बिहार में अवैध हथियारों के बढ़ते नेटवर्क के खिलाफ वैशाली पुलिस ने एक सर्जिकल स्ट्राइक की है। पातेपुर थाना पुलिस ने एक बेहद शातिराना तरीके से चल रहे हथियार तस्करी गिरोह के परखच्चे उड़ाते हुए तीन कुख्यात तस्करों को दबोच लिया है। यह गिरोह न केवल हथियारों की सप्लाई कर रहा था, बल्कि भारी मुनाफे के लिए बकायदा ‘बुकिंग और एडवांस’ सिस्टम पर काम कर रहा था।
आधी रात की छापेमारी और मुर्गी फार्म का ‘खौफनाक’ राज
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि पातेपुर के सलेमपुर सलखनी गांव में हथियारों का एक बड़ा सौदा होने वाला है। महुआ अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) संजीव कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने देर रात गांव में दबिश दी।
शुरुआती छापेमारी मुख्य आरोपी कृष्ण कुमार के घर पर हुई, जहाँ से अवैध हथियार बरामद हुए। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। जब पुलिस ने कृष्ण कुमार से ‘थर्ड डिग्री’ पूछताछ की, तो उसने जो खुलासा किया वो चौंकाने वाला था। उसकी निशानदेही पर पास के ही एक मुर्गी फार्म में छापेमारी की गई, जिसे हथियारों को छिपाने के लिए ‘सेफ हाउस’ के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। वहां से पुलिस ने एक देशी पिस्टल, एक देशी कट्टा और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए।
सिंडिकेट का ‘बिजनेस मॉडल’: राघोपुर से पातेपुर तक का कनेक्शन
पूछताछ में इस गिरोह के काम करने के तरीके (Modus Operandi) का सनसनीखेज खुलासा हुआ है:
- सप्लाई चेन: हथियार वैशाली के ही राघोपुर इलाके से मंगवाए जाते थे।
- भूमिकाएं: गिरोह में काम बंटा हुआ था। त्रिभुवन और शिवम ‘कैरियर’ (Delivery Boys) का काम करते थे, जिनका काम राघोपुर से हथियार लाकर सुरक्षित जगह पहुँचाना था।
- डील मेकर: मुख्य आरोपी कृष्ण कुमार पूरी डील और सौदेबाजी संभालता था।
- रेट कार्ड: पुलिस के मुताबिक, अपराधियों के बीच हथियारों की मांग इतनी ज्यादा थी कि एक देशी पिस्टल का सौदा 80,000 रुपये में तय किया गया था।
एडवांस पेमेंट और ‘डिलीवरी’ का खेल
SDPO संजीव कुमार ने बताया कि यह गिरोह बेहद पेशेवर तरीके से काम कर रहा था। किसी भी अपराधी को हथियार देने से पहले ‘एडवांस रकम’ ली जाती थी। जांच में पता चला है कि यह गिरोह हाल ही में एक हथियार की सप्लाई कर चुका था और अगली खेप की डिलीवरी की तैयारी चल रही थी, जिसे पुलिस ने समय रहते नाकाम कर दिया।


