मार्ग के लिए अलग टीम
राम जानकी मार्ग (मशरख-चकिया-भीठामोड़) की डीपीआर को लेकर मंत्री ने अलग से टीम लगाने का निर्देश दिया, ताकि यह परियोजना जल्द जमीन पर उतर सके।
हर हफ्ते होगी प्रगति की समीक्षा
मंत्री ने सभी एजेंसियों को साप्ताहिक प्रोग्रेस रिपोर्ट देने को कहा और स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने रेलवे से जुड़े अवरोधों को दूर करने के लिए बीआरपीएनएनएल को रेलवे के साथ समन्वय बढ़ाने का निर्देश भी दिया।
सरकार का लक्ष्य है कि इन परियोजनाओं के जरिए बिहार में बेहतर कनेक्टिविटी, तेज यातायात और आर्थिक विकास को नई रफ्तार मिले।


