- Web Journalists’ Association of India (UP Chapter) ने जताई गंभीर आपत्ति; मकान निर्माण विवाद में मध्यस्थता करने वाले पत्रकार को नोटिस भेजना बताया गलत
- ठाकुरगंज के कंघी टोला का मामला: सैयद फहमी अली के वैध निर्माण को लेकर विवाद; एसोसिएशन का दावा- पत्रकार ने केवल शांति बनाए रखने की कोशिश की
- प्रशासन से मांग: तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो; सामाजिक सरोकार को अपराध का रूप देना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ
द वॉयस ऑफ बिहार (लखनऊ)
वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (Web Journalists’ Association of India – UP Chapter) ने लखनऊ में एक वरिष्ठ पत्रकार को प्रशासन द्वारा नोटिस भेजे जाने की कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है। संगठन ने वरिष्ठ पत्रकार आशीष शर्मा ऋषि को भेजे गए नोटिस और मकान निर्माण विवाद में उनका नाम घसीटे जाने पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद लखनऊ के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के सराय माली खां स्थित कंघी टोला का है।
- निर्माण: यहां हाउस नंबर 414/443 के स्वामी सैयद फहमी अली अपने मकान का पुनर्निर्माण करा रहे थे। जानकारी के मुताबिक, उनके पास वैध रजिस्ट्री दस्तावेज हैं और वे पूर्व संरचना के अनुरूप ही काम करा रहे थे।
- विवाद: निर्माण कार्य के दौरान पड़ोसियों ने आपत्तियां दर्ज कराईं, जिसके बाद प्रशासन ने काम रुकवा दिया था।
- पुलिस निर्देश: तत्कालीन चौकी इंचार्ज हेमू पटेल ने मौके पर निर्देश दिए थे कि निर्माण से आसपास के मकानों को क्षति नहीं होनी चाहिए, लेकिन इसके बावजूद बार-बार आपत्तियां उठाई जाती रहीं।
पत्रकार की भूमिका पर एसोसिएशन का पक्ष
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे प्रकरण में पत्रकार आशीष शर्मा ऋषि की भूमिका केवल मध्यस्थता और शांति स्थापना की थी।
- उन्होंने सभी पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि किसी के अधिकारों का हनन न हो और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
- जब विवाद बढ़ा, तो उन्होंने खुद ही निर्माण कार्य न कराने की सलाह देते हुए प्रकरण से दूरी बना ली थी।
नोटिस पर सवाल और मांगें
12 फरवरी को जारी नोटिस में लगाए गए आरोपों को लेकर संस्था ने कहा है कि यह एक जिम्मेदार पत्रकार की गरिमा और स्वतंत्र पत्रकारिता की भावना के खिलाफ है। एसोसिएशन ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख बिंदु रखे हैं:
- वैधानिक निस्तारण: यदि निर्माण को लेकर कोई आपत्ति है, तो उसका हल कानून के दायरे में होना चाहिए।
- गरिमा की रक्षा: किसी पत्रकार की मध्यस्थता या सामाजिक सरोकार को ‘आपराधिक’ या ‘विवादास्पद’ रूप देना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
- निष्पक्ष जांच: प्रशासन तथ्यों की सही जांच करे और न्यायसंगत कार्रवाई सुनिश्चित करे।
Web Journalists’ Association of India ने साफ शब्दों में कहा है कि वह पत्रकार आशीष शर्मा ऋषि के साथ खड़ा है और विश्वास जताता है कि सत्य और कानून के आधार पर उन्हें न्याय मिलेगा।


