आपकी जमीन-आपके नाम…राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने शुरू किया यह काम, सरकार को ‘नाटक’ कराने की जरूरत क्यों पड़ी ?

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा भूमि सर्वे के प्रति जन- जागरूकता बढ़ाने के लिए नुक्कड़ नाटकों का सहारा लिया गया है। इसके अंतर्गत पूरे राज्य में करीब 2150 जगहों पर नाटकों का सफ़लता पूर्वक मंचन किया गया. इन नुक्कड़ नाटकों के प्रस्तुतीकरण का विषय भूमि सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त था.

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की तरफ से बताया गया है कि 45 मिनट के इस नुक्कड़ नाटक में भूमि सर्वे से संबंधित जटिल विषय को आम बोलचाल की सरल भाषा में समझाने का प्रयास किया गया है। इस काम में अंचल अधिकारियों एवं सर्वे शिविर प्रभारियों ने मिलकर काम किया. लोगों की भीड़ को अगर पैमाना माना जाए तो विभाग का य़ह अभिनव प्रयोग काफी पसंद भी किया गया है. रैयतों को भूमि संबंधी तकनीकी मुद्दों को समझने में दिक्कत होती है। किस्तवार, खानापुरी, सुनवाई, कैथी लिपि, भू-अभिलेख पोर्टल के बारे में सही जानकारी का अभाव है। नुक्कड़ नाटक के जरिए गांवों के लोगों को आसानी से इन बारीकियों को समझाया गया। अनुमान है कि इससे सर्वे के काम में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी जिससे सर्वे कर्मियों को अपने काम को समय से पूरा में सुविधा होगी।

राजस्व विभाग एवं भू अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय इसके अलावा कई अन्य तरीके से लोगों को जागरूक करने की दिशा में काम कर रहा है। अखबारों में नियमित तौर पर विज्ञापन दिया जा रहा है। रेडियो और अन्य डिजिटल प्लेटफाॅर्म पर सर्वे के बारे में बताया जा रहा है। विभाग के सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म पर लगातार जानकारी दी जा रही है। सर्वे की सफलता के लिए जरूरी है कि लोगों को इससे संबंधित सभी जानकारी उपलब्ध हो।

नाटक का आयोजन बिहार के सभी अंचलों में एक साथ किया गया। हरेक अंचल में एक नाटक मंडली ने 2 दिन प्रस्तुतीकरण दिया। एक मंडली ने हरेक दिन 2 जगहों पर नुक्कड़ नाटक का मंचन किया। इस प्रकार एक अंचल में 4 जगहों पर इस नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन हुआ। एक माह तक चले इस आयोजन में करीब 4 दर्जन नाटक मंडलियां ने हिस्सा लिया। हरेक मंडली में 10 कलाकार थे।

इस नुक्कड़ नाटक का नाम था- चली सरकार जनता के द्वार, आपकी जमीन आपके नाम। नाटक में मुखिया और राजस्व अधिकारी के जरिए सर्वे के तकनीकी पहलुओं को समझाने का प्रयास किया गया है। बीच-बीच में गीत-संगीत का सहारा लिया गया है। शुरूआत हुड़का वाद्य यंत्र बजाकर किया गया। इसके बाद जोगीरा और आमंत्रण गीत गाकर मूल विषय वस्तु की चर्चा की गई है।

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