बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दे रही हैं गांव की सड़कें

36 हजार 800 किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कों का कायाकल्प, 11 हजार 614 करोड़ रुपये की लागत से बदली तस्वीर

पटना, 17 सितंबर।बिहार के गांव अब विकास की नई राह पर हैं। खेत-खलिहानों से लेकर गलियों तक और फिर शहरों तक जुड़ने वाली ग्रामीण सड़कें राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर शुरू बिहार ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति-2018 के तहत अब तक 36,894 किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कों की मरम्मती और कायाकल्प किया जा चुका है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की कुल 16,171 ग्रामीण सड़कों (लंबाई 40,259 किमी) में से 15,169 सड़कों का कायाकल्प पूरा हो चुका है। इन सड़कों पर अब तक 11,614 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च हुई है।

हर मौसम में मिलेगा लाभ

ग्रामीण सड़कों के कायाकल्प से गांववासियों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में आसानी हो रही है। बच्चे साइकिल से सुरक्षित स्कूल जा पा रहे हैं। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी आसान हो गया है। पहले जहां बरसात या बाढ़ में गांव टापू बन जाते थे, वहीं अब पक्की सड़कों से राहत कार्य सुचारु रूप से हो पा रहा है।

पूर्वी चंपारण सबसे आगे

ग्रामीण सड़कों की मरम्मती के मामले में पूर्वी चंपारण जिला सबसे आगे है। यहां 957 सड़कों में से 909 सड़कों (2,389 किमी) का कायाकल्प पूरा हो चुका है।
दूसरे स्थान पर मुजफ्फरपुर है, जहां 718 सड़कों में से 664 (1,703 किमी) का कायाकल्प किया गया।
तीसरे नंबर पर पश्चिम चंपारण है, जहां 617 में से 598 सड़कों (1,996 किमी) की मरम्मती पूरी हो चुकी है।

इसके अलावा सारण (1,589 किमी), समस्तीपुर (1,405 किमी), गया (1,382 किमी) और वैशाली (1,359 किमी) जिलों में भी सड़कों के कायाकल्प ने ग्रामीण इलाकों को मजबूती दी है।

आर्थिक प्रगति की नई राह

ग्रामीण सड़कों के सुधरने से गांवों की अर्थव्यवस्था भी तेज रफ्तार पकड़ रही है। बाजार, अस्पताल, स्कूल और रोज़गार तक पहुंच आसान हुई है। सरकार का मानना है कि सड़कें न केवल कनेक्टिविटी बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही हैं।


 

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