Weather Alert: बिहार में बदलेगा मिजाज! 32 जिलों में आंधी-बारिश और ठनका का ‘येलो अलर्ट’; पटना में भी छाएंगे बादल

खबर के मुख्य बिंदु:

  • आंधी-पानी की चेतावनी: सूबे के 32 जिलों में आज मेघ गर्जन, ठनका और बारिश की संभावना।
  • तेज हवाएं: 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी धूल भरी हवाएं।
  • पटना का हाल: राजधानी में अगले तीन दिनों तक बादलों का डेरा, आज वज्रपात (Lightning) के आसार।
  • तापमान का ‘डबल गेम’: रविवार को पटना में 15 साल की सबसे गर्म रात दर्ज; कैमूर सबसे गर्म जिला।

पटना: बिहार के मौसम ने एक बार फिर अचानक करवट ले ली है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण राज्य के अधिकांश हिस्सों में आंधी और बारिश का संकट मंडरा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना ने सोमवार के लिए राज्य के 32 जिलों में ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। जहाँ एक तरफ उत्तर और पूर्वी बिहार में बारिश की प्रबल संभावना है, वहीं दक्षिण-पश्चिम के 06 जिलों में मौसम फिलहाल शुष्क रहने का अनुमान है।

पटना में ठनका और बादलों का डेरा

​राजधानी पटना के निवासियों को आज विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

  • चेतावनी: जिले में एक-दो स्थानों पर ठनका (बिजली) गिरने के साथ आंधी और हल्की बारिश हो सकती है।
  • तापमान में बदलाव: पटना में रविवार की रात पिछले 15 वर्षों में सबसे गर्म रही, जहाँ न्यूनतम तापमान 23.4°C दर्ज किया गया। बादलों के कारण दिन के तापमान में गिरावट आएगी लेकिन उमस बढ़ सकती है।

आगामी 48 घंटों का ‘वेदर रूट’

​मौसम विभाग के अनुसार, यह मौसमी उथल-पुथल अगले दो-तीन दिनों तक जारी रहेगी:

  • मंगलवार (10 मार्च): दक्षिण-पूर्वी भाग के 05 और उत्तर-पूर्वी भाग के 07 जिलों में मौसम बिगड़ा रहेगा।
  • बुधवार (11 मार्च): उत्तर बिहार के 14 जिलों में आंधी-बारिश के आसार हैं।

त्वरित अवलोकन (Quick Facts)

  • अलर्ट वाले जिले: 32 (बिहार के अधिकांश हिस्से)।
  • हवा की गति: 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा।
  • सर्वाधिक तापमान (रविवार): 34.8°C (कैमूर)।
  • न्यूनतम तापमान (न्यूनतम): 17.5°C (अगवानपुर, सहरसा)।
  • शुष्क क्षेत्र: दक्षिण-पश्चिम भाग के 06 जिले।
  • पटना की स्थिति: 3 दिनों तक आंशिक बादल और ठनका का अलर्ट।

VOB का नजरिया: किसान भाई रहें सावधान!

​मार्च का यह मौसम किसानों के लिए बड़ी चुनौती लेकर आया है। जब फसलें तैयार हो रही होती हैं, तब 30-40 किमी की रफ्तार वाली हवाएं और ओलावृष्टि मेहनत पर पानी फेर सकती हैं। हमारी अपील है कि मेघ गर्जन के समय खुले मैदान या पेड़ों के नीचे न रहें। प्रशासन को भी चाहिए कि ठनका से बचाव के लिए ग्रामीण इलाकों में जागरूकता बढ़ाए।

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