लौरिया/बेतिया | 27 फरवरी, 2026: पश्चिम चम्पारण जिले के लौरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत नगर पंचायत में गुरुवार की दोपहर एक भीषण हादसे ने पूरे बाजार को दहशत में डाल दिया। यूनियन बैंक के सामने स्थित एक मीट दुकान में छोटा रसोई गैस सिलेंडर फटने से दुकानदार, ग्राहक और राहगीरों समेत कुल 11 लोग बुरी तरह झुलस गए। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास के लोग सहम गए और इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
मीट दुकान में अचानक भड़की आग, फिर हुआ धमाका
जानकारी के अनुसार, हादसा गुरुवार दोपहर करीब 12:30 बजे हुआ। लौरिया नगर पंचायत में यूनियन बैंक के ठीक सामने एक मीट दुकान पर छोटे गैस सिलेंडर का उपयोग किया जा रहा था। अचानक सिलेंडर में आग भड़क गई और देखते ही देखते वह तेज धमाके के साथ फट गया। इसकी चपेट में न केवल दुकान के अंदर मौजूद लोग आए, बल्कि बाहर से गुजर रहे राहगीर भी झुलस गए।
घायलों की स्थिति: 4 की हालत नाजुक
घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लौरिया पहुँचाया गया।
- गंभीर स्थिति: प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रौशन कुमार ने बताया कि 11 घायलों में से दो महिलाओं और दो बच्चों की स्थिति अत्यंत नाजुक है।
- रेफर: प्राथमिक उपचार के बाद सभी घायलों को बेहतर इलाज के लिए जीएमसीएच (GMCH) बेतिया रेफर कर दिया गया है।
- प्रमुख घायलों के नाम: गोविंद राय, विनय कुमार शुक्ला, गुलाब पटेल, प्रेमनाथ कुमार, बेबी कुमारी, सीता देवी और एक छह वर्षीय बच्ची सहित अन्य शामिल हैं।
प्रशासनिक सख्ती: व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को चेतावनी
हादसे की सूचना मिलते ही सीओ नितेश कुमार सेठ, थानाध्यक्ष रमेश कुमार शर्मा और सभापति प्रतिनिधि संजय कुमार अस्पताल पहुँचे और घायलों का हाल जाना।
- कमर्शियल सिलेंडर अनिवार्य: सीओ नितेश कुमार सेठ ने दुकानदारों को कड़ी हिदायत दी है कि वे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में केवल कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग करें। सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
- जांच के आदेश: थानाध्यक्ष ने बताया कि आग लगने के कारणों की तकनीकी जांच की जा रही है।
- अपील: अस्पताल के आसपास बेतरतीब वाहन खड़ा करने वालों को चेतावनी दी गई है ताकि एंबुलेंस के आवागमन में बाधा न हो।
VOB का नजरिया: सुरक्षा से समझौता पड़ रहा भारी
लौरिया का यह हादसा एक बड़ा सबक है। भीड़भाड़ वाले बाजारों में छोटे और अवैध रूप से रिफिल किए गए सिलेंडरों का उपयोग ‘चलता है’ वाली मानसिकता का परिणाम है। प्रशासन की सख्ती केवल हादसों के बाद ही क्यों दिखती है? व्यावसायिक क्षेत्रों में नियमित जांच की कमी और सुरक्षा उपकरणों का अभाव मासूमों की जान पर भारी पड़ रहा है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


