
मोतिहारी/पूर्वी चंपारण। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में ‘शराबबंदी’ की दावों के बीच मौत के सौदागरों ने एक बार फिर खूनी खेल खेला है। मोतिहारी के विभिन्न इलाकों में संदिग्ध जहरीली शराब के सेवन से मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 8 हो गई है। रविवार, 5 अप्रैल 2026 की रात तक मिली जानकारी के अनुसार, इस त्रासदी ने न केवल जिला प्रशासन की नींद उड़ा दी है, बल्कि चंपारण के ग्रामीण अंचलों में मातम और खौफ का माहौल पैदा कर दिया है। जहाँ एक तरफ आधा दर्जन लोग विभिन्न सरकारी अस्पतालों में अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कानून के डर से कई लोग निजी क्लीनिकों में छिपकर इलाज कराने को मजबूर हैं, जिससे वास्तविक आंकड़ा और भी भयावह होने की आशंका है। इस बीच, उत्पाद विभाग और मोतिहारी पुलिस ने एक संयुक्त और गुप्त ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करते हुए उस रासायनिक जखीरे को बरामद कर लिया है, जो इस पूरे नरसंहार की मुख्य जड़ माना जा रहा है।
पिपराकोठी के सरेह में ‘मौत’ का भंडार: 17 डिब्बों में बंद था ‘सफेद ज़हर’
घटनाक्रम में रविवार की रात एक बड़ा मोड़ आया जब उत्पाद विभाग को गुप्त सूचना मिली कि पिपराकोठी थाना क्षेत्र के सलेमपुर सरेह में उसी घातक स्पिरिट या केमिकल को डंप किया गया है, जिसकी सप्लाई ने चंपारण में कोहराम मचा रखा है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए उत्पाद पुलिस और पिपराकोठी थाना पुलिस ने सदर-2 डीएसपी जितेश कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की।
अंधेरी रात के साये में जब पुलिस की टीम सलेमपुर सरेह के खेतों में पहुँची, तो वहां का नजारा अपराधियों की शातिर सोच को बयां कर रहा था। पुलिस की लोकेशन ट्रैक न हो सके, इसके लिए धंधेबाजों ने केमिकल के डिब्बों को खेत पटवन के लिए बनाए गए एक नाले के भीतर छिपाकर रखा था। सघन तलाशी के बाद पुलिस ने नाले से कुल 17 डिब्बा स्पिरिट बरामद किया। जांच अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि अगर यह 17 डिब्बा केमिकल अन्य गांवों में सप्लाई हो गया होता, तो मौतों का यह तांडव बेकाबू हो जाता और न जाने कितनी और अर्थियां उठतीं।
कारोबारियों का सिंडिकेट: खलीफा से लेकर राजा यादव तक सलाखों के पीछे
इस ‘केमिकल कांड’ के पीछे एक बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। पुलिस ने अब तक इस मामले में करीब एक दर्जन से अधिक धंधेबाजों और बिचौलियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए मुख्य आरोपियों में खलीफा यादव, जम्बू यादव और राजा यादव शामिल हैं। ये वे लोग हैं जो स्थानीय स्तर पर ‘मौत के सामान’ की डिस्ट्रीब्यूशन चेन को संचालित कर रहे थे।
हालांकि, इस गिरोह की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी और मुख्य आरोपी कन्हैया यादव, जो राजा यादव का भाई है, अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है। कन्हैया यादव के बारे में बताया जा रहा है कि वही बाहरी स्रोतों से इस केमिकल को मंगवाता था और फिर अपने नेटवर्क के जरिए इसे गांवों तक पहुँचाता था। उत्पाद विभाग के उप आयुक्त नीरज कुमार ने पुष्टि की है कि फरार कन्हैया यादव की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है और उसके डिजिटल फुटप्रिंट्स को भी खंगाला जा रहा है।
छिपा हुआ इलाज और प्रशासनिक चुनौती: आंकड़ों का पेच (विशेष विश्लेषण)
द वॉयस ऑफ बिहार के विशेष विश्लेषण के अनुसार, मोतिहारी की इस घटना का सबसे दुखद पहलू वह ‘छिपा हुआ खौफ’ है जो बीमार लोगों के बीच व्याप्त है।
- निजी अस्पतालों का खेल: करीब आधा दर्जन लोग आधिकारिक रूप से इलाजरत हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार कई पीड़ित ऐसे हैं जो पुलिसिया झमेलों और शराबबंदी कानून के तहत होने वाली कार्रवाई के डर से निजी अस्पतालों में छिपकर इलाज करा रहे हैं। इससे प्रशासन के पास मौतों और बीमारी का सटीक डेटा नहीं पहुँच पा रहा है।
- देर से इलाज का जोखिम: केमिकल युक्त शराब के सेवन के बाद ‘अंधापन’ और ‘मल्टी-ऑर्गन फेलियर’ का खतरा बढ़ जाता है। जो लोग छिपकर इलाज करा रहे हैं, वे उचित एंटीडोट के अभाव में अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
- प्रशासनिक सतर्कता: उप आयुक्त नीरज कुमार और उनकी टीम अब निजी अस्पतालों पर भी नजर रख रही है ताकि संदिग्ध मरीजों की पहचान की जा सके और उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जा सके।
नीरज कुमार का बयान: “बड़ी त्रासदी को टालने में सफल रही पुलिस”
उत्पाद विभाग के उप आयुक्त नीरज कुमार ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि पिपराकोठी की यह बरामदगी इस पूरे केस की दिशा तय करेगी। उन्होंने बताया कि बरामद केमिकल की प्रकृति वैसी ही प्रतीत हो रही है, जैसा कि अब तक के मृतक पीड़ितों के लक्षणों से सामने आया है। “अगर ये 17 डिब्बे सप्लाई हो जाते, तो स्थिति भयावह हो सकती थी। हमारी टीम ने समय रहते इस जखीरे को पकड़कर कई जानें बचाई हैं,” नीरज कुमार ने कहा।
सदर-2 डीएसपी जितेश कुमार ने भी स्पष्ट किया कि पुलिस अब उस ‘स्रोत’ तक पहुँचने की कोशिश कर रही है जहाँ से यह स्पिरिट बिहार की सीमा में प्रवेश कर रहा है। पकड़े गए खलीफा यादव और जम्बू यादव से कड़ी पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के ऊपरी और निचले स्तर के सभी गुर्गों को बेनकाब किया जा सके।
संतुलित नजरिया: व्यवस्था की विफलता बनाम माफिया का रसूख
एक तटस्थ दृष्टिकोण से देखें तो, मोतिहारी का यह कांड बिहार में शराबबंदी की जमीनी हकीकत पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
- विफलता: जब सरकार दावा करती है कि सीमाएं सील हैं और निगरानी पुख्ता है, तब 17 डिब्बा केमिकल का एक ही स्थान पर मिलना यह साबित करता है कि माफिया तंत्र अभी भी सक्रिय है।
- सकारात्मक पक्ष: पुलिस और उत्पाद विभाग की त्वरित कार्रवाई, विशेषकर डीएसपी जितेश कुमार के नेतृत्व में आधी रात को की गई छापेमारी ने अपराधियों के हौसले पस्त किए हैं। 30 गिरफ्तारियां और मुख्य रसायनों की बरामदगी प्रशासन की गंभीरता को दर्शाती है।
न्याय की आस में मोतिहारी
5 अप्रैल 2026 की यह रात मोतिहारी के लिए भारी है। 8 परिवारों ने अपने कमाऊ सदस्यों को खो दिया है और कई लोग अब भी अस्पताल के बेड पर मौत से लड़ रहे हैं। 17 डिब्बा स्पिरिट की बरामदगी ने पुलिस को एक बड़ी लीड तो दी है, लेकिन कन्हैया यादव का फरार होना अभी भी जांच की राह में एक रोड़ा बना हुआ है। चंपारण की जनता अब केवल मुआवजे की नहीं, बल्कि उन चेहरों की फांसी की मांग कर रही है जिन्होंने चंद रुपयों के लालच में मासूमों के गले में ज़हर उतारा।
द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस पूरी जांच पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। हमारा मानना है कि जब तक कन्हैया यादव जैसे बड़े मगरमच्छ नहीं पकड़े जाते, तब तक सलेमपुर सरेह जैसे खेतों में ‘मौत’ डंप होती रहेगी। फिलहाल, उत्पाद विभाग की टीम बरामद केमिकल के सैंपल्स को लैब भेजने की तैयारी में है।


