विक्रमशिला सेतु को फिर से जोड़ने की कवायद तेज: भागलपुर पहुँचा बीआरओ का दस्ता, बेली ब्रिज के लिए बिछने लगा लोहे का जाल

भागलपुर। बिहार के अंग क्षेत्र और सीमांचल को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी, विक्रमशिला सेतु की बहाली की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया गया है। तीन मई की रात स्लैब टूटने के बाद दो हिस्सों में बंटे इस सेतु को फिर से जोड़ने के लिए भारतीय सेना की तकनीकी शाखा, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की इंजीनियरिंग टीम भागलपुर पहुँच चुकी है। पश्चिम बंगाल के कलिम्पोंग से आई इस सैन्य टीम ने मंगलवार की देर रात ही क्षतिग्रस्त हिस्से पर मोर्चा संभाल लिया और बेली ब्रिज के निर्माण के लिए फ्रेम वर्क की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस तकनीकी टीम के आने से अब यह उम्मीद प्रबल हो गई है कि गंगा की लहरों के ऊपर टूटा हुआ यह संपर्क पथ इसी महीने के अंत तक फिर से क्रियाशील हो जाएगा और वाहनों की आवाजाही सुचारू रूप से बहाल हो सकेगी।

कलिम्पोंग से आई बीआरओ की टीम ने संभाला मोर्चा

​विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त स्लैब की मरम्मत और उस पर अस्थायी बेली ब्रिज के निर्माण के लिए कलिम्पोंग ब्रिगेड की इंजीनियरिंग टीम के तकनीशियनों ने भागलपुर पहुँचते ही सक्रियता दिखाई। मंगलवार की रात करीब 9 बजे पुल के नीचे तैनात पुलिस पदाधिकारियों ने अचानक पुल के ऊपर तेज रोशनी देखी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बीआरओ की टीम ने अपना कार्य आरंभ कर दिया है। इस 60 सदस्यीय टीम के मुख्य तकनीशियन और शुरुआती दस्ता मंगलवार रात को ही सेतु पर पहुँच गया था, जबकि टीम के शेष सदस्य बुधवार की सुबह अपने पूरे साजो-सामान और लाव-लश्कर के साथ भागलपुर पहुँचे।

​जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार की देर रात तक बेली ब्रिज के निर्माण से जुड़ी कई आवश्यक सामग्रियां भागलपुर पहुँच गई थीं। बीआरओ के बड़े इंजीनियरों की टीम भी बुधवार सुबह तक कार्यस्थल पर पहुँच चुकी है, जिससे निर्माण कार्य में और अधिक तेजी आने की संभावना है। एनएच के मुख्य अभियंता संजय भारती ने बताया कि बीआरओ की टीम को हर संभव विभागीय सहयोग प्रदान किया जा रहा है और पूरी टीम इसी लक्ष्य के साथ जुटी है कि इस माह के अंत तक सेतु पर परिचालन फिर से शुरू हो जाए।

65-66 मीटर लंबा होगा लोहे का बेली ब्रिज

​बीआरओ की इंजीनियरिंग टीम ने सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर जो ढांचा तैयार करने की योजना बनाई है, वह तकनीकी दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। तकनीशियनों द्वारा तैयार किए जा रहे फ्रेम वर्क के अनुसार, बेली ब्रिज की मुख्य लंबाई 50 मीटर होगी। इसके अतिरिक्त, दोनों ओर सपोर्टिंग के लिए 7.8 मीटर के लंबे फ्रेम तैयार किए गए हैं। इस प्रकार, पूरे ब्रिज का ढांचा लगभग 65 से 66 मीटर की कुल लंबाई में तैयार किया जाएगा। यह लोहे का मजबूत फ्रेम क्षतिग्रस्त स्लैब के ऊपर एक सुरक्षित रास्ता तैयार करेगा, जिससे गंगा के दोनों छोरों के बीच फिर से सीधा संपर्क स्थापित हो जाएगा।

​कार्य की जटिलता को देखते हुए तकनीशियनों ने बिजली विभाग से भी विशेष अनुरोध किया है। चूँकि पुल पर बिजली के तार टूटने के बाद आपूर्ति बाधित हो गई थी, इसलिए निर्माण कार्य को गति देने के लिए ब्रिज टीओपी (TOP) के पास से बिजली के तारों को जोड़ा गया है ताकि टीम को निर्बाध रूप से बिजली की सप्लाई मिलती रहे और वे रात के समय भी वेल्डिंग और असेंबलिंग का काम कर सकें।

आईआईटी पटना और पुणे की टीम कर रही ‘सेहत’ की जांच

​एक तरफ जहाँ बेली ब्रिज बनाने का काम चल रहा है, वहीं दूसरी ओर विक्रमशिला सेतु की दीर्घकालिक मजबूती को परखने के लिए वैज्ञानिक जांच भी तेज कर दी गई है। आईआईटी पटना की एक विशेषज्ञ टीम पिछले दो दिनों से सेतु की गुणवत्ता का आकलन कर रही है। सोमवार को इस टीम ने बरारी साइड के पिलरों का गहन अध्ययन किया था, जबकि मंगलवार से नवगछिया की ओर स्थित पिलर और स्लैब की जांच शुरू की गई है।

​आईआईटी पटना की यह टीम अगले दो-चार दिनों में अपनी जांच प्रक्रिया पूरी कर सेतु की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी और इसे पथ निर्माण विभाग को सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही पुल की मरम्मत की अगली रूपरेखा तय की जाएगी। इसके साथ ही, मंगलवार को पुणे से भी एक विशेष इंजीनियरिंग टीम भागलपुर पहुँची है। यह टीम मुख्य रूप से क्वालिटी मैनेजमेंट का काम देखती है और इसकी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि मरम्मत और बेली ब्रिज निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन हो।

तीन मई की रात हुई थी दुर्घटना

​विक्रमशिला सेतु पर संकट की शुरुआत तीन मई की देर रात हुई थी, जब गंगा पर बने इस पुल का एक स्लैब अचानक टूट गया। इस स्लैब के टूटने से सेतु दो भागों में बंट गया और वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। इस मार्ग के बंद होने से भागलपुर और नवगछिया के बीच न केवल परिवहन बाधित हुआ, बल्कि उत्तर बिहार और झारखंड/पश्चिम बंगाल के बीच का प्रमुख व्यापारिक मार्ग भी ठप पड़ गया। अब बेली ब्रिज के निर्माण से यह उम्मीद है कि टूटे हुए दोनों हिस्से फिर से एक हो जाएंगे और अंग क्षेत्र की यह जीवनरेखा फिर से धड़कने लगेगी। प्रशासन और तकनीकी टीमें इस कोशिश में हैं कि मरम्मत का यह कार्य बिना किसी बाधा के समय सीमा के भीतर पूरा हो जाए।

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