‘नागरिक देवो भव’ के मंत्र के साथ मालदा मंडल ने लिया ‘सेवा संकल्प’; DRM बोले— “पारदर्शिता और तकनीक से बदलेगी रेलवे की सूरत”

खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):

  • बड़ी पहल: डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता के नेतृत्व में मालदा मंडल ने अपनाया ‘सेवा संकल्प’।
  • विजन: पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित रेल प्रशासन पर दिया गया जोर।
  • डिजिटल रेलवे: तकनीक के समावेशन और प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण से सुधरेगी यात्री सेवा।
  • डेडलाइन: समाज के हर वर्ग तक रेलवे सेवाओं का लाभ पहुँचाने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार।

मालदा: भारतीय रेलवे अब केवल पटरियों पर दौड़ती ट्रेन नहीं, बल्कि एक उत्तरदायी और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। इसी कड़ी में सोमवार को पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने भारत सरकार की परिकल्पना के अनुरूप ‘सेवा संकल्प’ का अंगीकरण किया। मंडल रेल प्रबंधक (DRM) श्री मनीष कुमार गुप्ता के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह साफ कर दिया कि भविष्य की रेलवे यात्रियों की सुविधाओं और तकनीक के तालमेल पर आधारित होगी।

डीआरएम कॉन्फ्रेंस हॉल में गूँजा ‘सेवा संकल्प’

​मालदा स्थित डीआरएम कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में वरिष्ठ शाखा अधिकारियों (Senior Branch Officers) की उपस्थिति में इस संकल्प का वाचन किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य रेलवे की कार्यप्रणाली को पूरी तरह नागरिक-केंद्रित बनाना है। संकल्प के बाद अधिकारियों ने विभागीय रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की कि कैसे ‘सेवा संकल्प’ को कागजों से उतारकर धरातल पर लाया जाए।

“नागरिक देवो भव”: यात्रियों की जरूरतें सबसे पहले

​मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता ने अपने संबोधन में एक बेहद महत्वपूर्ण सिद्धांत “नागरिक देवो भव” को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

  • आधुनिक तकनीक: रेलवे की हर सेवा में आधुनिक तकनीक और डिजिटलीकरण का समावेशन किया जाएगा।
  • त्वरित सेवा: यात्रियों की शिकायतों और आवश्यकताओं पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई (Efficiency) सुनिश्चित की जाएगी।
  • समावेशी विकास: रेलवे सेवाओं का विस्तार इस तरह किया जाएगा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक इसका लाभ पहुँचे।

अधिकारियों को निर्देश: “केवल काम नहीं, परिणाम चाहिए”

​डीआरएम ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे ऐसी कार्ययोजना बनाएं जिसके परिणाम ‘मापनीय’ (Measurable) हों। यानी, केवल काम करना काफी नहीं है, बल्कि उस काम से यात्रियों को कितना फायदा हुआ, इसका डेटा भी होना चाहिए। उन्होंने सुरक्षा, अवसंरचना विकास और आधुनिकीकरण के प्रति मंडल की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि रेलवे राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाती रहेगी।

कुशल और पारदर्शी प्रशासन का वादा

​कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी रेल अधिकारियों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे ‘सेवा संकल्प’ को अक्षरशः लागू करेंगे। प्रशासन को प्रौद्योगिकी-सक्षम (Tech-enabled) बनाकर जनविश्वास को और सुदृढ़ किया जाएगा। मालदा मंडल ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आने वाले समय में यात्रियों को स्टेशनों पर और यात्रा के दौरान एक बदला हुआ और अधिक सहायक माहौल मिलेगा।

VOB का नजरिया: बदलता मालदा, बदलती रेल

​मालदा मंडल के तहत बिहार और पश्चिम बंगाल के कई महत्वपूर्ण स्टेशन आते हैं। ‘सेवा संकल्प’ जैसे अभियानों का सीधा असर उन लाखों यात्रियों पर पड़ता है जो हर दिन इन रेल सेवाओं का उपयोग करते हैं। ‘नागरिक देवो भव’ का सिद्धांत यदि वास्तव में लागू होता है, तो टिकट बुकिंग से लेकर कोच की साफ-सफाई तक में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अब देखना यह है कि यह संकल्प धरातल पर कितनी तेजी से उतरता है।

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