छठ के बाद बिहार से लौटेंगे 20 लाख प्रवासी, चुनावी भागीदारी पर पड़ सकता है असर

पटना: बिहार में दीपावली और छठ पर्व की रौनक के बीच विधानसभा चुनाव 2025 का माहौल भी गर्म हो गया है। लेकिन इसी बीच एक अहम तथ्य सामने आया है — छठ पर्व के बाद करीब 20 लाख प्रवासी मजदूर अपने काम पर लौट जाएंगे, जिससे उनके मतदान में हिस्सा लेने की संभावना कम हो जाएगी।

पहले चरण का मतदान 6 नवंबर और दूसरे चरण का 11 नवंबर को होना है। ऐसे में प्रवासियों की बड़ी संख्या का राज्य से बाहर जाना चुनावी भागीदारी पर प्रत्यक्ष असर डाल सकता है।


छठ पर्व के बाद वापसी की बड़ी लहर

त्योहारों के दौरान प्रवासी मजदूर बड़ी संख्या में बिहार लौटे हैं ताकि अपने परिवार के साथ दीपावली और छठ मना सकें। रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान 28 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच 14 लाख यात्रियों ने वापसी के लिए टिकट बुक कराया है, जबकि 6 से 10 नवंबर के बीच 6 लाख यात्रियों ने कंफर्म टिकट लिया है।

रेलवे का अनुमान है कि जनरल कोच से भी करीब 10 लाख यात्री यात्रा करेंगे। इसका मतलब है कि छठ के तुरंत बाद 20 लाख से अधिक प्रवासी बिहार से बाहर लौट जाएंगे।


रेलवे ने चलाईं 4000 अतिरिक्त ट्रेनें

त्योहारों के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे ने विशेष व्यवस्था की है। 4000 अतिरिक्त ट्रेनों के सह फेरे चलाने का निर्णय लिया गया है। पिछले वर्ष 2024 में 8 नवंबर से 14 नवंबर के बीच लगभग 42 लाख यात्रियों ने बिहार से वापसी की थी। इस वर्ष संख्या कुछ कम रहने की उम्मीद है, लेकिन रेलवे ने फिर भी 12,000 फेरे लगाने वाली सैकड़ों स्पेशल ट्रेनों की योजना बनाई है।


प्रवासियों की भागीदारी पर सवाल

राजधानी पटना जंक्शन, राजेंद्र नगर, और दानापुर स्टेशन पर घर लौटने वाले कई प्रवासी मजदूरों ने बताया कि वे “छठ के बाद काम पर लौटने से पहले वोट जरूर डालेंगे।”हालांकि, कर्मचारी और अधिकारी वर्ग में चुनावी उत्साह अपेक्षाकृत कम दिखाई दे रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रवासियों की इस बड़ी वापसी का असर कई विधानसभा सीटों के नतीजों पर पड़ सकता है, खासकर शहरी इलाकों और उन क्षेत्रों में जहां बाहरी मजदूरों की संख्या अधिक है।


चुनाव आयोग और प्रशासन के लिए चुनौती

त्योहारों और प्रवासियों की आवाजाही को देखते हुए चुनाव आयोग और प्रशासन को मतदान व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर विशेष ध्यान देना होगा।विशेष रूप से छठ के बाद की अवधि में भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, और मतदान केंद्रों की पहुंच सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।


 

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