रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले 71 मिनट का खास जाप कर रहे पीएम मोदी, जानें वजह

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले जानें किस खास नियम का पालन कर रहे पीएम मोदी, 11 दिनों के लिए लिया है ये संकल्प।

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए अब बहुत कम वक्त बचा है. इस ऐतिहासिक पल का इंतजार हर राम भक्त को है. देश हो या फिर विदेश हर जगह रामभक्ति की गूंज सुनाई दे रही है. 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले ही दुनियाभर में रामभक्त इस खास समारोह को सेलिब्रेट कर रहे हैं. दुनिया के 60 देशों राम भक्ति से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस ऐतिहासिक दिन के लिए खास तैयारी कर रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले खास जाप कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने लिया 11 दिनों का संकल्प
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले 11 दिनों का एक संकल्प लिया है. इस संकल्प के तहत वे हर दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में 71 मिनट तक एक खास जाप कर रहे हैं. यही नहीं वह जमीन पर सिर्फ कंबल बिछा कर सो रहे हैं. इस दौरान पीएम मोदी व्रत पर भी हैं. वह सिर्फ नारियल पानी पीकर ही अपना दिन बिताते हैं।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर दिन सुबह 3.40 बजे उठते हैं. इसके बाद वह 1 घंटा 11 मिनट तक आध्यात्मिक जगत के वरिष्ठजनों की ओर से दिए गए एक विशिष्ट मंत्र का जाप करते हैं. इस जाप को 11 दिनों तक करने का संकल्प पीएम मोदी ने लिया है. दरअसल ये जाप अनुष्ठान का अहम हिस्सा बताया जा रहा है।

पीएम मोदी ने क्यों लिया संकल्प?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले ये खास संकल्प क्यों लिया है. यह सवाल हर किसी के जहन में हैं. दरअसल हिंदू शास्त्रों के मुताबिक देव प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा एक विशद और वृहद प्रक्रिया है. यही कारण है कि इसके नियम भी काफी सख्त हैं. हर कोई आसानी से इसे अपना नहीं सकता.  इन नियमों का पालन प्राण प्रतिष्ठा से पहले करना पड़ता है. पीएम मोदी का जाप और संकल्प भी इन्हीं नियमों का हिस्सा है।

क्या है पीएम मोदी का संकल्प
पीएम मोदी ने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले यम-नियम का संकल्प लिया है. इस संकल्प को 11 दिनों के लिए किया जा रहा है. इसके तहत ब्रह्ममुहूर्त में जागना, फिर खास मंत्र के जरिए साधना और सात्विक आहार जैसे नियमों का पालन करना होता है. इसे एक कठोर तप के रूप में भी देखा जाता है।

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