पटना: बिहार में छठ महापर्व की शुरुआत नहाय खाय के साथ श्रद्धा और भक्ति के रंग में डूबी हुई थी, लेकिन इस पावन अवसर पर हुई डूबने की घटनाओं ने पूरे राज्य को झकझोर दिया।
राज्य के सात जिलों में कुल 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें पटना के एक ही परिवार के तीन सदस्यों की दर्दनाक मृत्यु ने हर किसी को भावुक कर दिया।
ये हादसे गंगाजल लाने और घाट तैयार करने के दौरान हुए, जिससे छठ की तैयारियों के बीच मातम का माहौल बन गया।
पटना में एक परिवार के तीन सदस्यों की मौत
राजधानी पटना में छठ की तैयारी में गंगाजल लेने गए तीन लड़के, जिनमें दो सगे भाई और एक भतीजा शामिल थे, गंगा नदी में डूब गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक का पैर फिसलने से वह डूबने लगा, और उसे बचाने के प्रयास में बाकी दो भी गहरे पानी में समा गए।घटना स्थल पर मौजूद लोगों ने तीनों को निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
बांका में 10 वर्षीय बच्चे की मौत
बांका जिले के अमरपुर में चांदन नदी के पतवे घाट पर चार बच्चे घाट बनाने के बाद नहाने लगे। इसी दौरान 10 वर्षीय पीयूष कुमार गहरे पानी में चला गया। हालांकि तीन बच्चों को स्थानीय लोगों ने बचा लिया, लेकिन पीयूष को नहीं बचाया जा सका। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना से पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई।
अन्य जिलों में भी हादसे
डूबने की ऐसी ही घटनाएँ वैशाली, जमुई, बेगूसराय, सीतामढ़ी और कैमूर जिलों से भी सामने आई हैं।सीतामढ़ी में तीन लोगों के डूबने की खबर है, जिनमें से दो के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि एक की तलाश अब भी जारी है।
सुरक्षा पर उठे सवाल
इन दर्दनाक घटनाओं ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छठ जैसे बड़े पर्व के दौरान गंगा और अन्य नदियों के घाटों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने की वजह से ऐसी घटनाएँ बार-बार हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटों पर लाइफगार्ड, चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग की व्यवस्था नदारद रहती है।
प्रशासन से सख्त कदमों की मांग
लोगों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि
- सभी प्रमुख घाटों पर एनडीआरएफ और जल पुलिस की तैनाती सुनिश्चित की जाए,
- गहरे पानी वाले इलाकों को बैरिकेड से घेरा जाए,
- और लोगों को सतर्क करने के लिए अभियान चलाया जाए।
छठ पर्व आस्था का प्रतीक है, लेकिन इन घटनाओं ने श्रद्धा के उत्सव को शोक में बदल दिया है।


