भागलपुर, 15 जुलाई 2025।श्रावण कृष्ण पंचमी, जिसे लोक परंपरा में ‘बेड़ा पांच’ कहा जाता है, के अवसर पर नेतुला धोबिन की विशेष पूजा की गई। यह दिन बिहुला-विषहरी गाथा की सहायक नायिका नेतुला को समर्पित होता है, जिनके योगदान से बिहुला को स्वर्ग की यात्रा और पुत्रवधु बाला को जीवनदान प्राप्त हुआ था।
पूजा परंपरा एवं आस्था
मान्यता है कि जैसे बिहुला को अपनी मंज़िल नेतुला के साथ से मिली, वैसे ही आम श्रद्धालु भी नेतुला की आराधना से अपनी इच्छाओं की पूर्ति कर सकते हैं। इस दिन धोबी समाज द्वारा विशेष रूप से डलिया सजाकर नेतुला को अर्पित किया जाता है।
गंध-धूप पूजा का आयोजन
16 जुलाई को कर्क संक्रांति पड़ने के कारण आज ही गंध-धूप पूजा का आयोजन किया गया। मनसा देवी मंदिर के पुजारी संतोष झा ने देवी से आज्ञा प्राप्त कर बाजे-गाजे के साथ कुंभकार देवानंद पंडित के घर बारी कलश पूजन के लिए प्रस्थान किया।
कलश पूजन की विशेषता
- कलश में पांच विषहरी देवियों का आह्वाहन किया गया:
- जया देवी – नीले वस्त्र, धनुष-बाण, नाग-मुकुट एवं वनचंपा की माला से सुसज्जित
- दुतीला भवानी
- पद्मा कुमारी
- आदिकसुमिन
- मैना विषहरी
- कलश पर नव बेंत की पूजा कर देवी को पुष्प, बिल्वपत्र, चंदन, अक्षत, धूप-दीप और फल-पान-मेवा अर्पित किए गए।
- बाद में सभी श्रद्धालु मंदिर आए और देवी की पिंड पर छह श्रृंगार (सिंदूर की रेखाएं) की गईं।
- नैवेद्य के छह भागों में से एक भाग नेतुला धोबिन को अर्पित किया गया।
16 जुलाई को होगा बारी कलश का शोभा यात्रा
कल कर्क संक्रांति के दिन, मनसा देवी मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन को उमड़ेंगे। सिंधु सभ्यता की परंपरा के समान मेढ़ को पिंड पर स्थापित किया जाएगा और कलशों में गंगाजल भरकर अर्पण किया जाएगा।
संध्या बेला (लगभग 7 बजे) देवी की आज्ञा से कलश शोभा यात्रा निकलेगी, जो कुंभकार के घर से निकलकर सेमापुर घाट तक जाएगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालु माल्यार्पण करेंगे और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद कलश पुनः मंदिर लाया जाएगा।
बारी कलश की महत्ता
बारी कलश कच्ची मिट्टी का बना होता है जिसमें पांच नाग होते हैं, जो पांच विषहरियों के वाहन माने जाते हैं। कलश का नाम ‘बारी’ बिहुला के उपनाम पर आधारित है।
सांस्कृतिक सहभागिता
इस आयोजन में मुख्य पंडा संतोष झा, अजीत झा, साहित्यकार आलोक कुमार, मंजूषा कलाकार हेमंत कश्यप, गौरी शंकर, चंद्रशेखर, नंदकिशोर, विनय लाल, संजय लाल, रामशरण दास समेत मनसा देवी मंदिर समिति के सैकड़ों सदस्य व श्रद्धालु सम्मिलित हुए।


