रूसी तेल पर बदला अमेरिका का रुख! ईरान का ट्रंप प्रशासन पर तंज, कहा– अब भारत से ही कर रहे गुहार

नई दिल्ली। रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर दबाव बनाने वाले अमेरिका के रुख में अब बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इस मुद्दे पर अमेरिका और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि जो अमेरिका पहले भारत को रूस से तेल खरीदने से रोकने की कोशिश कर रहा था, वही अब ऊर्जा संकट के बीच दुनिया से और खासकर भारत से रूसी तेल खरीदने की अपील कर रहा है।

सोशल मीडिया पर कसा तंज
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए अमेरिका की नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से अमेरिका भारत सहित कई देशों पर दबाव बना रहा था कि वे रूस से कच्चे तेल का आयात बंद करें। लेकिन ईरान के साथ युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने के बाद अब अमेरिका खुद ही रूस से तेल खरीदने की अनुमति देने और दुनिया से इसे खरीदने की अपील करने लगा है।

अरागची ने अपने बयान में कहा कि यह अमेरिका की दोहरी नीति को दिखाता है, जहां पहले प्रतिबंधों और दबाव की बात की जाती है और फिर संकट के समय वही नियम बदल दिए जाते हैं।

यूरोपीय देशों पर भी साधा निशाना
ईरानी विदेश मंत्री ने यूरोपीय देशों की भी आलोचना की। उनका कहना है कि यूरोप ने ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष में अमेरिका का समर्थन किया, यह सोचकर कि इससे रूस के खिलाफ उसे अधिक अमेरिकी समर्थन मिलेगा। उन्होंने इस रणनीति को कमजोर और निराशाजनक करार दिया।

अरागची ने अपने पोस्ट में फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि वैश्विक तेल कीमतों में तेजी आने से रूस की कमाई में बढ़ोतरी हो रही है।

तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पर अनिश्चितता के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है, जो 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।

तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए अमेरिका ने रूस के तेल क्षेत्र पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने का फैसला किया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 30 दिनों की छूट दी है, जिसके तहत 12 मार्च तक जहाजों में लोड किए गए रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री और डिलीवरी की अनुमति दी गई है। यह छूट फिलहाल 11 अप्रैल तक लागू रहेगी।

इससे पहले भी अमेरिका ने 5 मार्च को इसी तरह की 30 दिन की राहत दी थी, जिससे समुद्र में फंसे रूसी तेल के कार्गो को भारत सहित अन्य देशों द्वारा खरीदे जाने की अनुमति मिली थी।

भारत को ईरान ने दिया सुरक्षित रास्ता
इस बीच रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने भारत के झंडे वाले दो एलपीजी जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने कहा कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मित्रतापूर्ण संबंध रहे हैं, इसलिए भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है और भविष्य में भी यह साझेदारी मजबूत बनी रहेगी।

ऊर्जा संकट के बीच भारत की भूमिका अहम
वैश्विक ऊर्जा संकट के इस दौर में भारत एक बड़े उपभोक्ता देश के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस, मध्य एशिया और पश्चिम एशिया के बीच भारत ऊर्जा संतुलन बनाने में अहम कड़ी बन सकता है।

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