
मध्य पूर्व में जारी तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता जा रहा है। अमेरिका और ईरान दोनों ने फिलहाल युद्धविराम (सीजफायर) पर बातचीत से इनकार कर दिया है, जिससे इस संघर्ष के लंबे समय तक चलने की आशंका बढ़ गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने मध्य पूर्वी देशों द्वारा दिए गए मध्यस्थता प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। उनका कहना है कि जब तक ईरान सरेंडर नहीं करता, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं ईरान ने भी साफ कर दिया है कि जब तक उस पर हो रहे हमले बंद नहीं होंगे, तब तक वह युद्धविराम के लिए तैयार नहीं होगा।
हमले रुकने तक पीछे नहीं हटेगा ईरान
ईरान का कहना है कि Oman और Egypt समेत कई देश युद्ध खत्म कराने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। इन देशों ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने का प्रयास भी किया है।
हालांकि ईरान का साफ कहना है कि जब तक अमेरिका और इजरायल के हमले बंद नहीं होते और उसकी शर्तें स्वीकार नहीं की जातीं, तब तक न तो हमले रुकेंगे और न ही युद्धविराम की बातचीत होगी। ऐसे में यह संघर्ष लंबे समय तक चल सकता है। पिछले 15 दिनों में इस युद्ध में बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है।
खर्ग द्वीप पर हमले से बढ़ा तनाव
विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद अहम Kharg Island पर हमले किए।
खर्ग द्वीप ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश का लगभग 90 प्रतिशत तेल निर्यात इसी द्वीप से होता है। इसे ईरान की ऊर्जा आपूर्ति की सबसे अहम कड़ी माना जाता है।
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर इस द्वीप पर हमले जारी रहे तो वह वैश्विक तेल व्यापार के लिए अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को बंद करने पर विचार कर सकता है।
ओमान और मिस्र की मध्यस्थता
सूत्रों के अनुसार युद्ध के शुरुआती दिनों में अमेरिका ने Oman के जरिए शांति वार्ता शुरू करने की कोशिश की थी। इस सिलसिले में तीन दौर की बैठकें भी हुईं, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका।
ईरान की ओर से वरिष्ठ नेता Ali Larijani और विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने भी ओमान के माध्यम से युद्धविराम पर बातचीत की संभावनाओं पर चर्चा की थी।
इस बीच माना जा रहा है कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance भविष्य में इस विवाद को सुलझाने में भूमिका निभा सकते हैं।
15 दिनों में भारी नुकसान
मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच यह संघर्ष 28 फरवरी से जारी है। पिछले 15 दिनों में दोनों पक्षों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान ईरान में हमलों में 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा है।
इसके अलावा Strait of Hormuz में तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी असर पड़ा है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है।


