मोदी से इज़रायल क्या सीख सकता है: राष्ट्रीय सम्मान एक रणनीतिक संपत्ति — ज़की शालोम (द जेरूसलम पोस्ट)

अमेरिका-भारत तनाव और खान यूनिस घटना के संदर्भ में लेखक ने बताया — कठिन परिस्थितियों में तुरंत माफी न करना कैसे दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को सुदृढ़ कर सकता है

[विश्लेषण] — दुनिया के सामने अपनी छवि संभालने और राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा करने को रणनीतिक संपत्ति मानते हुए द जेरूसलम पोस्ट के विश्लेषक ज़की शालोम ने हालिया घटनाओं से इज़रायल के लिए अहम सबक निकाले हैं। उनके अनुसार अमेरिका-भारत संबंधों में बढ़े तनाव और खान यूनिस (गाज़ा) में अस्पताल पर हुई हमले की प्रतिक्रिया के तर्ज पर इज़रायल को शब्दों और रुख दोनों में सावधानी बरतने की जरूरत है।


प्रमुख बिंदु — लेख का सार

  • पिछले महीनों में अमेरिका-भारत रिश्ते में तनाव देखा गया — टैरिफ विवाद, भारत-रूस संबंध और सीमा झड़पों को लेकर अमेरिकी रुख प्रमुख कारण रहे।
  • राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कठोर बयानों से भारत-अमेरिका संबंधों में खटास आई; मोदी ने व्यक्तिगत और राष्ट्रीय सम्मान की ठेस माने जाने पर दृढ़ रुख अपनाया और तत्काल माफी नहीं मांगी।
  • खान यूनिस (25 अगस्त) में नासेर अस्पताल पर हमला और उसके बाद इज़राइली नेतृत्व की तेज-तर्रार माफी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इज़रायल की कूटनीतिक स्थिति को कमजोर कर दिया — क्योंकि जल्दबाज़ी में स्वीकार की गई जिम्मेदारी दीर्घकालिक कानूनी/रणनीतिक प्रभाव पैदा कर सकती है।
  • शालोम का तर्क: मुश्किल हालात में राष्ट्रीय सम्मान का समूहिक और ठोस रुख आगे चलकर रणनीतिक लाभ दे सकता है; तुरंत माफी या अत्यधिक पारदर्शिता बिना जांच के नुकसानदेह हो सकती है।
  • निष्कर्ष: इज़राइल को दुनिया के सामने अटल और मजबूत छवि पेश करनी चाहिए — अंतरराष्ट्रीय दबाव हो तो भी बयान-बाजी में संयम और नीति में दृढ़ता आवश्यक है।

लेख के अहम तर्क और उदाहरण

  1. भारत-अमेरिका संबंधों का उदाहरण
    • ट्रम्प प्रशासन और भारत के बीच टैरिफ व सुरक्षा मुद्दों पर मतभेद रहे। ट्रम्प के कटाक्षों (जिनमें मोदी पर व्यक्तिगत टिप्पणी भी शामिल थी) के बाद भारत ने दबाव में न आकर प्रतिष्ठा बनाए रखी — प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ दिनों तक फोन कॉल स्वीकार नहीं किये और सख्त रुख अपनाया।
    • शालोम के अनुसार, इससे स्पष्ट संदेश गया कि भारत अपनी राष्ट्रीय गरिमा की रक्षा करेगा और छोटे/अधीनस्थ देश की तरह व्यवहार बर्दाश्त नहीं करेगा।
  2. खान यूनिस घटना का विश्लेषण
    • अस्पताल पर हमला और तेज-तर्रार माफी ने इज़राइल को तात्कालिक भावनात्मक पूर्ति दे दी पर साथ ही अंतरराष्ट्रीय बहस में उसकी कानूनी और कूटनीतिक स्थिति कमजोर हुई।
    • बाद में यह बात सामने आई कि कुछ पीड़ित हमास से जुड़े थे, लेकिन शुरुआती आकस्मिक स्वीकृति ने इज़राइल की स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया।
  3. रणनीतिक सबक
    • कठिन परिस्थितियों में त्वरित माफी या जिम्मेदारी स्वीकार करना विदेशी आलोचना को शांत कर सकता है, पर दीर्घकालिक रणनीतिक हितों के लिहाज़ से यह हमेशा सही नहीं।
    • राष्ट्रीय सम्मान का दृढ़ रुख रखना और बयानबाजी में संयम रखना, शालोम के अनुसार, विश्व स्तर पर ताकत और आत्म-निर्भरता का संकेत देता है जिससे विरोधी रणनीतिक तौर पर फायदा नहीं उठा पाते।

टिप्पणी (लेखक का निष्कर्ष)

ज़की शालोम का निष्कर्ष स्पष्ट है: राष्ट्रीय सम्मान कोई विलासिता नहीं, बल्कि रणनीतिक संपत्ति है। यदि इज़राइल (या कोई अन्य देश) अपनी अंतरराष्ट्रीय स्थिति और सुरक्षा को मजबूत रखना चाहता है, तो उसे भावनात्मक प्रतिक्रियाओं और जल्दबाज़ी में माफी जैसी कार्रवाइयों से परहेज़ करना चाहिए — बजाय इसके कि वह ठोस सबूत और रणनीतिक विचार के साथ अपना रुख बनाए रखे।


लेखक एवं स्रोत: ज़की शालोम, द जेरूसलम पोस्ट (विश्लेषण/ओप-एड)
(नोट: यह रिपोर्ट मूल लेख के तर्कों और उदाहरणों का सार प्रस्तुत करती है। मूल लेख और संदर्भों के लिए द जेरूसलम पोस्ट के प्रकाशन की ओर देखना उपयोगी होगा।)


 

  • Related Posts

    फॉर्मर आईडी पर सदन में गरमाया मामला, मंत्री बोले—किसी किसान का लाभ नहीं रुका

    Share Add as a preferred…

    Continue reading