बिहार विधान परिषद की नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी ने एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपने पद की गरिमा भूल चुके हैं, ऐसे में उनसे किसी तरह की अपेक्षा रखना ठीक नहीं है। राबड़ी देवी का कहना था कि जब मुख्यमंत्री खुद नियम और मर्यादा की सीमाओं का पालन नहीं करते, तो विपक्ष या जनता से संयम की उम्मीद करना उचित नहीं है।
विधान परिषद परिसर के पोर्टिको के बाहर पत्रकारों से बातचीत में जब उनसे पूछा गया कि क्या वह मुख्यमंत्री से माफी की मांग करेंगी, तो उन्होंने साफ कहा कि वे पहले भी कई बार यह बात कह चुकी हैं कि जब कोई अपने पद की गरिमा ही भूल जाए, तो उससे उम्मीद रखना व्यर्थ है। उन्होंने कहा कि सदन में मुख्यमंत्री की भाषा और व्यवहार जनता ने खुद देखा है और यह किसी से छिपा नहीं है।
राबड़ी देवी ने आगे कहा कि सदन में लड़के-लड़कियों को लेकर की जाने वाली टिप्पणियां आपत्तिजनक होती हैं और इससे पद की मर्यादा पर सवाल खड़े होते हैं। उनके अनुसार मुख्यमंत्री की शब्दावली और आचरण से यह स्पष्ट होता है कि वे अपने पद की गरिमा को नजरअंदाज कर रहे हैं।
इधर, विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान राबड़ी देवी और उनके सहयोगियों को एक दिन के लिए निलंबित भी किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि सभापति का आदेश है कि उन्हें 12 घंटे तक परिषद में उपस्थित नहीं होना है और वे इस आदेश का सम्मान कर रही हैं। उन्होंने जोड़ा कि जब सभापति ने सस्पेंड किया है तो सदन में जाने का सवाल ही नहीं उठता, नियमों का पालन सभी के लिए अनिवार्य है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष इसे सरकार की कार्यशैली और भाषा पर सवाल के रूप में उठा रहा है, वहीं सत्तापक्ष के लिए यह मुद्दा राजनीतिक चुनौती बनता दिख रहा है कि वह इस विवाद पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है और जनता के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करता है।


