शिवहर में मिली 150 किलो की ‘जलपरी’: 5 फीट लंबी दुर्लभ मछली देख हैरान हुए लोग, वैज्ञानिक भी चौंके

शिवहर, बिहार | 18 मई 2025 — बिहार के छोटे से जिले शिवहर में उस वक्त हलचल मच गई जब गुदरी बाजार स्थित मछली मंडी में 150 किलो वजनी और करीब 5 फीट लंबी मछली को देखा गया। इस विशालकाय मछली ने न सिर्फ लोगों को चौंका दिया, बल्कि वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों को भी हैरानी में डाल दिया है।


जैसे ही खबर फैली, उमड़ पड़ा लोगों का सैलाब

इस अनोखी मछली को देखने के लिए बाजार में लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं—हर कोई इस मछली की एक झलक पाने को उत्साहित दिखा। किसी ने इसे “शिवहर की जलपरी” कहा तो किसी ने “नदी का राक्षस“।

“सोचा कि ऐसी मछली शायद फिर कभी देखने को न मिले, इसलिए पूरा परिवार देखने आया।” — स्थानीय निवासी


बंघारा नदी से मिली ‘गोछ’ प्रजाति की मछली

मछली को पकड़ने वाले मछुआरे कृष्ण ने बताया कि वह अपने साथियों के साथ बंघारा नदी में मछली पकड़ रहा था। जाल भारी लगने पर लगा कि कोई पत्थर फंसा है, लेकिन जब वह हिलने लगी तो सभी हैरान रह गए

“घंटों मेहनत के बाद मछली को निकाला गया। इसके नुकीले दांत किसी शार्क जैसे हैं और इसका शरीर चमकीले स्लेटी रंग का है। यह ‘गोछ’ प्रजाति की मछली है।” — कृष्ण, मछुआरा


पिकअप से लाई गई मछली, 5 लोगों की पड़ी मदद

मछली को पिकअप वाहन में लादकर मछली बाजार लाया गया। इसे काबू में करने के लिए कम से कम 5 लोगों की मदद लेनी पड़ी। बाजार में जब मछली पहुंची तो सभी के मोबाइल कैमरे चालू हो गए — हर कोई फोटो और वीडियो बनाने में जुट गया।


वैज्ञानिक और पर्यावरणविद भी चौंक गए

पर्यावरणविद इकबाल हुसैन ने बताया कि इस प्रजाति की मछलियां आमतौर पर इतनी बड़ी नहीं होती हैं।

“संभव है यह मछली वर्षों से नदी की गहराई में छिपी रही हो या जलवायु परिवर्तन के कारण सतह पर आई हो। यह स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए एक अनोखा संकेत हो सकता है।” — इकबाल हुसैन, पर्यावरणविद


स्वादिष्ट और दुर्लभ: ‘गोछ’ मछली की खासियत

स्थानीय मछुआरे विक्की ने बताया कि इस प्रजाति की मछली करीब एक दशक बाद देखने को मिली है। इसका मांस बेहद स्वादिष्ट होता है और बाजार में इसकी काफी मांग रहती है।


शिवहर की नदियों में छुपे हैं प्रकृति के रहस्य

शिवहर की यह घटना बताती है कि स्थानीय जलस्रोतों में जैव विविधता अब भी जीवंत है, और हमें इन्हें संरक्षित करने की जरूरत है। यह मछली न सिर्फ कौतूहल और आकर्षण का विषय बनी, बल्कि प्राकृतिक शोध और संरक्षण का संकेत भी देती है।


 

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