नई दिल्ली/पटना | 27 फरवरी, 2026: भारत में डिजिटल सुरक्षा और साइबर फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। ‘सिम बाइंडिंग’ (SIM Binding) नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की समय सीमा अब खत्म हो रही है और सरकार ने इसे आगे बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि 1 मार्च 2026 से आपके फोन में वॉट्सऐप और टेलीग्राम चलाने के नियम पूरी तरह बदल जाएंगे।
क्या है ‘सिम बाइंडिंग’ और आप पर क्या होगा असर?
अब तक वॉट्सऐप या टेलीग्राम जैसे ऐप्स को एक बार ओटीपी के जरिए एक्टिवेट करने के बाद आप फोन से सिम निकाल कर भी वाई-फाई के जरिए चला सकते थे। लेकिन नए नियमों के बाद:
- एक्टिव सिम जरूरी: अगर आपके मोबाइल में वह रजिस्टर्ड सिम कार्ड मौजूद नहीं है, तो वॉट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल और स्नैपचैट जैसे मैसेजिंग ऐप्स काम करना बंद कर देंगे।
- लगातार वेरिफिकेशन: ऐप को काम करने के लिए फोन में उस सिम का होना अनिवार्य होगा जिससे वह अकाउंट बना है। सिम निकलते ही ऐप अपने आप लॉग-आउट या ‘डिसेबल’ हो सकता है।
- कंप्यूटर यूजर्स के लिए नया नियम: जो लोग दफ्तरों या घरों में कंप्यूटर (Web Version) पर वॉट्सऐप चलाते हैं, उनके लिए अब मुश्किल बढ़ने वाली है। कंप्यूटर पर लॉगिन किया हुआ अकाउंट अब हर 6 घंटे में अपने आप लॉग-आउट हो जाएगा। दोबारा लॉगिन करने के लिए आपको फिर से फोन और सिम के जरिए प्रमाणीकरण (Authentication) करना होगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
दूरसंचार मंत्रालय (DoT) और सरकार का दावा है कि साइबर अपराधी अक्सर बिना सिम वाले फोन या क्लोन किए गए नंबरों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं। ‘डिजिटल अरेस्ट’ और ‘इन्वेस्टमेंट फ्रॉड’ जैसे मामलों में देखा गया है कि ठग विदेशों या दूरदराज के इलाकों से बिना एक्टिव सिम के भारतीय नंबरों का उपयोग कर रहे थे। ‘सिम बाइंडिंग’ से हर अकाउंट एक फिजिकल सिम (KYC वेरिफाइड) से जुड़ा रहेगा, जिससे जालसाजों को ट्रैक करना आसान होगा।
VOB का नजरिया: सुरक्षा की कीमत पर थोड़ी असुविधा?
यह सच है कि 6 घंटे में बार-बार लॉग-आउट होना उन लोगों के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है जो दिनभर कंप्यूटर पर वॉट्सऐप के जरिए काम करते हैं। साथ ही, उन लोगों को भी दिक्कत होगी जो सिम कार्ड बदलकर केवल वाई-फाई पर पुराने नंबर का वॉट्सऐप चलाना चाहते थे। लेकिन, जिस तरह से बिहार सहित देशभर में साइबर ठगी के मामले बढ़े हैं, उसे देखते हुए यह ‘डिजिटल पहरा’ आपकी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने के लिए एक कड़वी लेकिन जरूरी दवा जैसा है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


