मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में 4.8 किलोमीटर का टनल सेक्शन सफलतापूर्वक जुड़ा, इतिहास रचा

मुंबई, 21 सितम्बर 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (HSR) परियोजना ने एक ऐतिहासिक इंजीनियरिंग मील का पत्थर छू लिया है।

आज परियोजना की 4.8 किलोमीटर लंबी टनल सेक्शन का ब्रेकथ्रू हासिल हुआ। इस टनल का खुदाई कार्य घनसोलि और शिलफाटा दोनों छोरों से समानांतर रूप से किया गया। चुनौतीपूर्ण जलमार्ग के बीच दोनों टीमें सफलतापूर्वक एक-दूसरे से जुड़ीं।

रेल मंत्री ने इस उपलब्धि पर परियोजना टीम को बधाई दी और कहा, “यह भारत की पहली अंडर-सी टनल निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण क्षण है, जो मुंबई और ठाणे को जोड़ती है।”


यात्रा समय में कमी और आर्थिक लाभ

बुलेट ट्रेन परियोजना के पूरा होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा समय केवल 2 घंटे 7 मिनट रहेगा। यह प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़कर क्षेत्रीय विकास को गति देगा।

जापान में टोक्यो, नागोया और ओसाका को जोड़ने वाली दुनिया की पहली बुलेट ट्रेन ने वहां की अर्थव्यवस्था में बहुगुणात्मक प्रभाव डाला था। इसी तरह, भारत में यह परियोजना अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, वापी और मुंबई को आर्थिक कॉरिडोर में बदलकर औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी।


तकनीकी नवाचार और निर्माण प्रगति

  • 320 किलोमीटर वायाडक्ट (ब्रिज) पूरा
  • सभी स्टेशनों पर निर्माण कार्य तीव्र गति से जारी
  • नदी पुलों का systematic निर्माण
  • साबरमती टनल जल्द पूर्ण होने वाली

परियोजना में सिंगल टनल तकनीक और 40 मीटर गिर्डर का उपयोग महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है। जापानी साझेदारों ने इसकी डिज़ाइन और दक्षता की सराहना की है।


ट्रेन संचालन और भविष्य की योजना

  • प्रारंभिक आवृत्ति: पीक घंटों में हर 30 मिनट
  • चरण 2: संचालन स्थिर होने पर हर 20 मिनट
  • भविष्य में: बढ़ते यातायात के अनुसार हर 10 मिनट

पहला सेक्शन सूरत से बिलोमोरा तक 2027 में संचालन के लिए तैयार होगा।
जापान के सहयोग से भारत में E10 शिंकानसेन (नेक्स्ट-जनरेशन बुलेट ट्रेन) लाने की योजना है।

लॉक पायलट और मेंटेनेंस स्टाफ को जापान में उन्नत सिमुलेटर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।


सुरक्षा और पर्यावरण

NATM (New Austrian Tunnelling Method) अपनाकर निर्माण किया जा रहा है। सुरक्षा के लिए ग्राउंड सेटलमेंट मार्कर, पायजोमीटर, इंक्लिनोमीटर और स्ट्रेन गेज लगाए गए हैं। परियोजना के दौरान पास के ढांचे और समुद्री पारिस्थितिकी पर असर नहीं पड़ने दिया गया।


रणनीतिक महत्व

यह परियोजना प्रधानमंत्री मोदी के विश्वस्तरीय अवसंरचना के विजन के अनुरूप है और भारत में भविष्य की हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के लिए मॉडल बनेगी।


 

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