नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प की असली राह गाँवों की पगडंडियों, उपजाऊ मिट्टी और किसानों की मुस्कुराती फसलों से होकर गुजरती है। यही सोच लिए सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वॉटरशेड विकास घटक (WDC-PMKSY) को देशभर में लागू किया है।
यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन है। इसका मंत्र है – “खेत का पानी खेत में, गाँव का पानी गाँव में”। चेक डैम, खेत तालाब, मेड़बंदी और जल संरक्षण संरचनाओं के जरिए पानी को जमीन में उतारा जा रहा है, जिससे न सिर्फ भूजल स्तर बढ़ा है बल्कि मिट्टी की नमी भी लंबे समय तक बनी रहती है।
अब तक 6,382 से अधिक परियोजनाएं, ₹20,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश और 3 करोड़ हेक्टेयर जमीन उपजाऊ बन चुकी है। परिणाम चौंकाने वाले हैं – किसानों की आमदनी में 8% से लेकर 70% तक की वृद्धि।
- झाबुआ (मप्र): चेकडैम से किसानों की आय ₹50-60 हजार तक बढ़ी, खेत तालाबों से ₹1-1.5 लाख प्रति हेक्टेयर तक कमाई।
- बाड़मेर (राजस्थान): रेगिस्तान में अनार की खेती से हरियाली और खुशहाली लौटी।
- त्रिपुरा: अनानास की बागवानी से बंजर जमीन फिर से उपजाऊ।
आज तक 9 लाख से ज्यादा जल संरचनाएं बनीं, 5.6 करोड़ श्रम दिवस सृजित हुए और 1.5 लाख हेक्टेयर नए जल स्रोत क्षेत्र जुड़े। सबसे बड़ी बात – 8.4 लाख हेक्टेयर बंजर जमीन खेती योग्य हो चुकी है।
इस योजना को जन-जन तक पहुँचाने के लिए ‘वॉटरशेड यात्रा’ चलाई गई और भुवन जियोपोर्टल व दृष्टि ऐप जैसी तकनीकों से निगरानी की जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी का स्पष्ट संदेश है – “सरकार अकेले नहीं, समाज की भागीदारी से ही यह अभियान सफल होगा।”
आज अमृतकाल में जब हम मिट्टी और पानी बचा रहे हैं, तभी 2047 का विकसित भारत संभव होगा।


