
हाजीपुर/पटना। बिहार के वैशाली जिले से अनुशासन और मर्यादा को तार-तार करने वाली एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरे पुलिस और गृह रक्षा वाहिनी महकमे को हिलाकर रख दिया है। रक्षक ही जब भक्षक बन जाए, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? वैशाली में प्रशिक्षण ले रही महिला होमगार्ड जवानों के साथ दुराचार और लैंगिक उत्पीड़न के गंभीर मामले में बिहार सरकार और गृह रक्षा वाहिनी मुख्यालय ने बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। वैशाली के जिला समादेष्टा (कमांडेंट) सह जिला अग्निशमन पदाधिकारी प्रेमचंद को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उन पर लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें मुख्यालय, पटना में ‘क्लोज’ (संबद्ध) कर दिया गया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब दो महिला प्रशिक्षुओं ने साहस दिखाते हुए वर्दी की आड़ में चल रहे शोषण के खेल को बेनकाब किया। प्रशासन के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता के रसूख और ऊँचे पद की ओट में महिलाओं की अस्मत से खिलवाड़ करने वालों के लिए महकमे में कोई जगह नहीं है।
रक्षक की हैवानियत
वैशाली में गृह रक्षकों (होमगार्ड) के प्रशिक्षण केंद्र में पिछले कुछ समय से सब कुछ सामान्य नहीं था। अनुशासन के नाम पर यहाँ महिला प्रशिक्षुओं के साथ मानसिक और शारीरिक शोषण की पटकथा लिखी जा रही थी। मामला तब प्रकाश में आया जब प्रशिक्षण ले रही दो महिला होमगार्ड जवानों ने जिला समादेष्टा प्रेमचंद पर दुराचार, अभद्र व्यवहार और लैंगिक उत्पीड़न के संगीन आरोप लगाए।
आरोप के अनुसार, प्रशिक्षण के दौरान प्रेमचंद अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर महिला प्रशिक्षुओं पर अनुचित दबाव बनाते थे। उनके द्वारा न केवल अश्लील टिप्पणियां की जाती थीं, बल्कि मर्यादा की सीमाओं को लांघते हुए दुर्व्यवहार भी किया जाता था। एक कमांडेंट, जिसकी जिम्मेदारी अपने मातहतों को अनुशासन और सुरक्षा का पाठ पढ़ाना है, वही अपनी पदवी का उपयोग कमजोर और प्रशिक्षु महिलाओं के शोषण के लिए कर रहा था। यह मामला केवल एक अधिकारी की व्यक्तिगत गिरावट का नहीं है, बल्कि यह उस प्रशिक्षण प्रणाली पर भी सवाल खड़ा करता है जहाँ महिला सुरक्षा के दावों के बीच ऐसे रसूखदार ‘शिकारी’ मौजूद रहते हैं।
संघ की सक्रियता और मुख्यालय की जांच
इस घिनौने कृत्य के विरुद्ध आवाज उठाने में ‘बिहार गृह रक्षा वाहिनी स्वयंसेवक संघ’ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब पीड़ित महिला प्रशिक्षुओं ने अपनी आपबीती संघ के पदाधिकारियों को बताई, तो संघ ने बिना देर किए इस मामले को उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया। संघ की ओर से एक विस्तृत परिवाद-पत्र मुख्यालय को सौंपा गया, जिसमें प्रेमचंद के कुकृत्यों का कच्चा चिट्ठा मौजूद था।
शिकायत की गंभीरता और महिला सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दे को देखते हुए गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवाएं, बिहार के महानिदेशक सह महासमादेष्टा ने तत्काल जांच के आदेश दिए। इस मामले की जांच की जिम्मेदारी उप-महासमादेष्टा, पटना को सौंपी गई। जांच अधिकारी ने वैशाली पहुँचकर पीड़ित महिलाओं के बयान दर्ज किए और अन्य साक्ष्यों को खंगाला। जांच की आंच जैसे ही तेज हुई, कमांडेंट प्रेमचंद के खिलाफ लगे आरोपों की सत्यता सामने आने लगी। आंतरिक जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट पाया गया कि प्रेमचंद ने अपने पद की गरिमा के विरुद्ध जाकर महिला प्रशिक्षुओं के साथ अभद्र व्यवहार और दुराचार किया है। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्यालय ने प्रेमचंद के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की पहली गाज गिराई।
स्थानांतरण और नई जिम्मेदारी: मुख्यालय का कड़ा संदेश
महासमादेष्टा के कार्यालय से जारी आदेश पत्र के अनुसार, प्रेमचंद को वैशाली के जिला समादेष्टा के पद से हटाते हुए पटना मुख्यालय में योगदान देने का निर्देश दिया गया है। उनकी कार्यशैली और आचरण की जांच अभी और गहराई से की जाएगी, लेकिन तब तक उन्हें किसी भी प्रशासनिक जिम्मेदारी से दूर रखा गया है।
वैशाली में रिक्त हुए इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी फिलहाल पटना के प्रमंडलीय समादेष्टा सह जिला अग्निशमन पदाधिकारी रितेश कुमार पांडेय को सौंपी गई है। रितेश कुमार पांडेय अब अपने वर्तमान कार्यों के साथ-साथ वैशाली जिला समादेष्टा का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। विभाग का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि प्रशिक्षण ले रहे अन्य जवानों, विशेषकर महिलाओं के मन में व्याप्त डर को खत्म किया जा सके और संस्थान की साख को दोबारा बहाल किया जा सके।
महिला प्रशिक्षुओं की सुरक्षा: एक बड़ी चुनौती
वैशाली की यह घटना बिहार में महिला सुरक्षा के दावों की जमीनी हकीकत बयां करती है। होमगार्ड जैसे संगठनों में भर्ती होने वाली अधिकांश महिलाएं ग्रामीण परिवेश और साधारण परिवारों से आती हैं। उनके लिए नौकरी पाना और प्रशिक्षण पूरा करना एक बड़े सपने जैसा होता है। इसी मजबूरी और पद के पदानुक्रम (Hierarchy) का फायदा प्रेमचंद जैसे अधिकारी उठाते हैं।
महिला प्रशिक्षुओं ने जिस बहादुरी से अपने उच्च अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोला, वह काबिले तारीफ है। अक्सर ऐसे मामलों में पद के डर से आवाजें दबा दी जाती हैं, लेकिन इस बार पीड़ितों ने ‘चुप’ रहने के बजाय ‘लड़ने’ का रास्ता चुना। यह कार्रवाई उन तमाम अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है जो यह समझते हैं कि बंद कमरों के भीतर किया गया उनका व्यवहार कभी बाहर नहीं आएगा। वैशाली की घटना ने यह साबित कर दिया है कि अब बिहार का प्रशासनिक ढांचा लैंगिक संवेदनशीलता (Gender Sensitivity) को लेकर गंभीर हो रहा है।
अनुशासन के मंदिर में अधर्म: क्या है आगे की राह?
होमगार्ड प्रशिक्षण केंद्र को अनुशासन का मंदिर माना जाता है, जहाँ समाज की सुरक्षा के लिए रक्षकों को तैयार किया जाता है। लेकिन प्रेमचंद ने इस मंदिर की पवित्रता को भंग किया है। पद से हटाना और मुख्यालय में क्लोज करना तो केवल शुरुआती प्रक्रिया है। सामाजिक और कर्मचारी संगठनों की मांग है कि ऐसे अधिकारी पर न केवल विभागीय कार्रवाई हो, बल्कि उन पर आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज कर कड़ी कानूनी सजा भी दिलाई जाए।
प्रशिक्षु गृह रक्षकों के मन में इस घटना से जो आघात लगा है, उसे भरने में समय लगेगा। नए प्रभारी रितेश कुमार पांडेय के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे वैशाली प्रशिक्षण केंद्र में एक भयमुक्त और सुरक्षित वातावरण का निर्माण करें। साथ ही, विभाग को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में किसी भी प्रशिक्षण केंद्र में महिलाओं के साथ ऐसी पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए ‘आंतरिक शिकायत समिति’ (ICC) को और अधिक सक्रिय और स्वतंत्र बनाने की आवश्यकता है।


