खान सर हाईकोर्ट में FIR रद्द कराने जाएंगे? जानिए क्या होती है ‘FIR Quashing Petition’ और कब खत्म हो सकता है पूरा मामला

पटना के चर्चित कोचिंग विवाद मामले में शिक्षक फैजल खान उर्फ खान सर के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर अब कानूनी लड़ाई नए मोड़ पर पहुंच सकती है। खबरें हैं कि खान सर की कानूनी टीम एफआईआर को चुनौती देने के लिए Patna High Court का दरवाजा खटखटाने पर विचार कर रही है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर FIR Quashing Petition क्या होती है, हाईकोर्ट किन परिस्थितियों में एफआईआर रद्द कर सकता है और इस मामले में खान सर को कितना कानूनी लाभ मिल सकता है?


क्या होती है FIR Quashing Petition?

एफआईआर क्वैशिंग पिटीशन वह कानूनी याचिका होती है, जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति हाईकोर्ट से अनुरोध करता है कि उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर या उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही को रद्द (Quash) कर दिया जाए।

भारतीय कानून के तहत पुलिस या निचली अदालत स्वयं एफआईआर खत्म नहीं कर सकती। यह विशेष शक्ति हाईकोर्ट को प्राप्त है।


हाईकोर्ट के पास कौन-कौन सी शक्तियां होती हैं?

पटना हाईकोर्ट की अधिवक्ता पुतुल सिन्हा के अनुसार हाईकोर्ट:

  • एफआईआर रद्द कर सकता है।
  • जांच पर अंतरिम रोक लगा सकता है।
  • गिरफ्तारी से अस्थायी राहत दे सकता है।
  • आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा सकता है।

लेकिन अदालत ऐसा तभी करती है जब उसे प्रथम दृष्टया कोई मजबूत कानूनी आधार दिखाई देता है।


खान सर के मामले में क्या स्थिति है?

फिलहाल पटना सिविल कोर्ट ने खान सर को अंतरिम राहत देते हुए उनके खिलाफ पुलिस की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई है।

अदालत ने अगली सुनवाई 30 जून को निर्धारित की है। ऐसे में खान सर चाहें तो उससे पहले संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं।

हालांकि उनके खिलाफ दर्ज धाराओं में गंभीर आरोप शामिल बताए जा रहे हैं, इसलिए अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और केस डायरी का गहन परीक्षण करेगी।


किन परिस्थितियों में हाईकोर्ट FIR रद्द कर सकता है?

अधिवक्ता पुतुल सिन्हा के अनुसार हाईकोर्ट यह देखता है कि:

  • एफआईआर में लगाए गए आरोपों से प्रथम दृष्टया कोई अपराध बनता है या नहीं।
  • शिकायत दुर्भावनापूर्ण (Malicious) तो नहीं है।
  • कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग तो नहीं हो रहा।
  • आरोप इतने कमजोर हैं कि उन्हें सच मान लेने पर भी अपराध नहीं बनता।

यदि अदालत को इनमें से कोई स्थिति दिखाई देती है तो एफआईआर रद्द की जा सकती है।


सिर्फ ‘मैं निर्दोष हूं’ कहना काफी नहीं

कानून के जानकारों के मुताबिक एफआईआर रद्द कराने के लिए यह कहना पर्याप्त नहीं होता कि आरोपी निर्दोष है।

हाईकोर्ट यह मानकर चलता है कि एफआईआर में लिखे आरोप फिलहाल सही हैं और फिर यह जांचता है कि उन आरोपों से कोई संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं।

यदि आरोपों को सही मानने के बाद भी अपराध नहीं बनता, तभी एफआईआर रद्द होने की संभावना बढ़ती है।


भजन लाल केस: FIR रद्द करने का सबसे बड़ा आधार

एफआईआर क्वैशिंग से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला State of Haryana v. Bhajan Lal सबसे अधिक उद्धृत किया जाता है।

इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि हाईकोर्ट निम्न परिस्थितियों में एफआईआर रद्द कर सकता है:

  • आरोप पूरी तरह अविश्वसनीय हों।
  • प्रथम दृष्टया कोई अपराध न बनता हो।
  • शिकायत दुर्भावना से प्रेरित हो।
  • कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया जा रहा हो।
  • मामला केवल उत्पीड़न के उद्देश्य से दर्ज किया गया हो।

क्या गंभीर मामलों में भी FIR रद्द हो सकती है?

गंभीर अपराधों जैसे:

  • हत्या
  • हत्या का प्रयास
  • बलात्कार
  • भ्रष्टाचार
  • समाज पर व्यापक प्रभाव डालने वाले अपराध

में हाईकोर्ट आमतौर पर बहुत सावधानी से हस्तक्षेप करता है। ऐसे मामलों में केवल समझौते या सामान्य दलीलों के आधार पर एफआईआर रद्द होना आसान नहीं होता।


अब आगे क्या?

यदि खान सर हाईकोर्ट में क्वैशिंग पिटीशन दाखिल करते हैं, तो अदालत एफआईआर, उपलब्ध साक्ष्य, पुलिस जांच और शिकायतकर्ता के आरोपों का परीक्षण करेगी। इसके बाद हाईकोर्ट तय करेगा कि:

  • एफआईआर जारी रहे,
  • जांच पर रोक लगे,
  • अंतरिम राहत दी जाए,
  • या फिर एफआईआर को पूरी तरह रद्द कर दिया जाए।

फिलहाल खान सर को निचली अदालत से अंतरिम सुरक्षा मिली हुई है और पूरे मामले पर अब कानूनी नजरें 30 जून की अगली सुनवाई तथा संभावित हाईकोर्ट याचिका पर टिकी हैं।

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