खबर के मुख्य बिंदु:
- तीखा हमला: पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले को बताया ‘जनादेश का अपमान’।
- बड़ा आरोप: तेजस्वी यादव बोले— “हमने पहले ही कहा था, बीजेपी अंततः नीतीश जी को कुर्सी से हटा देगी।”
- दिल्ली कूच: 5 मार्च को अमित शाह की मौजूदगी में नीतीश कुमार ने भरा है राज्यसभा का नामांकन।
- सस्पेंस: बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन? जेडीयू और बीजेपी के बीच बैठकों का दौर शुरू।
पटना: बिहार की सियासत में ‘नीतीश युग’ के अंत और एक नए अध्याय की शुरुआत ने राजधानी में बयानों का ज्वालामुखी फोड़ दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले पर लालू परिवार ने मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने अपनी चिर-परिचित शैली में नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने साफ कहा कि बिहार की जनता ने उन्हें राज्य चलाने के लिए चुना था, न कि दिल्ली जाने के लिए।
“जनादेश का सम्मान करें नीतीश”: राबड़ी देवी
मीडिया से बातचीत के दौरान राबड़ी देवी का गुस्सा साफ नजर आया। उन्होंने नीतीश कुमार के इस कदम को राजनीतिक भूल करार दिया।
”उनकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई है। उन्हें बिहार छोड़कर दिल्ली नहीं जाना चाहिए। जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में काम करने के लिए वोट दिया है, उन्हें इसी पद पर बने रहना चाहिए। यह सब भाजपा की चाल है।” — राबड़ी देवी, पूर्व मुख्यमंत्री
तेजस्वी का ‘कहा’ हुआ सच?
वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे एक सोची-समझी साजिश बताया। तेजस्वी ने याद दिलाया कि वे पहले ही कह चुके थे कि बीजेपी नीतीश कुमार को ‘सम्मानजनक विदाई’ के नाम पर किनारे लगा देगी।
- बीजेपी का गेम: तेजस्वी का आरोप है कि बीजेपी अब बिहार की सत्ता पर पूरी तरह काबिज होना चाहती है, इसलिए नीतीश कुमार को केंद्र की राजनीति में भेजा जा रहा है।
- नेतृत्व परिवर्तन: 5 मार्च को अमित शाह की मौजूदगी में हुए नामांकन के बाद से ही पटना में नए ‘चेहरे’ को लेकर कयासों का बाजार गर्म है।
त्वरित अवलोकन (Quick Facts)
- तारीख: 05 मार्च 2026 को नीतीश कुमार ने दाखिल किया नामांकन।
- मुख्य अतिथि: नामांकन के समय गृह मंत्री अमित शाह रहे मौजूद।
- मुख्य मुद्दा: बिहार के मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार का हटना तय।
- प्रतिक्रिया: आरजेडी ने इसे जनादेश के साथ विश्वासघात बताया।
- भविष्य: जेडीयू-बीजेपी गठबंधन में नए नेतृत्व पर चर्चा जारी।
VOB का नजरिया: दिल्ली की राह और पटना का मोह
नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना केवल एक व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि बिहार की 20 साल की राजनीति का टर्निंग पॉइंट है। राबड़ी देवी की ‘तीखी’ भाषा और तेजस्वी का ‘दूरदर्शी’ दावा यह बताता है कि विपक्ष इस मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या नीतीश कुमार के बिना जेडीयू अपनी जमीन बचा पाएगी? और क्या बीजेपी अब बिहार में अपना ‘इंजन’ फिट करने की तैयारी में है? आने वाले कुछ दिन बिहार की तकदीर तय करेंगे।


