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IAS अधिकारियों के डेप्युटेशन पर केंद्र और गैर-बीजेपी शासित राज्य क्यों हैं आमने-सामने?

ByShailesh Kumar

Jan 24, 2022

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग यानी डीओपीटी ने हाल में आईएएस (कैडर) नियम, 1954 में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। अगर यह लागू हो जाता है तो केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आईएएस अधिकारियों की केंद्र की मांग को राज्य सरकारें रद्द नहीं कर पाएंगी। इस प्रस्ताव के पीछे डीओपीटी का तर्क है कि राज्य केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए पर्याप्त संख्या में आईएएस अधिकारियों को नहीं भेज रहे हैं, जिससे केंद्र सरकार का कामकाज प्रभावित हो रहा है।

दूसरी तरफ, गैर-भाजपा शासित राज्यों का कहना है कि इससे देश के संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचेगा और केंद्र व राज्यों के बीच संबंधों में तनाव बढ़ेगा। डीओपीटी का कहना है कि केंद्र में संयुक्त सचिव स्तर तक भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के घटते प्रतिनिधित्व का रुझान देखा गया है, क्योंकि ज्यादातर राज्य अपने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति रिजर्व (सीडीआर) दायित्वों को पूरा नहीं कर रहे हैं और केंद्र में सेवा के लिए उनके द्वारा प्रायोजित अधिकारियों की संख्या बहुत कम है। डीओपीटी के सूत्रों के अनुसार, सीडीआर पर आईएएस अधिकारियों की संख्या 2011 में 309 से घटकर 223 हो गई है।

‘केंद्र की जरूरत को पूरा करने के लिए बदलाव होगा’ 
उन्होंने कहा कि सीडीआर उपयोग का प्रतिशत 2011 में 25 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने कहा कि आईएएस में उप सचिव या निदेशक स्तर पर आईएएस अधिकारियों की संख्या 2014 में 621 से बढ़कर 2021 में 1130 हो जाने के बावजूद केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर ऐसे अधिकारियों की संख्या 117 से घटकर 114 हो गई है। यह संख्या केंद्र की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

डीओपीटी ने 20 दिसंबर, 2021 को सभी राज्य सरकारों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा था, पर जवाब नहीं मिलने के बाद 27 दिसंबर, 2021, छह जनवरी और 12 जनवरी 2022 को इस संबंध में रिमाइंडर भेजे थे। राज्यों को 12 जनवरी को भेजे गए पत्र में के डेप्युटेशन पर अधिकारियों को भेजने पर राज्यों की असहमति को खत्म करने के लिए केंद्र की शक्ति का उल्लेख है। राज्य सरकारों को 25 जनवरी, 2022 तक नियम में प्रस्तावित बदलावों पर अपनी टिप्पणियां देने के लिए कहा गया है।

सीएम ममता समेत कई राज्य सरकारें इसके खिलाफ
इस कदम की पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी आलोचना की। बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव को वापस लेने का आग्रह किया था। उन्होंने दावा किया था कि इससे राज्यों का प्रशासन प्रभावित होगा। तृणमूल कांग्रेस की नेता ने कहा कि यह सहकारी संघवाद की भावना के खिलाफ है। यह आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की पोस्टिंग के मामले में केंद्र और राज्यों के बीच सौहार्दपूर्ण व्यवस्था को बिगाड़ेगा।

झारखंड के सीएम बोले- यह सहकारी संघवाद की भावना के खिलाफ 
झारखंड के सीएम और झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी के उत्तराधिकारी हेमंत सोरेन ने प्रस्तावित संशोधनों को कठोर और सहकारी संघवाद की भावना के खिलाफ बताया। सोरेन ने कहा कि इस कदम से पहले से ही तनावग्रस्त केंद्र-राज्य संबंधों में और तनाव आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के उत्पीड़न और राज्य सरकार के खिलाफ प्रतिशोध की राजनीति के लिए इसका दुरुपयोग होने की संभावना है।

CM स्टालिन बोले- संघीय राजनीति की जड़ पर प्रहार
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने भी इस प्रस्तावित आईएएस कैडर नियमों में संशोधन का विरोध किया है। उन्होंने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि यह देश की संघीय राजनीति और राज्य की स्वायत्तता की जड़ पर प्रहार है। इस कदम को वापस खींच लिया जाए। स्टालिन ने मोदी को लिखे पत्र में कहा कि अगर इसे लागू किया जाता है, तो इससे संघ और राज्यों के बीच मौजूद सहकारी संघवाद की भावना को अपूरणीय क्षति होगी और केंद्र सरकार में शक्तियों का केंद्रीकरण होगा।

केरल के सीएम ने कहा- यह केंद्र केंद्र सरकार के पक्ष में
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी प्रधानमंत्री से प्रस्तावित संशोधनों को हटाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह भय मनोविकृति और अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों के बीच राज्य सरकार की नीतियों को लागू करने के लिए झिझक का रवैया पैदा करेगा, जो कि राजनीतिक रूप से विरोध करने वाली पार्टियों द्वारा बनाई गई हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता ने कहा कि प्रतिनियुक्ति नियम केंद्र सरकार के पक्ष में ज्यादा हैं।