कौन था चंदन मिश्रा ? आइए जाने चंदन का आपराधिक इतिहास

पारस अस्पताल में कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा की दिनदहाड़े हत्या, बिहार में कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल

पटना, 17 जुलाई 2025 | राजधानी पटना में उस समय हड़कंप मच गया जब शहर के एक बड़े निजी अस्पताल – पारस हॉस्पिटल – में दिनदहाड़े गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी। यह हमला किसी आम व्यक्ति पर नहीं, बल्कि कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा पर हुआ, जिसकी अस्पताल के आईसीयू में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई।

कौन था चंदन मिश्रा?

बक्सर निवासी चंदन मिश्रा का नाम बिहार के अपराध जगत में कोई नया नहीं है। उसके खिलाफ हत्या, अपहरण और संगठित अपराध के दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। वर्तमान में वह पैरोल पर जेल से बाहर था और पटना के पारस अस्पताल में स्वास्थ्य जांच के लिए भर्ती था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चंदन मिश्रा भागलपुर जेल में बंद था और हाल ही में पैरोल पर बाहर आया था।

कैसे हुई हत्या?

हत्या की पूरी वारदात सीसीटीवी में कैद हो गई है। पांच अपराधी सफेद रंग की शर्ट और नीली जींस पहने मुख्य शूटर तौसीफ बादशाह के नेतृत्व में अस्पताल में दाखिल होते हैं और सीधे आईसीयू में पहुंचकर चंदन को गोलियों से छलनी कर देते हैं। हमलावरों ने न तो चेहरा ढका था और न ही किसी डर का संकेत था। यह घटना प्रदेश में अपराधियों के बढ़ते मनोबल और प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़ा करती है।

चंदन मिश्रा का आपराधिक इतिहास

  • 2011 में बक्सर के चूना कारोबारी राजेंद्र केसरी की हत्या में मुख्य आरोपी था। इस केस में चंदन को उम्रकैद और उसके सहयोगी शेरू सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
  • हत्या से पहले, चंदन और शेरू ने जेल कर्मी हैदर इमाम की हत्या की थी, हालांकि अदालत में साक्ष्य के अभाव में वे बरी हो गए थे।
  • 2009 से 2012 के बीच दोनों ने दर्जनों आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया।
  • 2015 में सुरक्षा कारणों से चंदन को भागलपुर जेल शिफ्ट किया गया था, लेकिन जेल के अंदर से भी वह आपराधिक गतिविधियां संचालित करता रहा।

पुलिस की कार्रवाई और अब तक की जानकारी

मुख्य शूटर तौसीफ बादशाह की पहचान हो चुकी है और एसटीएफ के साथ पटना पुलिस की टीम लगातार छापेमारी कर रही है। उसकी मां पटना के सत्तार मेमोरियल कॉलेज ऑफ एजुकेशन में कार्यरत हैं, जहां पुलिस ने पूछताछ की और कई महत्वपूर्ण जानकारियां इकट्ठी की हैं। हालांकि तौसीफ अब तक फरार है।

एक तरफ जहां चंदन मिश्रा जैसे अपराधियों की सार्वजनिक हत्या कानून-व्यवस्था की गंभीरता को उजागर करती है, वहीं दूसरी ओर इससे बिहार की सुरक्षा व्यवस्था पर व्यापक बहस भी छिड़ गई है। अस्पताल जैसी सुरक्षित माने जाने वाली जगह में घुसकर हत्या कर देना, प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।

 

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