
भागलपुर। कोलकाता–वाराणसी राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या–1 पर कार्गो जहाजों से माल ढुलाई की रफ्तार बढ़ने लगी है। खाद्य उत्पादों के बाद अब गिट्टी और स्टोन चिप्स का भी बड़े पैमाने पर परिवहन शुरू हो गया है। जलमार्ग से ढुलाई शुरू होने के बाद लागत में भारी कमी आई है। कारोबारियों का कहना है कि सड़क मार्ग की तुलना में पानी के रास्ते माल भेजना करीब तीन गुना तक सस्ता पड़ रहा है।
कम लागत और बड़े लोड की सुविधा मिलने से अब कारोबारी जलमार्ग को प्राथमिकता देने लगे हैं। इसके साथ ही गंगा और सोन नदी क्षेत्र से बालू की ढुलाई को लेकर भी नई योजना पर काम शुरू हो गया है।
पाकुड़ से स्टोन चिप्स की जलमार्ग से सप्लाई बढ़ी
झारखंड के पाकुड़ क्षेत्र से काला पत्थर के स्टोन चिप्स की हाल में जलमार्ग से ढुलाई की गई। व्यापारियों के अनुसार पहले पटना और आसपास के इलाकों में सड़क मार्ग से माल भेजने पर लागत ज्यादा पड़ती थी, जिससे मांग प्रभावित हो रही थी। अब कार्गो जहाज से सप्लाई होने पर भाड़ा कम हुआ है और ऑर्डर फिर से बढ़ने लगे हैं।
कारोबारियों का कहना है कि जलमार्ग से एक बार में अधिक मात्रा में माल भेजा जा सकता है, जिससे प्रति टन ढुलाई खर्च काफी कम हो जाता है। इससे बाजार में कीमत भी प्रतिस्पर्धी बनी रहती है।
बालू ढुलाई की भी बन रही योजना
जानकारों के अनुसार पटना क्षेत्र से गंगा और सोन नदी का बालू झारखंड के जिलों तक जलमार्ग से भेजने की योजना तैयार की जा रही है। यदि यह व्यवस्था नियमित होती है तो निर्माण क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी और ट्रांसपोर्ट लागत घटेगी।
नियमित सेवा की तैयारी में प्राधिकरण
आईडब्ल्यूएआई (इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया) भागलपुर के क्षेत्रीय अधिकारी रवि कौशिक ने बताया कि सड़क मार्ग की तुलना में जलमार्ग से गिट्टी और अन्य भारी निर्माण सामग्री की ढुलाई काफी किफायती साबित हो रही है। प्राधिकरण साहिबगंज से पटना के बीच नियमित कार्गो सेवा शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
उन्होंने कहा कि जलमार्ग परिवहन बढ़ने से न केवल लागत घटेगी, बल्कि सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव भी कम होगा। इससे समय, ईंधन और पर्यावरण—तीनों स्तर पर फायदा मिलेगा।


