भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय में 31वीं अनुसंधान परिषद बैठक शुरू, जलवायु परिवर्तन और किसानों की आय बढ़ाने पर मंथन

भागलपुर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय में 31वीं अनुसंधान परिषद बैठक (RCM-खरीफ 2026) का शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय इस महत्वपूर्ण बैठक में देशभर के कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और नीति-निर्माता कृषि अनुसंधान की भावी दिशा, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा किसानों की आय बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा कर रहे हैं।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में 300 से अधिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत निदेशक अनुसंधान डॉ. अनिल कुमार सिंह के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालय की अनुसंधान उपलब्धियों, नई फसल किस्मों, पेटेंट, कॉपीराइट, स्टार्टअप गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।

भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय में 31वीं अनुसंधान परिषद बैठक शुरू, जलवायु परिवर्तन और किसानों की आय बढ़ाने पर मंथन

बैठक में आईसीएआर के सहायक महानिदेशक डॉ. नवीन प्रकाश सिंह ने कहा कि कृषि अनुसंधान तभी सफल माना जाएगा जब उसका सीधा लाभ किसानों की आय, रोजगार, पोषण सुरक्षा और ग्रामीण विकास में दिखाई दे। उन्होंने रिमोट सेंसिंग, फसल विविधीकरण और युवा वैज्ञानिकों को नेतृत्व देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

वहीं डॉ. देवेंद्र सिंह ने कृषि यंत्रीकरण को समय की आवश्यकता बताते हुए छोटे किसानों के लिए किफायती और उपयोगी कृषि यंत्र विकसित करने की जरूरत बताई। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित फसल अनुसंधान और हरित खाद के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी बल दिया।

भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय में 31वीं अनुसंधान परिषद बैठक शुरू, जलवायु परिवर्तन और किसानों की आय बढ़ाने पर मंथन

बैठक को संबोधित करते हुए पद्मश्री डॉ. बी. एस. धिल्लों ने बिहार की कृषि क्षमता की सराहना करते हुए अनुसंधान को किसानों की समृद्धि और खाद्य सुरक्षा से जोड़ने की बात कही।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती जनसंख्या की चुनौतियों के बीच कृषि वैज्ञानिकों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, जलवायु-सहिष्णु फसल किस्मों के विकास और किसानों की आय बढ़ाने वाली तकनीकों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

बैठक में जलवायु-स्मार्ट कृषि, एआई आधारित अनुसंधान, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, कृषि स्टार्टअप, मूल्य संवर्धन और तकनीक हस्तांतरण जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि भविष्य का कृषि अनुसंधान केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों की आय, पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास को केंद्र में रखकर आगे बढ़ाया जाएगा।

बैठक का दूसरा चरण 20 जून को आयोजित होगा, जिसमें खरीफ 2026 के लिए अनुसंधान रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।

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