भागलपुर, 16 जुलाई 2025 | सावन का पवित्र माह सुल्तानगंज में चरम पर है, और भोलेनाथ के भक्तों की आस्था हर रोज नए रंग दिखा रही है। सावन के छठे दिन सुल्तानगंज का गंगा घाट, अजगैबीनाथ धाम और कच्ची कांवरिया पथ बोल बम के जयघोष और शिव भजनों से गूंज उठा। भक्ति से सराबोर इस वातावरण में एक विशेष धार्मिक दृश्य तब देखने को मिला, जब ओड़िशा के कटक जिले से लगभग 250 श्रद्धालुओं की टोली ने सुल्तानगंज पहुंचकर बाबा अजगैबीनाथ धाम में गंगा जल भरा।
पारंपरिक परिधान में ओड़िशा की टोली
श्रद्धालुओं की यह टोली पीले वस्त्रों और लाल पारंपरिक साफों में सुसज्जित थी, जो ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों पर झूमते-गाते गंगा घाट से बाबा अजगैबीनाथ मंदिर तक पहुंची। उत्तरवाहिनी गंगा से जल उठाकर सभी श्रद्धालु पैदल बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा पर निकल पड़े। भक्तों ने बताया कि वे 1989-90 से लगातार हर साल इस यात्रा में सम्मिलित होते आ रहे हैं और भगवान जगन्नाथ की धरती से बाबा बैद्यनाथ की धरती तक हर बार श्रद्धा और उल्लास के साथ पैदल यात्रा करते हैं।
अर्पणा कुमारी ने जताई आस्था
इस अवसर पर जनता दल यूनाइटेड की महिला प्रदेश महासचिव एवं गोपालपुर विधानसभा प्रभारी अर्पणा कुमारी ने भी सुल्तानगंज में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने कटक की चाचा मंडली के साथ बाबा अजगैबीनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना कर गंगा जल उठाया और बाबा बैद्यनाथ धाम व बाबा बासुकीनाथ धाम के लिए रवाना हुईं। अर्पणा कुमारी ने कहा, “यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, एकता और परंपरा का प्रतीक है।”
वातावरण हुआ भक्तिमय
कटक से आई टोली ने अपने भक्ति गीतों और नृत्य से सुल्तानगंज के माहौल को पूरी तरह शिवमय कर दिया। श्रद्धालु “हर-हर महादेव”, “बोल बम” के जयघोष करते हुए, भक्ति रस में सराबोर दिखाई दिए। इस जीवंत दृश्य ने सावन की आस्था, समर्पण और भारतीय परंपरा की गहराई को एक बार फिर सबके सामने रख दिया।
सुल्तानगंज से देवघर तक की यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था की मिसाल है, बल्कि यह भारतीय लोक-जीवन की सांस्कृतिक चेतना को भी जीवंत करती है। श्रद्धालुओं का उत्साह, अनुशासन और समर्पण देखकर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि सावन में शिवभक्ति की यह यात्रा आस्था का महाकुंभ बन चुकी है।


