बिहार विधानसभा में सोमवार को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना और 94 लाख गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता देने के मुद्दे पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। राजद और वाम दलों के विधायकों ने विधानसभा पोर्टिको में पोस्टर लेकर नारेबाजी की और सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया।
विपक्ष का आरोप: दो-दो लाख देने का वादा अधूरा
विपक्षी सदस्यों का कहना है कि जातीय गणना के आधार पर 94 लाख गरीब परिवारों की पहचान की गई थी। सरकार ने इन परिवारों को दो-दो लाख रुपये देने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक अधिकांश परिवारों को राशि नहीं मिली है।
राजद विधायक Ranvijay Sahu ने कहा कि सरकार महिला सशक्तिकरण की बात करती है, लेकिन चुनाव के समय 10-10 हजार रुपये देकर महिलाओं से वोट ले लिया और अब रोजगार के लिए दो लाख रुपये देने के वादे से पीछे हट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।
माले का हमला: 40 हजार परिवारों को ही मिली राशि
वहीं माले विधायक Sandeep Saurabh ने कहा कि सरकार ने सदन में घोषणा की थी कि जिन परिवारों की मासिक आय 6 हजार रुपये से कम है, ऐसे 94 लाख परिवारों को दो-दो लाख रुपये दिए जाएंगे। लेकिन अब तक केवल लगभग 40 हजार परिवारों को ही 50-50 हजार रुपये की सहायता मिली है।
उन्होंने आरक्षण के दायरे को बढ़ाने और उसे नौवीं अनुसूची में शामिल करने की भी मांग उठाई, साथ ही सरकार की वित्तीय स्थिति पर सवाल खड़े किए।
70 हजार करोड़ पर सीएजी रिपोर्ट का जिक्र
विपक्ष ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि 70,877.61 करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाणपत्र समय पर प्रस्तुत नहीं किए गए। इसे लेकर सरकार की वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए।
सरकार की ओर से क्या?
हालांकि इस मुद्दे पर सरकार की ओर से विस्तृत जवाब का इंतजार है, लेकिन विधानसभा में बढ़ते राजनीतिक टकराव से साफ है कि महिला रोजगार योजना और गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता का मुद्दा आने वाले दिनों में सियासत का बड़ा केंद्र बन सकता है।


