विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन कार्य का पथ निर्माण मंत्री ने किया निरीक्षण, तय समय सीमा में काम पूरा करने के दिए निर्देश

भागलपुर और आसपास के जिलों के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन और मरम्मत कार्य को लेकर बिहार सरकार ने गति बढ़ा दी है। इसी क्रम में बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र ने सोमवार सुबह विक्रमशिला सेतु पहुंचकर चल रहे कार्यों का स्थल निरीक्षण किया और परियोजना की प्रगति का विस्तृत जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर कार्यों की वर्तमान स्थिति, आगामी चरणों और निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजना को पूरा करने की रणनीति पर चर्चा की।

विक्रमशिला सेतु बिहार के पूर्वी हिस्से को उत्तर बिहार से जोड़ने वाले सबसे महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों में से एक माना जाता है। इस पुल के माध्यम से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन, मालवाहक ट्रक, बसें और निजी वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सेतु के पुनर्स्थापन और मरम्मत कार्य को राज्य की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल किया गया है।

निरीक्षण के दौरान पथ निर्माण मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि पुनर्स्थापन और मरम्मत का पूरा कार्य 30 नवंबर 2026 तक हर स्थिति में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि परियोजना की समय सीमा का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। इसके लिए संबंधित विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।

मंत्री ने कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरम्मत और पुनर्स्थापन से जुड़े प्रत्येक चरण में तकनीकी मानकों का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में सेतु की मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उनका कहना था कि गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और निर्माण कार्य की नियमित निगरानी जारी रहेगी।

निरीक्षण के दौरान डिस्मेंटलिंग प्रक्रिया से जुड़े स्टेजिंग कार्यों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि इन कार्यों को निर्धारित समय सीमा और तय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरा किया जाए। परियोजना के इस चरण को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके आधार पर आगे की मरम्मत और पुनर्स्थापन प्रक्रिया को गति मिलेगी।

पथ निर्माण मंत्री ने आगामी चरणों में बेली ब्रिज को सुरक्षित तरीके से हटाने की प्रक्रिया पर भी चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस कार्य को तकनीकी मानकों के अनुसार पूरा करने के लिए सीमा सड़क संगठन के साथ समन्वय स्थापित किया जाए। उनका कहना था कि विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के माध्यम से परियोजना को समय पर पूरा किया जा सकता है।

विक्रमशिला सेतु की मरम्मत का कार्य लंबे समय से क्षेत्र के लोगों की अपेक्षाओं और जरूरतों से जुड़ा हुआ है। पुल की स्थिति और बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए इसे मजबूत और सुरक्षित बनाना आवश्यक माना जा रहा था। इसी कारण राज्य सरकार ने इस दिशा में व्यापक कार्य योजना तैयार की है।

विशेषज्ञों के अनुसार विक्रमशिला सेतु न केवल भागलपुर बल्कि आसपास के कई जिलों की अर्थव्यवस्था और परिवहन व्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पुल व्यापार, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में इसकी मरम्मत और संरचनात्मक मजबूती सीधे तौर पर लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करती है।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मंत्री को परियोजना की वर्तमान प्रगति से अवगत कराया। उन्हें बताया गया कि विभिन्न चरणों में कार्य जारी है और निर्धारित समय सीमा के भीतर इसे पूरा करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों और तकनीकी सहायता का भी उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों ने यह भी जानकारी दी कि परियोजना की निगरानी नियमित रूप से की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की बाधा को समय रहते दूर किया जा सके।

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क और पुल व्यवस्था किसी भी राज्य के विकास की आधारशिला होती है और इसी सोच के तहत आधारभूत संरचना परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि विक्रमशिला सेतु केवल एक पुल नहीं बल्कि क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसके माध्यम से हर दिन हजारों लोग अपने कार्यस्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और बाजारों तक पहुंचते हैं। इसलिए इसकी मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

स्थानीय लोगों ने भी मंत्री के निरीक्षण और परियोजना की प्रगति को सकारात्मक कदम बताया है। उनका कहना है कि लंबे समय से लोग सेतु के पुनर्स्थापन कार्य के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा होने से उन्हें राहत मिलेगी।

व्यापारिक संगठनों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि पुल की स्थिति में सुधार होने से माल परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। इससे न केवल भागलपुर बल्कि उत्तर और पूर्व बिहार के कई जिलों को लाभ पहुंचेगा।

परियोजना से जुड़े इंजीनियरों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के बड़े संरचनात्मक कार्यों में तकनीकी सटीकता और सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक होता है। इसलिए प्रत्येक चरण में विशेषज्ञों की निगरानी और नियमित परीक्षण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

राज्य सरकार पिछले कुछ वर्षों में सड़क और पुल निर्माण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है। विक्रमशिला सेतु का पुनर्स्थापन भी इन्हीं प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य राज्य में बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराकर आर्थिक विकास और निवेश को प्रोत्साहित करना है।

मंत्री ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों से यह भी कहा कि कार्य स्थल पर सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए। निर्माण कार्य में लगे कर्मचारियों और तकनीकी टीम की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी परियोजना की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

इसके अलावा उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति की नियमित समीक्षा करने और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया। उनका कहना था कि परियोजना से जुड़े किसी भी मुद्दे का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा ताकि कार्य की गति प्रभावित न हो।

विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन कार्य को लेकर क्षेत्र के लोगों की उम्मीदें काफी बढ़ी हुई हैं। लोगों का मानना है कि कार्य पूरा होने के बाद यातायात व्यवस्था अधिक सुरक्षित और सुचारू होगी तथा लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान हो सकेगा।

फिलहाल परियोजना का कार्य विभिन्न चरणों में जारी है और प्रशासन की ओर से इसकी लगातार निगरानी की जा रही है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि तय समय सीमा के भीतर काम पूरा करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

भागलपुर में पथ निर्माण मंत्री द्वारा किया गया यह निरीक्षण इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सरकार परियोजना को लेकर गंभीर है और इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना चाहती है। अब क्षेत्र के लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगामी महीनों में कार्य कितनी तेजी से आगे बढ़ता है और निर्धारित समय सीमा के भीतर इसे पूरा किया जा सकता है या नहीं।

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