विश्वकर्मा पूजा और वाहन पर नींबू लगाने की परंपरा: आस्था या धार्मिक नियम?

विश्वकर्मा पूजा आते ही कारखानों, दुकानों और घरों में मशीनों व औजारों की साफ-सफाई और सजावट शुरू हो जाती है। इस दिन लोग अपने औजारों, मशीनों और वाहनों की पूजा कर भगवान विश्वकर्मा का आभार जताते हैं। ऐसा विश्वास है कि भगवान विश्वकर्मा ही उन सभी यंत्रों और साधनों के निर्माता हैं, जिनसे जीवन सरल और सुविधाजनक बनता है।

नींबू-मिर्च टांगने की मान्यता

भोपाल के ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा बताते हैं कि वाहन पर नींबू और मिर्च लटकाने की परंपरा कई सालों से चली आ रही है। इसे बुरी नज़र से बचाव का उपाय माना जाता है। हालांकि इसका कोई धार्मिक या शास्त्रीय आधार नहीं है और न ही विश्वकर्मा पूजा से इसका सीधा संबंध है। यह मात्र लोक-परंपरा है, जिसे लोग अपनी व्यक्तिगत आस्था और सुरक्षा की भावना से जोड़ते हैं।

पूजा का सही तरीका

इस दिन लोग अपने औजारों और वाहनों को धोकर, सजाकर और फूल चढ़ाकर पूजा करते हैं। भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद लेकर वे अपने कामकाजी साधनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यह केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि मेहनत और साधनों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का प्रतीक है।

नए वाहन की खरीदारी

विश्वकर्मा पूजा का दिन नया वाहन खरीदने के लिए शुभ माना जाता है। कई लोग इस दिन गाड़ी की बुकिंग या डिलीवरी लेते हैं, क्योंकि इसे नई शुरुआत और समृद्धि से जोड़ा जाता है।

विश्वकर्मा पूजा का मूल भाव परिश्रम, समर्पण और तकनीकी साधनों के प्रति आदर है। नींबू-मिर्च लटकाने की परंपरा सीधे इस पर्व से जुड़ी नहीं है। यह व्यक्तिगत आस्था पर आधारित है। कुछ लोग इसे सुरक्षा का प्रतीक मानते हैं, तो कुछ इसे मात्र एक रस्म समझते हैं।

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