भरत तिवारी एनकाउंटर पर घमासान: वायरल हुआ नीतीश कुमार का पुराना बयान, जेडीयू ने भी उठाए सवाल

पटना/भोजपुर: भोजपुर के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की पुलिस एनकाउंटर में मौत को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है। मामले में लगातार उठ रहे सवालों और वायरल वीडियो के बीच बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अप्रैल 2023 का एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस बयान को लेकर सियासी बहस और तेज हो गई है।

वायरल हुआ नीतीश कुमार का पुराना बयान

17 अप्रैल 2023 को मीडिया से बातचीत के दौरान नीतीश कुमार ने एनकाउंटर की घटनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जब देश में कानून, संविधान और न्याय व्यवस्था मौजूद है, तो किसी भी आरोपी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।

उन्होंने कहा था कि यदि कोई अपराधी है और वह खुद आत्मसमर्पण करना चाहता है या जेल जाना चाहता है, तो उसे गोली मारना कानूनसम्मत नहीं माना जा सकता। सजा देने का अधिकार केवल अदालत को है, पुलिस को नहीं।

नीतीश कुमार का यह बयान अब भरत तिवारी एनकाउंटर मामले के बीच सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है।

जेडीयू ने भी जताई आपत्ति

मामले में सरकार की प्रमुख सहयोगी पार्टी जेडीयू ने भी सवाल उठाए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि केवल चार पुलिसकर्मियों का निलंबन पर्याप्त कार्रवाई नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि एनकाउंटर से जुड़ा जो वीडियो सामने आया है, वह कई गंभीर सवाल खड़े करता है और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

बढ़ते दबाव के बीच न्यायिक जांच का फैसला

जेडीयू समेत विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से उठ रहे सवालों के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने की घोषणा की है।

सरकार का कहना है कि जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

आपराधिक रिकॉर्ड को लेकर भी विवाद

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में यह दावा किया जा रहा है कि उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। इसी कारण पुलिस कार्रवाई को लेकर और अधिक सवाल उठ रहे हैं।

घटना के बाद विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कई नेताओं ने भी पुलिस की भूमिका पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

दो एफआईआर दर्ज

पुलिस ने इस मामले में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं।

पहली एफआईआर में अवैध हथियार रखने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस टीम पर फायरिंग करने तथा आरोपी को संरक्षण देने के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में भरत तिवारी के पिता और भाई को नामजद किया गया है।

वहीं दूसरी प्राथमिकी पुलिस मुठभेड़ से संबंधित है, जिसकी जांच जारी है।

मां ने भी पुलिस अधिकारियों पर लगाए आरोप

भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी ने भी मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

उन्होंने जगदीशपुर डीएसपी और शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है। परिवार का आरोप है कि एनकाउंटर की पूरी घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

हालांकि अब तक उनके आवेदन पर कोई औपचारिक कार्रवाई नहीं हुई है।

जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

भरत तिवारी एनकाउंटर अब केवल एक पुलिस कार्रवाई का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का बड़ा विषय बन चुका है।

एक तरफ पुलिस अपनी कार्रवाई को उचित बता रही है, जबकि दूसरी तरफ परिजन, विपक्ष और सत्ताधारी गठबंधन के कुछ नेता भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

न्यायिक जांच की घोषणा के बाद अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि पुलिस कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी या फिर मामले में किसी स्तर पर गंभीर चूक हुई।

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