वैशाली में ‘मौत का टैंक’: डूबते बच्चे को बचाने उतरे एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत; 4 दिन पहले ही उठी थी डोली, अब घर से निकली अर्थी

वैशाली/हाजीपुर | 02 मार्च, 2026: बिहार के वैशाली जिले के अनवरपुर गांव में रविवार का दिन खुशियों को मातम में बदल गया। एक मासूम को बचाने की कोशिश में पूरा परिवार काल के गाल में समा गया। शौचालय की टंकी में जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी ने चार जिंदगियां लील लीं, जबकि तीन अन्य लोग अस्पताल में मौत से जूझ रहे हैं।

कैसे शुरू हुआ ‘मौत का सिलसिला’?

​यह हादसा उस वक्त शुरू हुआ जब परिवार का एक छोटा बच्चा खेलते-खेलते अचानक 10 फीट गहरी शौचालय की टंकी में गिर गया।

  • एक के बाद एक उतरे: बच्चे को बचाने के लिए सबसे पहले उसके चाचा कूदे, लेकिन जहरीली गैस के कारण वह तुरंत बेहोश हो गए। उन्हें बचाने के लिए परिवार के अन्य सदस्य भी एक-एक कर टैंक के अंदर उतरते गए।
  • फंस गए 7 लोग: देखते ही देखते कुल 7 लोग उस मौत के जाल में फंस गए। टैंक के भीतर मीथेन और अन्य जहरीली गैसों का स्तर इतना अधिक था कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला।

सबसे दर्दनाक मंजर: 4 दिन पहले हुई थी शादी

​इस हादसे की सबसे दुखद बात यह है कि मृतकों में शामिल एक युवक की शादी महज चार दिन पहले ही हुई थी।

​जिस घर में अभी मंगल गीत गाए जा रहे थे, वहां अब चीख-पुकार मची है। नई नवेली दुल्हन के हाथों की मेहंदी का रंग अभी उतरा भी नहीं था कि उसका सुहाग उजड़ गया। पूरा गांव इस त्रासदी को देखकर सन्न है।

 

रेस्क्यू ऑपरेशन: पुलिस ने दिखाई जांबाजी

​हादसे की खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। स्थानीय पुलिसकर्मियों ने सूझबूझ दिखाते हुए ऑक्सीजन मास्क पहनकर टैंक के भीतर प्रवेश किया और सभी सातों लोगों को बाहर निकाला।

  • मृतक: आनंद कुमार, पंकज कुमार, राहुल कुमार और प्रियांशु कुमार।
  • घायल: बाकी 3 लोगों की हालत गंभीर है और वे सदर अस्पताल में भर्ती हैं।

VOB का नजरिया: लापरवाही या जानकारी का अभाव?

​वैशाली की यह घटना एक बड़ी चेतावनी है। अक्सर पुराने या बंद शौचालयों के टैंकों में जहरीली गैसें (जैसे हाइड्रोजन सल्फाइड और मीथेन) जमा हो जाती हैं। ऐसे में बिना सुरक्षा उपकरणों के टैंक में उतरना जानलेवा साबित होता है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ नागरिकों से अपील करता है कि कभी भी ऐसे टैंकों में सीधे प्रवेश न करें, यह ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करते हैं।

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