बिहार विधानसभा में शराबबंदी पर घमासान, “हिम्मत है तो मंगाकर दिखाओ शराब”

पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम चरण में गुरुवार को शराबबंदी कानून को लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए दावा किया कि अगर चाहें तो सदन के भीतर भी शराब की डिलीवरी हो सकती है। इस बयान पर सत्ता पक्ष के नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई और खुली चुनौती दे डाली।

शराबबंदी कानून पर बवाल

विधान परिषद में बहस के दौरान आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। जदयू एमएलसी नीरज कुमार ने आरजेडी के विधान परिषद सदस्य Sunil Kumar Singh पर निशाना साधते हुए कहा कि सदन में शराबबंदी की शपथ लेने के बाद इस तरह का बयान देना गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि ऐसा बयान अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई को आमंत्रित कर सकता है।

नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि राजद ने शराब कंपनियों से करोड़ों रुपये का चंदा लिया, इसलिए पार्टी को शराबबंदी से दिक्कत हो रही है।

सुनील सिंह का पलटवार

इस पर सुनील कुमार सिंह ने पलटवार करते हुए कहा, “हमाम में सब नंगे हैं, सबकी हकीकत जानता हूं, सदन की पटल पर खोलकर रख दूंगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि “किंग महेंद्र से जदयू तक हर महीने 99 लाख रुपये लिए जाते रहे, यह सिलसिला पांच साल तक चला।”

मंत्री विजय चौधरी का जवाब

मंत्री Vijay Kumar Chaudhary ने कहा कि यदि कहीं शराब की बिक्री हो रही है तो उसे रोकने के लिए ठोस सूचना दी जानी चाहिए। केवल आरोप लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे संबंधित एजेंसियों को जानकारी उपलब्ध कराएं।

अशोक चौधरी की चुनौती

वहीं मंत्री Ashok Choudhary ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि हिम्मत है तो विधानसभा परिसर में शराब मंगाकर दिखाएं, कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जहां भी शराब मिलने की सूचना हो, हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई जाए ताकि तत्काल कार्रवाई हो सके।

जेल को लेकर तंज

नीरज कुमार ने मीडिया से बातचीत में तंज कसते हुए कहा कि यदि विपक्ष के नेता शराब मंगाने की बात कर रहे हैं तो यह भी बताएं कि किस जेल में रहना पसंद करेंगे। उन्होंने राजद सुप्रीमो Lalu Prasad Yadav का जिक्र करते हुए कहा कि वे पहले जेल जा चुके हैं, अब अन्य नेताओं को तय करना चाहिए कि वे कहां रहना चाहेंगे।

शराबबंदी पर सरकार का सख्त रुख

सत्ता पक्ष ने दोहराया कि मुख्यमंत्री Nitish Kumar द्वारा लागू की गई शराबबंदी राज्य की सामूहिक प्रतिबद्धता है और इसे हर हाल में लागू रखा जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया कि कानून सभी पर समान रूप से लागू है और किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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