
समाचार के मुख्य बिंदु: भागलपुर की लाइफलाइन की मरम्मत की तैयारी
- पिलरों की जांच: पथ निर्माण विभाग ने विक्रमशिला सेतु की मरम्मत का प्राक्कलन (Estimate) तैयार करने के लिए पिलरों की सघन जांच शुरू कर दी है.
- तकनीकी मुआयना: अभियंताओं के नेतृत्व में मजदूरों ने सेतु के ढक्कन हटाकर सीढ़ी के जरिए गार्डर बेस तक पहुँचकर बेयरिंग की स्थिति जांची.
- फोकस एरिया: विशेष रूप से पिलर संख्या 16 से 22 तक के बेयरिंग पर वाहनों के दबाव के असर का आकलन किया जा रहा है.
- नदी मार्ग से निरीक्षण: नाव के जरिए क्षतिग्रस्त पिलर के गार्डवाल के टूटे रिंग और वेल बार्डवॉल की स्थिति देखी गई.
- लागत और समय: मरम्मत कार्य पर लगभग 5 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसके दौरान प्रतिदिन 2-3 घंटे सेतु पर आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी.
- VOB इनसाइट: विक्रमशिला सेतु केवल एक पुल नहीं, बल्कि उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली मुख्य धमनियों में से एक है। 2017-18 के बाद से इसके बेयरिंग नहीं बदले गए हैं, जिससे स्पैन के असंतुलित होने का खतरा बढ़ गया था। समय रहते की जा रही यह जांच किसी बड़े हादसे को टालने के लिए अनिवार्य है।
भागलपुर | 29 मार्च, 2026
भागलपुर की पहचान और आवागमन का मुख्य केंद्र, विक्रमशिला सेतु, अब बड़े मेंटेनेंस के दौर से गुजरने वाला है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, पथ निर्माण विभाग ने सेतु की मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी जांच की प्रक्रिया तेज कर दी है। रविवार को विभागीय अभियंताओं की टीम ने पुल के संवेदनशील हिस्सों का बारीकी से निरीक्षण किया, ताकि मरम्मत के लिए सटीक बजट और कार्ययोजना मुख्यालय भेजी जा सके।
गार्डर बेस तक पहुँचे अभियंता: बेयरिंग की जांच का ‘ग्राउंड जीरो’
सेतु की ऊपरी सड़क तो अक्सर चकाचक दिखती है, लेकिन असली चुनौती इसके नीचे छिपे बेयरिंग और पिलरों में होती है। जांच के दौरान मजदूरों ने सेतु पर बने विशेष ढक्कन हटाए और सीढ़ी के सहारे गार्डर बेस तक उतरे. यहाँ लगे बेयरिंग ही वह तकनीक है जो पुल पर गुजरने वाले भारी वाहनों के झटके और दबाव को सहती है.
विशेषज्ञों की टीम ने पिलर संख्या 16 से 22 के बीच गहन जांच की है. जानकारों का कहना है कि यदि सेतु की बॉल-बेयरिंग खिसक जाए, तो स्पैन असंतुलित हो सकता है, जो पूरे ढांचे के लिए खतरनाक साबित होगा. साथ ही, अभियंताओं ने नाव का उपयोग कर पानी के भीतर पिलर के गार्डवाल और वेल बार्डवॉल की क्षति का भी जायजा लिया.
इतिहास और वर्तमान: 2017-18 के बाद अब जगी उम्मीद
विक्रमशिला सेतु का पिछला बड़ा मेंटेनेंस वर्ष 2017-18 में मुंबई की एजेंसी रोहरा रिबिल्ड द्वारा किया गया था. उस समय 4.700 किमी लंबी सड़क पर मास्टिक बिछाई गई थी और सभी पिलरों के बेयरिंग बदले गए थे. हालांकि, पांच साल का एग्रीमेंट खत्म होने के बाद सड़क का मेंटेनेंस तो होता रहा, लेकिन बेयरिंग बदलने जैसा तकनीकी काम रुका हुआ था.
मरम्मत की प्रस्तावित योजना:
- अनुमानित बजट: 5 करोड़ रुपये.
- कार्य की अवधि: जांच रिपोर्ट के बाद मुख्यालय से प्रशासनिक स्वीकृति मिलने पर टेंडर जारी होगा.
- यातायात प्रभाव: जब मरम्मत का काम शुरू होगा, तब सुरक्षा के लिहाज से रोजाना 2 से 3 घंटे के लिए सेतु पर ट्रैफिक पूरी तरह ब्लॉक रहेगा.
अधिकारियों का रुख: “सेतु सुरक्षित है, पर मेंटेनेंस जरूरी”
कार्यपालक अभियंता साकेत कुमार रोशन के मुताबिक, वर्तमान में सेतु पूरी तरह सुरक्षित है और घबराने की कोई बात नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इतने पुराने और व्यस्त सेतु के लिए समय-समय पर मेंटेनेंस अनिवार्य है. विभाग जल्द ही ‘रिवाइज एस्टीमेट’ तैयार कर मुख्यालय को भेजेगा, ताकि मानसून से पहले या उसके तुरंत बाद काम शुरू किया जा सके. पिलरों की यह जांच अभी करीब एक सप्ताह तक और चलेगी.
VOB का नजरिया: यातायात प्रबंधन और वैकल्पिक मार्ग की चुनौती
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि 5 करोड़ की यह मरम्मत योजना स्वागत योग्य है, लेकिन प्रशासन को कुछ बिंदुओं पर ध्यान देना होगा:
- ट्रैफिक ब्लॉक का समय: रोजाना 2-3 घंटे ट्रैफिक रोकने से विक्रमशिला सेतु के दोनों तरफ भीषण जाम लग सकता है। इसके लिए एम्बुलेंस और आवश्यक सेवाओं के लिए स्पष्ट ‘ग्रीन कॉरिडोर’ प्लान होना चाहिए।
- रात में कार्य की संभावना: क्या बेयरिंग बदलने का काम रात के समय (Night Shift) में किया जा सकता है? इससे आम यात्रियों को कम परेशानी होगी।
- गुणवत्ता की निगरानी: पिछली बार मुंबई की एजेंसी ने काम किया था, इस बार भी यह सुनिश्चित करना होगा कि जो भी एजेंसी काम ले, वह गुणवत्ता मानकों से समझौता न करे।
निष्कर्ष: भविष्य की सुरक्षा के लिए आज का प्रयास
विक्रमशिला सेतु पर बढ़ते वाहनों के दबाव को देखते हुए यह मेंटेनेंस अब और टाला नहीं जा सकता। अभियंताओं की यह जांच रिपोर्ट ही तय करेगी कि आने वाले दिनों में भागलपुरवासियों को सफर के दौरान कितनी सावधानी बरतनी होगी। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) मरम्मत के टेंडर, ट्रैफिक ब्लॉक के समय की घोषणा और सेतु की मजबूती से जुड़ी हर ताज़ा अपडेट आप तक सबसे पहले पहुँचाता रहेगा।


