
भागलपुर। भागलपुर की जीवनरेखा और उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ने वाले सामरिक महत्व के विक्रमशिला सेतु की सेहत सुधारने की कवायद अब तेज हो गई है। वर्षों से भारी वाहनों के अनवरत दबाव और मौसमी मार झेल रहे इस सेतु के दीर्घकालिक अस्तित्व को बचाने के लिए शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को राज्य के आला अधिकारियों ने धरातलीय स्थिति का जायजा लिया। पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल के नेतृत्व में पहुँची उच्चस्तरीय टीम ने पुल के एक-एक हिस्से का बारीकी से निरीक्षण किया। हाल ही में इस सेतु के व्यापक रखरखाव और मेंटेनेंस के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव सरकार को प्रेषित किया गया था, जिसके आलोक में यह निरीक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों की इस सक्रियता से यह संकेत मिल रहे हैं कि सेतु की मरम्मत का कार्य अब फाइलों से निकलकर जल्द ही धरातल पर शुरू होगा, जिससे भागलपुर और सीमांचल के लाखों लोगों को जाम और जर्जर सड़क की समस्या से बड़ी राहत मिल सकेगी।
हाई-प्रोफाइल टीम का दौरा: सेतु की मजबूती का आकलन
विक्रमशिला सेतु पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव और बीच-बीच में उभरने वाली तकनीकी खामियों को देखते हुए पथ निर्माण विभाग ने इसे अपनी प्राथमिकता सूची में रखा है। शनिवार की दोपहर जब अधिकारियों का काफिला सेतु पर पहुँचा, तो वहां की हलचल बढ़ गई। इस निरीक्षण दल में सचिव पंकज कुमार पाल के साथ बिहार राज्य पथ विकास निगम के प्रबंध निदेशक शीर्षक कपिल अशोक और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक जितेंद्र कुमार मुख्य रूप से शामिल थे। इनके अलावा जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने भी अपनी उपस्थिति से स्थानीय प्रशासनिक समन्वय को मजबूती दी।
अधिकारियों ने सेतु के सुपरस्ट्रक्चर, एक्सपेंशन जॉइंट्स और डामर की ऊपरी परत (Wearing Coat) का निरीक्षण किया। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य सेतु की वर्तमान वहन क्षमता और उन हिस्सों की पहचान करना था जहाँ तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। सचिव ने पुल के पिलर्स और बेयरिंग की स्थिति के बारे में भी इंजीनियरों से जानकारी ली। यह दौरा केवल एक औपचारिक निरीक्षण नहीं था, बल्कि उस तकनीकी प्रस्ताव के सत्यापन की प्रक्रिया थी जो पुल की उम्र बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है।
मेंटेनेंस प्रस्ताव और तकनीकी आवश्यकताएं
विक्रमशिला सेतु के मेंटेनेंस को लेकर पिछले कुछ समय से विशेषज्ञों के बीच चर्चा चल रही थी। सेतु पर गाड़ियों की संख्या उसकी डिजाइन क्षमता से कई गुना अधिक हो चुकी है, जिसके कारण इसके एक्सपेंशन जॉइंट्स में बार-बार खराबी आती है। पथ निर्माण विभाग के सूत्रों के अनुसार, जो नया प्रस्ताव तैयार किया गया है, उसमें सेतु की सतह को पूरी तरह से नया रूप देने और आधुनिक तकनीक के जॉइंट्स लगाने की योजना शामिल है।
निरीक्षण के दौरान पंकज कुमार पाल ने स्पष्ट किया कि सेतु का रखरखाव अब केवल पैच-वर्क तक सीमित नहीं रहेगा। इसके लिए एक एकीकृत योजना (Integrated Plan) पर काम किया जा रहा है। पुल निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक जितेंद्र कुमार ने बताया कि पुल की संरचनात्मक अखंडता (Structural Integrity) को बनाए रखने के लिए समय-समय पर बड़े मेंटेनेंस की जरूरत होती है। वर्तमान प्रस्ताव में न केवल सड़क की मरम्मत, बल्कि प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा रेलिंग के सुदृढ़ीकरण पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
भागलपुर के विकास में सेतु की भूमिका और चुनौतियां
विक्रमशिला सेतु केवल कंक्रीट का एक ढांचा नहीं है, बल्कि यह भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज और साहिबगंज जैसे जिलों की आर्थिक धमनियों को जोड़ता है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में ट्रक और व्यावसायिक वाहन यहाँ से गुजरते हैं। सेतु पर लगने वाले लंबे जाम की वजह अक्सर इसकी जर्जर स्थिति और संकरा होना रहा है। हालांकि, समानांतर पुल का निर्माण कार्य प्रगति पर है, लेकिन जब तक वह तैयार नहीं हो जाता, तब तक मौजूदा विक्रमशिला सेतु पर ही सारा भार टिका हुआ है।
जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने निरीक्षण के दौरान सेतु पर यातायात प्रबंधन को लेकर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि मेंटेनेंस के दौरान ट्रैफिक को सुचारू रखना एक बड़ी चुनौती होगी, जिसके लिए प्रशासन और पुलिस विभाग को विशेष रणनीति बनानी पड़ेगी। उन्होंने सुझाव दिया कि मरम्मत का कार्य इस तरह से नियोजित किया जाए कि आम जनता को कम से कम परेशानी हो। सेतु के सुरक्षित रहने से ही भागलपुर के व्यापार और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनी रह सकती है।
प्रशासनिक अमले की मौजूदगी और तकनीकी परामर्श
इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान जिले के अन्य वरीय अधिकारी भी मौजूद रहे। उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह ने प्रशासनिक बारीकियों पर अधिकारियों का सहयोग किया। वहीं, तकनीकी पक्ष को समझाने के लिए बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अधीक्षण अभियंता शशि भूषण यादव, कार्यपालक अभियंता ज्ञानचंद दास और परियोजना अभियंता सोनू शाह ने सचिव और प्रबंध निदेशकों को मैप और डेटा के माध्यम से सेतु की चुनौतियों से अवगत कराया।
इंजीनियरों की टीम ने उन ‘ब्लैक स्पॉट्स’ की पहचान की जहाँ सड़क बार-बार उखड़ जाती है। सचिव ने निर्देश दिया कि मरम्मत के लिए ऐसी निर्माण सामग्री का उपयोग किया जाए जो भारी वर्षा और अत्यधिक गर्मी को सहन कर सके। उन्होंने कार्यपालक अभियंता को निर्देश दिया कि मेंटेनेंस के कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। अधिकारियों ने सेतु के नीचे गंगा के प्रवाह और पिलर्स की सुरक्षा का भी दूरबीन से अवलोकन किया।
जाम की समस्या और वैकल्पिक मार्ग पर विमर्श
विक्रमशिला सेतु पर मेंटेनेंस कार्य शुरू होने का सीधा असर ट्रैफिक पर पड़ेगा। भागलपुर के लोगों के लिए यह एक कड़वी सच्चाई है कि जब भी पुल पर काम चलता है, शहर के भीतर और जीरो माइल से लेकर नवगछिया तक गाड़ियों की लंबी कतार लग जाती है। निरीक्षण के दौरान इस मुद्दे पर भी गंभीर मंथन हुआ। अधिकारियों ने चर्चा की कि क्या मरम्मत के समय भारी वाहनों के लिए कोई समय सीमा तय की जा सकती है या उन्हें किसी वैकल्पिक मार्ग की ओर मोड़ा जा सकता है।
शीर्षक कपिल अशोक ने कहा कि पथ विकास निगम इस बात का पूरा ध्यान रखेगा कि मेंटेनेंस की प्रक्रिया त्वरित हो। आधुनिक मशीनों का उपयोग कर काम को कम समय में पूरा करने की कोशिश की जाएगी। भागलपुर के नागरिकों की अपेक्षा है कि इस बार का मेंटेनेंस स्थायी हो, ताकि उन्हें हर दो-चार महीने पर होने वाली मरम्मत और उसके कारण लगने वाले जाम से निजात मिल सके। सेतु की मरम्मत से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि वाहनों के परिचालन व्यय (Fuel & Wear-tear) में भी कमी आएगी।
भविष्य की योजना: समानांतर पुल और मौजूदा सेतु का समन्वय
निरीक्षण के अंत में अधिकारियों ने निर्माणाधीन समानांतर विक्रमशिला सेतु के कार्यों की प्रगति की भी अनौपचारिक समीक्षा की। हालांकि, मुख्य फोकस मौजूदा पुल पर ही रहा। सरकार की योजना है कि जब नया पुल बनकर तैयार हो जाएगा, तब पुराने सेतु पर दबाव कम होगा और उसका संरक्षण अधिक बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। लेकिन वर्तमान में, पुराने सेतु की स्थिति को सुरक्षित रखना राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के लिए अनिवार्य है।
पंकज कुमार पाल ने आश्वस्त किया कि मेंटेनेंस के प्रस्ताव को जल्द ही प्रशासनिक स्वीकृति मिल जाएगी और इसके लिए आवश्यक फंड का आवंटन भी प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने भागलपुर के लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील की और कहा कि यह बुनियादी ढांचा आपकी सुरक्षा और विकास के लिए है, जिसे दुरुस्त करना विभाग की जिम्मेदारी है।
सुदृढ़ सेतु, सशक्त भागलपुर
विक्रमशिला सेतु का यह उच्चस्तरीय निरीक्षण भागलपुर के आधारभूत ढांचे के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। पंकज कुमार पाल, शीर्षक कपिल अशोक, जितेंद्र कुमार और नवल किशोर चौधरी जैसे अधिकारियों का एक साथ सेतु पर उतरना यह स्पष्ट करता है कि अब टालमटोल की गुंजाइश खत्म हो गई है। 1607 संख्या वाली यह प्रेस विज्ञप्ति केवल सूचना मात्र नहीं है, बल्कि यह उन लाखों यात्रियों के लिए उम्मीद की एक किरण है जो प्रतिदिन इस सेतु पर अपनी जान हथेली पर रखकर सफर करते हैं।
’द वॉइस ऑफ बिहार’ की टीम इस मेंटेनेंस अभियान की हर छोटी-बड़ी प्रगति पर अपनी नजर बनाए रखेगी। हम उम्मीद करते हैं कि पथ निर्माण विभाग इस बार गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करेगा और भागलपुर की इस ऐतिहासिक जीवनरेखा को एक नया जीवनदान मिलेगा। जब सेतु की सड़कें समतल होंगी और एक्सपेंशन जॉइंट्स बिना झटके के गाड़ियों को पार कराएंगे, तभी सही मायने में भागलपुर का विकास पथ प्रशस्त होगा।


