खर्ग आइलैंड पर अमेरिकी हमला: ईरान के तेल निर्यात के ‘दिल’ पर क्यों साधा गया निशाना?

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और तेज हो गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खर्ग आइलैंड पर स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर भारी बमबारी की है। ट्रंप के अनुसार यह कार्रवाई ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते दबाव और वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधा डालने की प्रतिक्रिया के तौर पर की गई है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि खर्ग द्वीप पर मौजूद सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया और यह हमला मध्य पूर्व के इतिहास की सबसे शक्तिशाली बमबारी में से एक था। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी नौसेना जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों को सुरक्षा देने की प्रक्रिया शुरू करेगी।

खर्ग आइलैंड पर हमला क्यों किया गया?
अमेरिका का कहना है कि हाल के दिनों में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी थीं और तेल तथा गैस के जहाजों की आवाजाही पर दबाव बनाने की कोशिश की थी। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से रोजाना लाखों बैरल तेल और गैस की आपूर्ति होती है।

ऐसे में अमेरिका ने ईरान को चेतावनी देने के लिए खर्ग आइलैंड पर स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ट्रंप ने कहा कि इस हमले में जानबूझकर तेल के बुनियादी ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाया गया, क्योंकि अमेरिका का उद्देश्य ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह रोकना नहीं बल्कि उसे चेतावनी देना था।

खर्ग आइलैंड ईरान के लिए क्यों अहम है?
खर्ग आइलैंड ईरान के लिए बेहद रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह द्वीप ईरान के कच्चे तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक ईरान के कुल कच्चे तेल निर्यात का लगभग 90 से 95 प्रतिशत हिस्सा इसी द्वीप से होकर गुजरता है।

ईरान के अलग-अलग तेल क्षेत्रों से कच्चा तेल पाइपलाइनों के जरिए खर्ग आइलैंड तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद यहां स्थित बड़े टर्मिनलों पर इसे विशाल तेल टैंकरों में लादा जाता है और फिर दुनिया के विभिन्न देशों तक भेजा जाता है।

खर्ग आइलैंड कहां स्थित है?
खर्ग आइलैंड फारस की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में स्थित है और यह ईरान की मुख्य भूमि से लगभग 25 से 30 किलोमीटर की दूरी पर है। यह बुशेहर बंदरगाह शहर के पास स्थित एक छोटा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीप है, जिसका क्षेत्रफल करीब 20 वर्ग किलोमीटर के आसपास बताया जाता है।

यह द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के उत्तर-पश्चिम में स्थित है और अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण मध्य पूर्व से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम भूमिका निभाता है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खर्ग आइलैंड की तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो इसका असर सीधे वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और कई देशों में ऊर्जा संकट भी गहरा सकता है।

मध्य पूर्व में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच दुनिया की निगाहें अब इस क्षेत्र की स्थिति पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह इलाका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे अहम केंद्र माना जाता है।

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