मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का आज 21वां दिन है और इसके असर अब सिर्फ कुछ दिनों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि आने वाले दशकों तक दिखाई दे सकते हैं। सुप्रीम लीडर समेत कई शीर्ष नेताओं की हत्या के बावजूद ईरान लगातार अमेरिका और इजरायल का मुकाबला कर रहा है। वहीं, कई मौकों पर अमेरिका और इजरायल भी दबाव में नजर आए हैं। तीनों पक्षों के बीच हमले अब भी जारी हैं।
इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ा है। ईरान पर हमलों के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के चलते तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।
इसी बीच अमेरिका एक बड़ा और अप्रत्याशित कदम उठाने पर विचार कर रहा है। करीब 40 साल से ईरानी कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंध को हटाने की संभावना जताई जा रही है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक इंटरव्यू में संकेत दिया कि यह फैसला वैश्विक सप्लाई को संतुलित करने के लिए लिया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि इस समय लगभग 140 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल समुद्र में जहाजों पर स्टॉक के रूप में पड़ा है। यदि इस पर से प्रतिबंध हटा लिया जाता है, तो यह तेल जल्दी बाजार में आ सकता है और सप्लाई की कमी को दूर कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका यह प्रतिबंध हटाता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि अमेरिका यह फैसला कब और किस रूप में लागू करता है।


