विक्रमशिला सेतु संकट पर सीएम का एक्शन: लापरवाह इंजीनियर सस्पेंड, आम जनता के लिए फ्री स्टीमर सेवा और मुंगेर के रास्ते सुगम होगा सफर

पटना/भागलपुर। भागलपुर की लाइफलाइन कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु के एक स्पैन के क्षतिग्रस्त होने की घटना को सरकार ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार, 4 मई 2026 को पटना के 5, देशरत्न मार्ग स्थित अपने आवास पर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने न केवल स्थिति की समीक्षा की, बल्कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर गाज गिराते हुए भविष्य के लिए कड़े दिशा-निर्देश भी जारी किए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पुलों के रख-रखाव में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जनता की सुविधा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि जब तक सेतु की मरम्मत पूरी नहीं हो जाती, तब तक आम लोगों को गंगा पार कराने के लिए मुफ्त स्टीमर सेवा शुरू की जाएगी। इसके साथ ही, कर्तव्यों के निर्वहन में कोताही बरतने के आरोप में राष्ट्रीय उच्च पथ, भागलपुर के कार्यपालक अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

हादसे की समीक्षा और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई

​समीक्षा बैठक की शुरुआत में पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने मुख्यमंत्री को विक्रमशिला सेतु की वर्तमान स्थिति और अब तक की गई कार्रवाई से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि 3 मई की मध्य रात्रि को पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली थी। यह प्रशासन की मुस्तैदी ही थी कि समय रहते यातायात रोक दिया गया, जिससे एक भी जान का नुकसान नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने भागलपुर के जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी और पुलिस प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए उन्हें ‘प्रशंसा का पात्र’ बताया।

​मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि पुल के क्षतिग्रस्त भाग के रेस्टोरेशन (मरम्मत) का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू किया जाए। इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की टीम से अविलंब प्रतिवेदन प्राप्त करने को कहा गया है। बैठक में यह तय हुआ कि जब तक विशेषज्ञ अपनी हरी झंडी नहीं दे देते, तब तक पुल पर वाहनों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सचेत किया कि प्रशासन पूरी तरह सक्रिय रहे ताकि आम लोगों को कम से कम असुविधा हो।

लापरवाह इंजीनियर पर गिरी गाज: कार्यपालक अभियंता निलंबित

​विक्रमशिला सेतु जैसी महत्वपूर्ण संरचना के क्षतिग्रस्त होने को मुख्यमंत्री ने सिस्टम की विफलता के रूप में देखा। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि अनुरक्षण (मेंटेनेंस) में किसी भी प्रकार की लापरवाही का परिणाम भुगतना होगा। बैठक के दौरान ही यह बड़ा फैसला लिया गया कि राष्ट्रीय उच्च पथ, भागलपुर के कार्यपालक अभियंता को उनके पद से निलंबित कर दिया जाए। उन पर पुल के नियमित रख-रखाव और निगरानी में घोर लापरवाही बरतने का आरोप है।

​मुख्यमंत्री ने आदेश दिया कि जो भी कर्मचारी या अधिकारी अपने कर्तव्य का पालन ठीक ढंग से नहीं करेंगे, उन पर इसी तरह की कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने मुख्य सचिव और पथ निर्माण विभाग के सचिव को निर्देश दिया कि राज्य के सभी बड़े पुलों का ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) के तहत सेफ्टी ऑडिट कराया जाए। सरकार अब पुलों के मेंटेनेंस के लिए बनाई गई पॉलिसी को सख्ती से लागू करने के मूड में है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

आम जनता को बड़ी राहत: मुफ्त स्टीमर सेवा और सुरक्षा के इंतजाम

​पुल बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी पैदल यात्रियों और दो पहिया वाहन चालकों को हो रही है। इस समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री ने एक बड़ा लोक-कल्याणकारी निर्णय लिया। राज्य सरकार द्वारा गंगा नदी पार करने वाले पैदल यात्रियों और दो पहिया वाहनों के लिए बहुत जल्द ‘मुफ्त स्टीमर सेवा’ शुरू की जा रही है। इससे उन हजारों लोगों को राहत मिलेगी जिन्हें काम के सिलसिले में रोजाना भागलपुर और नवगछिया के बीच आवाजाही करनी पड़ती है।

​नाव और स्टीमर के संचालन के दौरान मुख्यमंत्री ने यात्रियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि नाव से आवागमन में एसओपी का कड़ाई से पालन हो। लाइफ जैकेट और क्षमता से अधिक सवारी न बैठाने जैसे नियमों की निगरानी खुद जिलाधिकारी करेंगे। इसके साथ ही, पुल के दोनों किनारों—भागलपुर और नवगछिया—पर सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त रखने और रात के समय बेहतर रोशनी (बिजली) का प्रबंध करने का आदेश दिया गया है ताकि किसी भी तरह की आपराधिक या अप्रिय घटना न घटे।

विशेषज्ञों की टीम रवाना: IIT और NIT पटना करेंगे जांच

​हादसे के तकनीकी कारणों की जड़ तक पहुँचने के लिए बिहार सरकार ने उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की है। अभियंता प्रमुख (कार्य प्रबंधन) की अध्यक्षता में एक दल, जिसमें बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के साथ-साथ आई०आई०टी० (IIT) पटना और एन०आई०टी० (NIT) पटना के विशेषज्ञ शामिल हैं, सोमवार सुबह ही भागलपुर के लिए रवाना हो गया।

​यह टीम पुल के क्षतिग्रस्त स्पैन और पिलरों का वैज्ञानिक विश्लेषण करेगी। विशेषज्ञों की यह रिपोर्ट ही तय करेगी कि पुल की मरम्मत में कितना समय लगेगा और उसे दोबारा कब खोला जा सकता है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि रेस्टोरेशन का कार्य केवल विशेषज्ञों के तकनीकी प्रतिवेदन के आधार पर ही सुनिश्चित किया जाए ताकि भविष्य में सुरक्षा को लेकर कोई संशय न रहे। एसडीआरएफ (SDRF) की टीम भी मौके पर तैनात है जो व्यवस्था को सुगम बनाने में तकनीकी टीम का सहयोग कर रही है।

यातायात का नया रूट: मुंगेर पुल बनेगा सहारा

​भारी वाहनों और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों के लिए मुख्यमंत्री ने वैकल्पिक मार्ग के प्रभावी प्रबंधन का निर्देश दिया है। वर्तमान में उत्तर बिहार से आने वाले वाहन जो भागलपुर जाना चाहते हैं, उन्हें मुंगेर स्थित ‘श्रीकृष्ण सेतु’ का उपयोग करने की सलाह दी गई है। यह वाहन मुंगेर पुल पार कर पुराने एनएच-80 (नया एनएच-33) के माध्यम से भागलपुर पहुँच सकते हैं।

​मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मुंगेर से भागलपुर वाले पथ पर यातायात को पूरी तरह व्यवस्थित किया जाए। इस मार्ग पर अचानक वाहनों का दबाव बढ़ने से जाम की स्थिति पैदा हो सकती है, जिसे नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और ट्रैफिक वॉलिंटियर्स तैनात किए जाएंगे। साथ ही, उन्होंने इस पथ के फोर-लेन (4-Lane) निर्माण कार्य को भी समय सीमा के भीतर पूरा करने का आदेश दिया ताकि आने वाले समय में मुंगेर-भागलपुर कनेक्टिविटी और भी बेहतर हो सके।

समांतर फोर-लेन ब्रिज के निर्माण में आएगी तेजी

​विक्रमशिला सेतु पर बढ़ते दबाव का स्थायी समाधान गंगा नदी पर इसके समानांतर बन रहा नया फोर-लेन पुल है। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना की भी समीक्षा की और अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने का कड़ा निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि नए पुल का काम जल्द से जल्द पूरा करना सरकार की प्राथमिकता है ताकि विक्रमशिला सेतु जैसे पुराने पुलों पर भार कम किया जा सके।

​बैठक में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उप मुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह सहित कई वरीय अधिकारी मौजूद थे। भागलपुर से जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी और एसएसपी प्रमोद कुमार यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे। मुख्यमंत्री ने अंत में सभी को सचेत किया कि आपदा की इस घड़ी में प्रशासन की सक्रियता ही जनता का विश्वास बहाल रखेगी। भागलपुर और नवगछिया के बीच के इस राजनैतिक और सामाजिक संकट को दूर करने के लिए पूरी सरकार अब मिशन मोड में कार्य कर रही है।

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