UPSC में मिला ऑल इंडिया रैंक 10, रिजल्ट सुनकर आधे घंटे तक रोती रही ऐश्वर्यम प्रजापति, बन गई IAS

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उत्तर प्रदेश के बेहद पिछड़े और देश के सीमावर्ती जनपद महराजगंज में जन्मीं ऐश्वर्यम प्रजापति ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में दसवीं रैंक हासिल कर आईएएस बनी हैं…

महराजगंज जिले के कोल्हुई क्षेत्र के  बहदुरी बाजार ग्राम पंचायत मैनहवा के टोला मंझरिया निवासी डा. ऐश्‍वर्यम प्रजापति लखनऊ विश्‍वविद्यालय में प्रोफेसर हैं. उनकी मां उर्मिला देवी गृहणी हैं. ऐश्वर्यम प्रजापति ने अपने दूसरे ही प्रयास  में देश की सबसे बडी प्रशासनिक परीक्षा आईएएस में पूरे देश मे 10वां स्थान प्राप्त कर पूरे जिले का मान बढ़ाया है.

यहां से की है पढ़ाई

ऐश्‍वर्म की प्रारंभिक शिक्षा लखनऊ के रानी लक्ष्‍मी बाई मेमोरियल सीनियर सेकेंड्री स्‍कूल में हुई है. उत्‍तराखंड से बीटेक करने के बाद उन्होंने विशाखापट्टनम में एलएनटी में बतौर इंजीनियर 18 महीने काम किया. इसके बाद वे तैयारी में जुट गईं.

माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय

ऐश्‍वर्यम ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को दिया है. वे कहती हैं कि कोई भी लक्ष्‍य निर्धारित कर कड़ी मेहनत की जाए तो सफलता पायी जा सकती है. उन्‍होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि वे सेल्‍फ कांफिडेंस पर विश्‍वास रखें. दूसरों की नहीं सुनें और टारगेट को अचीव करने के लिए लगे रहें, सफलता जरूर मिलेगी. वे कहती हैं क‍ि उन्‍होंने बचपन से ही आईएएस बनने का सपना देखा था. उनका लक्ष्‍य निश्चित रहा है.

ऐश्‍वर्यम कहती हैं कि लक्ष्‍य बनाकर तैयारी करना और इसके साथ धैर्य रखना सफलता के लिए जरूरी है. दृढ़ निश्‍चय और संकल्‍प रखने वाले युवाओं को टारगेट अचीव करने में मुश्किल नहीं होती है. उन्‍होंने कहा कि पढ़ाई के साथ रणनीति बनाना जरूरी है. उन्‍होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी 10वीं रैंक आएगी, लेकिन उन्‍हें अपनी मेहनत पर पूरा भरोसा रहा है.

वे कहती हैं कि जरूरी है कि उपयोगी सामग्री को ही पढ़ें. ये तय करना जरूरी है कि कौन सी सामग्री काम की है. इसके साथ ही हर साल हो रहे बदलाव और करंट अफेयर्स पर ध्‍यान देना जरूरी है.

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