मिडिल ईस्ट में जंग तेज: रूस ने भारत से की मध्यस्थता की अपील, तेल-गैस संकट गहराया

मिडिल ईस्ट में इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे हालात और भी गंभीर हो गए हैं। इजरायल द्वारा ईरान के गैस प्लांट पर हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अरब देशों के तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाया है। 28 फरवरी 2026 से जारी इस जंग ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट को गहरा कर दिया है, वहीं खाड़ी देशों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

रूस ने भारत से की मध्यस्थता की अपील

इस बीच रूस ने भारत से जंग को खत्म कराने के लिए मध्यस्थता की अपील की है। रूस का मानना है कि भारत जैसे प्रभावशाली और संतुलित देश की भूमिका इस संघर्ष को शांत कराने में अहम हो सकती है। रूस ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगे आकर इस संकट का समाधान तलाशना चाहिए।

बातचीत से समाधान की वकालत

रूस के अनुसार, भारत हमेशा से विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने की नीति अपनाता रहा है। ऐसे में मौजूदा हालात में भारत शांति बहाली में अहम भूमिका निभा सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने ईरान को सैटेलाइट इमेज और ड्रोन तकनीक उपलब्ध कराई है, जिससे ईरान को हमलों में रणनीतिक बढ़त मिली है। हालांकि, इन खुफिया जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

भारत पर भी पड़ा असर

मिडिल ईस्ट में जारी इस जंग का असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी साफ दिखाई दे रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और नाकाबंदी के चलते तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है।
भारत के कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और LPG आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है, जो इस संकट के कारण प्रभावित हुआ है। हालांकि, भारत ने रूस समेत अन्य देशों से तेल आयात बढ़ाकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है।

वैश्विक संकट गहराने की आशंका

मिडिल ईस्ट में बढ़ता यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट का रूप लेता जा रहा है। ऊर्जा आपूर्ति, आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं। ऐसे में दुनिया की निगाहें अब कूटनीतिक समाधान और संभावित मध्यस्थता पर टिकी हैं।

  • Related Posts