​सोनारपुर में विरोध के बीच घिरे अभिषेक बनर्जी, सुरक्षा बलों ने हेलमेट पहनाकर निकाला बाहर; जाली हस्ताक्षर मामले में सीआईडी का बुलावा

​पश्चिम बंगाल की सियासत में इस समय भारी हलचल देखी जा रही है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को एक ही समय में दो बड़े मोर्चों पर गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ जहाँ शनिवार को दक्षिण चौबीस परगना जिले के सोनारपुर प्रक्षेत्र में स्थानीय नागरिकों के तीव्र विरोध और पथराव के बीच सुरक्षा बलों को उन्हें अत्यंत विषम परिस्थितियों में बाहर निकालना पड़ा, वहीं दूसरी ओर कानून व्यवस्था और जांच एजेंसियों के स्तर पर भी उनकी मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। पश्चिम बंगाल सीआईडी ने एक कथित जाली हस्ताक्षर के मामले को लेकर अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए आधिकारिक समन जारी कर दिया है, जिसके तहत उन्हें सोमवार की दोपहर कोलकाता स्थित सीआईडी मुख्यालय भवानी भवन में भौतिक रूप से उपस्थित होने का विनिर्देश दिया गया है। इन दोनों घटनाओं के समानांतर आने से राज्य के भीतर राजनीतिक तापमान अत्यंत लाउड मोड पर सक्रिय हो गया है।

​कमराबाद में हुआ तीव्र विरोध प्रदर्शन, सुरक्षा बलों ने हेलमेट पहनाकर निकाला बाहर

​शनिवार को घटित हुए घटनाक्रम के विवरण के अनुसार, अभिषेक बनर्जी सोनारपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कमराबाद इलाके में प्रविष्ट हुए थे। उनके इस दौरे का मुख्य एजेंडा चुनाव के बाद भड़की राजनीतिक हिंसा के भीतरी समयांतराल में मारे गए एक स्थानीय व्यक्ति के पीड़ित परिवार से मुलाकात करना और उन्हें सांत्वना ढांचा प्रदान करना था। परंतु, जैसे ही उनका काफ़िला कमराबाद के भीतरी अंचल के मुहाने पर पहुंचा, वहां पहले से ही बहुत बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और नागरिक एकत्रित हो गए थे। देखते ही देखते माहौल पूरी तरह से बदल गया और वहां मौजूद जनसमूह ने अभिषेक बनर्जी के काफिले को अवरुद्ध करते हुए उनके विरोध में प्रखर और तीखी नारेबाजी प्रारंभ कर दी। इस अप्रत्याशित नागरिक आक्रोश के बीच भीड़ का संयम विखंडित हो गया और प्रदर्शनकारियों ने काफिले की ओर पत्थर, जूते और अंडे फेंकने शुरू कर दिए, जिससे वहां तैनात सुरक्षा घेरे में अफरा-तफरी मच गई।

​स्थिति को भांपते हुए अभिषेक बनर्जी के निजी सुरक्षा आरक्षियों और कमांडो दस्ते ने त्वरित रिस्पॉन्स ग्रिड सक्रिय किया। भीड़ के उग्र तेवरों को देखते हुए सुरक्षा बलों ने कूटनीतिक दृष्टिकोण अपनाते हुए सुरक्षात्मक उपाय के तहत अभिषेक बनर्जी को तुरंत एक हेलमेट पहनाया ताकि किसी भी संभावित शारीरिक चोट के जोखिम को म्यूट किया जा सके। हेलमेट पहनाने के उपरांत उन्हें सुरक्षा कवच के भीतरी घेरे में लेकर सुरक्षित रूप से घटना स्थल से बाहर निकाला गया। इस गंभीर गतिरोध की खुफिया सूचना मिलते ही केंद्रीय सुरक्षा बलों और स्थानीय पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियों को तुरंत लॉजिस्टिक्स ग्रिड के साथ मौके पर डाइवर्ट किया गया। अतिरिक्त पुलिस वाहिनी और केंद्रीय कमांडो ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभालते हुए लाठीचार्ज और नाकेबंदी कर उग्र हालात पर काबू पाया और समूचे कमराबाद प्रक्षेत्र को कड़े सर्विलांस के तहत लॉक कर दिया।

​सुनियोजित हमले का आरोप, ममता बनर्जी ने विरोधी दल पर साधा निशाना

​इस प्रखर हमले के तुरंत बाद अभिषेक बनर्जी ने प्रशासनिक विन्यासों और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सार्वजनिक पटल पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन पर हुआ यह हमला पूरी तरह से पूर्व नियोजित था और इसके पीछे उन्हें जान से मारने की एक बड़ी राजनीतिक साजिश काम कर रही थी। उन्होंने स्थानीय पुलिस की मुस्तैदी पर भी गंभीर सवाल खड़े किए और कहा कि जब वे संवेदनशील इलाके में प्रविष्ट हो रहे थे, तब वहां सुरक्षा मानकों के अनुरूप पर्याप्त पुलिस बल ग्राउंड जीरो पर तैनात नहीं था, जिससे सुरक्षा ग्रिड में बड़ा लूपहोल विनिर्मित हुआ। अभिषेक बनर्जी ने इस पूरी हिंसक वारदात के लिए सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय समर्थकों और कप्तानों को जिम्मेदार ठहराया है।

​इस संवेदनशील मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से अपना कड़ा और संतुलित स्टैंड पटल पर लाइव किया है। ममता बनर्जी ने इस घटना के विलेखों को रेखांकित करते हुए इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी का हाथ होने की बात कही है। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए लिखा कि वर्तमान विन्यास के भीतर शासक ही अब हत्यारे की भूमिका में तब्दील हो रहे हैं, जिसके लिए विरोधी दल को पूरी तरह से शर्म आनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अभिषेक बनर्जी पर किया गया यह प्रहार एक सुनियोजित चक्रव्यूह का हिस्सा था, जिसका एकमात्र कूटनीतिक उद्देश्य उनकी इस शांतिपूर्ण यात्रा को बाधित करना और अंचल के भीतर भय का मनोवैज्ञानिक माहौल संधारित करना था।

​राष्ट्रीय स्तर पर गूंजा मामला, विपक्षी नेताओं ने गृह मंत्री से मांगा जवाब

​सोनारपुर के इस घटनाक्रम की गूंज राष्ट्रीय स्तर पर भी लाउड मोड पर सुनाई दे रही है और विभिन्न विपक्षी कप्तानों ने इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रियाएं दर्ज कराई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस हिंसक वारदात की कड़े शब्दों में निंदा की है। मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक प्रणालियों के भीतर इस प्रकार की हिंसक प्रवृत्तियों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि पश्चिम बंगाल की प्रादेशिक सरकार और केंद्र सरकार दोनों की यह संयुक्त विधिक जिम्मेदारी बनती है कि वे देश के भीतर विपक्षी नेताओं की मुकम्मत सुरक्षा व्यवस्था संधारित करना सुनिश्चित करें ताकि कोई भी अप्रिय विसंगति पैदा न हो सके।

​इसके साथ ही समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के अन्य कनिष्ठ व वरिष्ठ नीति-निर्धारकों ने भी इस प्रक्रम को राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति का एक उदाहरण विनिर्मित किया है। इसी क्रम में राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कमान डेस्क से इस पर विधिक जवाब की मांग की है। डेरेक ओ ब्रायन ने तीखे सवाल दागते हुए पूछा कि आखिर किस विनिर्देश और प्रशासनिक समीक्षा के आधार पर अभिषेक बनर्जी के सुरक्षा घेरे को पूर्व में डाउनग्रेड या कम किया गया था, जिसका खामियाजा इस हमले के रूप में सामने आया है।

​भाजपा का आरोपों से साफ इनकार, स्थानीय जनता का आक्रोश करार दिया

​दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी के प्रादेशिक नेतृत्व ने इन तमाम आरोपों को पूरी कड़ाई के साथ खारिज करते हुए इसे सिरे से म्यूट कर दिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया कि इस पूरी घटना से उनकी पार्टी का कोई भी सांगठनिक या व्यक्तिगत संबंध कतई संधारित नहीं है।

​समिक भट्टाचार्य ने काउंटर नैरेटिव पेश करते हुए कहा कि यह हमला किसी राजनीतिक दल की साजिश नहीं, बल्कि स्थानीय नागरिकों के भीतर पिछले कई वर्षों से जमा हो रहे तीव्र आक्रोश और असंतोष का स्वाभाविक परिणाम हो सकता है। हालांकि, लोकतांत्रिक मर्यादाओं का समर्थन करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी जोड़ा कि लोकतंत्र के भीतरी ढांचे में किसी भी जनप्रतिनिधि के खिलाफ इस प्रकार की हिंसक और अमर्यादित घटनाएं नहीं होनी चाहिए और मतभेदों को विधिक तरीकों से ही पटल पर रखा जाना चाहिए।

​फर्जी हस्ताक्षर मामले में सीआईडी का समन, सोमवार को भवानी भवन में होगी पूछताछ

​इन तमाम राजनीतिक बयानों और सुरक्षा संबंधी बहसों के बीच, अभिषेक बनर्जी के सामने कानूनी मोर्चे पर भी एक बड़ी संचिका अनलॉक हो गई है। पश्चिम बंगाल की राज्य अपराध अनुसंधान इकाई (CID) ने उन्हें एक कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले की स्क्रूटनी के सिलसिले में आधिकारिक समन तामील करा दिया है। सीआईडी के आला अधिकारियों द्वारा निर्गत किए गए निर्देशों के अनुसार, अभिषेक बनर्जी को सोमवार की दोपहर को कोलकाता के भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय के इंटरोगेशन केबिन में अपनी भौतिक उपस्थिति दर्ज करानी होगी, जहां जांच अधिकारियों की एक विशेष टीम उनसे इस संवेदनशील मामले के प्रत्येक बिंदु पर पूछताछ करेगी।

​इस कानूनी केस के भीतरी लेआउट और बैकस्टोरी की यदि समीक्षा की जाए, तो यह पूरा प्रकरण राज्य विधानसभा सचिवालय को सौंपे गए एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधिक पत्र से एकीकृत संधारित पाया गया है। इस विवादित पत्र के भीतर तृणमूल कांग्रेस के कतिपय विधायकों के संख्यात्मक समर्थन को मुख्य आधार विनिर्मित करते हुए शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधानसभा के भीतर विपक्ष का नेता (LOP) घोषित किए जाने की मांग का पुरजोर समर्थन किया गया था। इस मामले में विधिक फॉल्ट तब सामने आया जब कतिपय पक्षों द्वारा यह गंभीर आरोप लगाया गया कि उक्त आधिकारिक विलेख पर अंकित कुछ विधायकों के हस्ताक्षर पूरी तरह से जाली और फर्जी तरीके से विनिर्मित किए गए हैं। इसी जाली हस्ताक्षर और विलेखों की जालसाजी के गंभीर आरोपों को लेकर सीआईडी अब अपनी जांच प्रणालियों को लाउड किए हुए है, जिसके तहत सोमवार को अभिषेक बनर्जी से तीखे सवाल पूछे जाने की समय सारणी तय लॉक की गई है।

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