वॉशिंगटन/अंतरराष्ट्रीय डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कड़ा बयान देकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। व्हाइट हाउस में जापान के प्रधानमंत्री के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका फिलहाल ईरान में सेना भेजने का इरादा नहीं रखता, लेकिन जरूरत पड़ी तो बेहद कम समय में बड़ा कदम उठा सकता है।
सेना भेजने से इनकार, लेकिन दी कड़ी चेतावनी
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका किसी भी देश में बिना सोचे-समझे सेना नहीं भेजेगा। उन्होंने कहा, “हम अभी सेना नहीं भेज रहे हैं, लेकिन अगर हमें कार्रवाई करनी पड़ी, तो हम बहुत कम समय में स्थिति बदल सकते हैं।”
हालांकि, इसी दौरान उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका के पास इतनी ताकत है कि वह “दो मिनट में ईरान को खत्म कर सकता है”, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है।
ईरान को बताया ‘वैश्विक खतरा’
ट्रंप ने अपने बयान में ईरान को दुनिया के लिए गंभीर खतरा बताया। उनका कहना था कि ईरान की गतिविधियां न सिर्फ मध्य-पूर्व बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए चुनौती बन चुकी हैं। उन्होंने संकेत दिए कि अमेरिका किसी भी तरह की आक्रामकता का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी टिप्पणी
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का फोकस सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता भी है। उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों को नियंत्रित रखना जरूरी है और इसके लिए अमेरिका हर संभव कदम उठाएगा। उनका मानना है कि हालात सामान्य होने के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था और मजबूत हो सकती है।
जापान का समर्थन, साझा चिंता
इस दौरान जापान के प्रधानमंत्री ने भी मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया एक गंभीर सुरक्षा चुनौती का सामना कर रही है और इस स्थिति में वैश्विक सहयोग बेहद जरूरी है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर ऐसे संकटों का समाधान निकालना होगा।
परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रुख
ट्रंप और जापानी नेतृत्व दोनों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
साथ ही, क्षेत्रीय तनाव और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई।
बढ़ सकता है वैश्विक तनाव
ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सख्त बयान क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकते हैं, हालांकि यह कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है।
निष्कर्ष:
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पहले से ही मध्य-पूर्व में हालात संवेदनशील बने हुए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश आगे क्या रणनीति अपनाते हैं और क्या इससे क्षेत्र में तनाव कम होगा या और बढ़ेगा।


