
समाचार के मुख्य बिंदु: रसीद में कम और जेब में ज्यादा… रेलवे की चौकसी ने पकड़ी अवैध वसूली
- बड़ी कार्रवाई: रेलवे बोर्ड की विजिलेंस टीम ने शनिवार को पटना जंक्शन पर अचानक छापेमारी कर भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश दिया।
- सस्पेंशन का हंटर: अवैध वसूली के मामले में टिकट कलेक्टर अंकित कुमार को प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
- पकड़ी गई चोरी: जांच के दौरान अंकित कुमार के पास 4600 रुपये नगद मिले, जबकि उनके द्वारा काटे गए ईएफटी (रसीद) का कुल मूल्य केवल 1610 रुपये था।
- नियमों का उल्लंघन: रेलवे के नियम के मुताबिक टीईटी ड्यूटी के दौरान 2000 रुपये से अधिक नगद नहीं रख सकते; अतिरिक्त राशि के लिए लिखित अनुमति अनिवार्य है।
- स्टेशन पर अफरा-तफरी: छापेमारी के दौरान कमर्शियल, पार्सल और जनरल बुकिंग काउंटर के कर्मियों में हड़कंप मच गया; कई काउंटर खंगाले गए।
- VOB इनसाइट: पटना जंक्शन जैसे व्यस्ततम स्टेशन पर विजिलेंस का यह ‘सरप्राइज विजिट’ रेल यात्रियों के उन दावों पर मुहर लगाता है जिनमें अक्सर शिकायत की जाती है कि जनरल काउंटरों पर टिकट के मूल्य से अधिक पैसे लिए जाते हैं। विजिलेंस की यह कार्रवाई केवल एक कर्मचारी का निलंबन नहीं है, बल्कि उस पूरे सिंडिकेट के लिए चेतावनी है जो रेलवे के राजस्व को निजी लाभ में बदलने की कोशिश कर रहा है।
पटना | 29 मार्च, 2026
बिहार की राजधानी पटना का हृदय स्थल ‘पटना जंक्शन’ शनिवार को किसी खूनी फिल्म के क्लाइमेक्स जैसा नजर आ रहा था, फर्क बस इतना था कि यहाँ गोलियां नहीं, बल्कि विजिलेंस की फाइलों और नगद गणना का प्रहार चल रहा था। रेलवे बोर्ड की विजिलेंस टीम ने बिना किसी पूर्व सूचना के जब जंक्शन के टीईटी (TET) चेकिंग रूम में कदम रखा, तो वहां मौजूद कई अधिकारियों और कर्मचारियों के माथे पर पसीना आ गया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, यह छापेमारी पिछले कई दिनों से मिल रही उन गुप्त शिकायतों का परिणाम थी, जिनमें यात्रियों ने जनरल टिकटों पर अवैध वसूली की बात कही थी।
विजिलेंस का औचक प्रवेश: जब चेकिंग रूम में ‘सन्नाटा’ पसर गया
शनिवार की दोपहर जब जंक्शन पर यात्रियों की भारी भीड़ थी, तभी रेलवे बोर्ड द्वारा गठित विजिलेंस टीम सीधे टीईटी चेकिंग रूम में दाखिल हुई। टीम का नेतृत्व कर रहे अधिकारियों ने बिना समय गंवाए वहां मौजूद टीईटी के ईएफटी (इलेक्ट्रॉनिक/मैनुअल फेयर टिकट) और उनके पास मौजूद पर्सनल कैश का मिलान करना शुरू कर दिया।
ईएफटी वह रसीद होती है जो टीईटी उन यात्रियों को काट कर देते हैं जिनके पास टिकट नहीं होता या जो जुर्माना भरते हैं। नियम के अनुसार, टीईटी की जेब में मौजूद कुल नगद राशि और उनकी रसीदों का जोड़ एक होना चाहिए। लेकिन यहाँ मामला बिल्कुल उल्टा नजर आया। विजिलेंस ने एक-एक कर फाइलों को खंगाला, जिससे पूरे परिसर में हड़कंप मच गया।
अंकित कुमार की ‘भारी’ जेब: 4600 बनाम 1610 का गणित
इस छापेमारी के सबसे बड़े शिकार बने टिकट कलेक्टर अंकित कुमार। विजिलेंस की टीम ने जब अंकित कुमार के पास मौजूद नगद राशि की गिनती की, तो वह 4600 रुपये निकली। इसके बाद जब उनकी ईएफटी बुक की जांच की गई, तो पता चला कि उन्होंने केवल 1610 रुपये के ही टिकट काटे थे।
हिसाब की विसंगति:
विजिलेंस ने जब 4600 रुपये में से 1610 रुपये घटाए, तो करीब 2990 रुपये का अंतर पाया गया। जब टीम ने अंकित कुमार से इस अतिरिक्त राशि के स्रोत के बारे में पूछा, तो उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। वे न तो यह बता सके कि यह पैसा कहां से आया और न ही उनके पास उच्चाधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित कोई ऐसी प्रति थी जो इस अतिरिक्त कैश को रखने की अनुमति देती हो। विजिलेंस ने उनसे लंबी पूछताछ की, लेकिन उनके जवाबों में विरोधाभास और घबराहट साफ दिख रही थी।
रेलवे का वो नियम, जिसे ‘जेब भरने’ के चक्कर में भूला दिया गया
रेलवे बोर्ड के सख्त दिशा-निर्देशों के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात किसी भी टीईटी के लिए नगद रखने की एक सीमा तय है। नियम यह है कि कोई भी टीईटी एक दिन में अधिकतम 2000 रुपये ही अपने पास नगद (निजी खर्च के लिए) रख सकता है। अगर किसी परिस्थिति में उसे 2000 रुपये से अधिक की राशि रखनी है, तो उसे संबंधित वरीय अधिकारी को लिखित रूप में इसकी सूचना देनी होती है। अधिकारी के हस्ताक्षर वाली एक प्रति टीईटी को अपने पास रखनी होती है ताकि जांच के समय उसे पेश किया जा सके।
अंकित कुमार के मामले में, उन्होंने न केवल 2000 की सीमा को पार किया, बल्कि रसीद से अधिक का पैसा उनकी जेब में मिला, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की ओर इशारा करता है। इसी आधार पर दानापुर मंडल ने उन्हें प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए सस्पेंड कर दिया है।
जनरल बुकिंग काउंटरों पर ‘ओवरचार्जिंग’ का खेल
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विजिलेंस की इस छापेमारी का मुख्य केंद्र जंक्शन के जनरल बुकिंग काउंटर भी थे। पिछले काफी समय से यह शिकायत मिल रही थी कि बुकिंग कर्मचारी यात्रियों से टिकट की असल कीमत से 5 से 10 रुपये अधिक वसूल रहे हैं। ग्रामीण और अनपढ़ यात्रियों को अक्सर इसका शिकार बनाया जाता है।
विजिलेंस की टीम ने चार-पांच काउंटरों की गहन जांच की। उन्होंने टिकट बिक्री का विवरण लिया और काउंटर पर मौजूद आय की जानकारी का मिलान किया। टीम ने रेलवे द्वारा तय किराए की सूची की भी जांच की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं सिस्टम में कोई बदलाव कर अवैध वसूली तो नहीं की जा रही। छापेमारी के दौरान आरक्षण (Reservation) काउंटर से लेकर पार्सल विभाग तक के कर्मियों में अतिरिक्त सतर्कता और डर देखा गया।
दानापुर रेल मंडल की चुप्पी और आंतरिक खलबली
हैरानी की बात यह है कि रेलवे बोर्ड की विजिलेंस टीम ने इस पूरी छापेमारी और निलंबन के संबंध में दानापुर मंडल को अब तक कोई आधिकारिक लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। यही कारण है कि मंडल के बड़े अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। हालांकि, अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि विजिलेंस की यह रिपोर्ट सीधी दिल्ली भेजी जाएगी, जिसके बाद कई और बड़े अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
करीब एक घंटे तक जंक्शन परिसर में समय गुजारने के बाद विजिलेंस टीम रवाना हुई, लेकिन पीछे छोड़ गई खौफ का वह साया जो अब हर उस कर्मचारी का पीछा कर रहा है जो रेलवे के राजस्व में सेंध लगा रहा था।
VOB का नजरिया: सुशासन के लिए ‘विजिलेंस’ की निरंतरता जरूरी
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि पटना जंक्शन पर हुई यह कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन यह केवल ‘एक दिन का प्रदर्शन’ बनकर नहीं रहनी चाहिए।
- सिस्टम का डिजिटलीकरण: ईएफटी को पूरी तरह से हैंडहेल्ड टर्मिनलों (HHT) के जरिए अनिवार्य किया जाना चाहिए ताकि मैन्युअल रसीदों में हेरफेर की गुंजाइश खत्म हो सके।
- यात्री जागरूकता: यात्रियों को हमेशा रसीद मांगनी चाहिए और यदि काउंटर पर अधिक पैसे मांगे जाएं, तो तुरंत रेलवे के हेल्पलाइन नंबरों पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
- नियमित ऑडिट: दानापुर मंडल को केवल दिल्ली की विजिलेंस टीम के भरोसे नहीं रहना चाहिए। स्थानीय स्तर पर भी औचक निरीक्षण होने चाहिए ताकि भ्रष्टाचार की जड़ें पनप ही न सकें।
निष्कर्ष: भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार
अंकित कुमार का निलंबन इस बात का प्रमाण है कि भले ही सिस्टम के भीतर कुछ लोग गलत कर रहे हों, लेकिन निगरानी तंत्र अभी भी जीवित है। पटना जंक्शन के अधिकारियों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि आम यात्रियों का भरोसा रेलवे पर बना रहे।


