उपेंद्र कुशवाहा ने कहा – नकारात्मकता के आधार पर विपक्षी एकता का हश्र मध्यावधि चुनाव.. PM मोदी को चुनौती नहीं

बिहार में विपक्षी एकता बैठक की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. महागठबंधन इसे लेकर काफी उत्साहित है तो वहीं विरोधी इसपर निशाना साधने से नहीं चूक रहे. इसी कड़ी में राष्ट्रीय लोक जलना दल के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने विपक्षी एकता वैठक को आड़े हाथों लिया. उन्होंने इस बैठक से निकलने वाले ‘परिणाम’ से जनता को आगाह किया. उपेन्द्र कुशवाहा ने इसे जनता पर घिसा-पिटा प्रयोग करार दिया।

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि सत्ताधारी दल से इतर देश के समक्ष कोई नया वैकल्पिक मॉडल प्रस्तुत किए बिना, सिर्फ नकारात्मकता को आधार बनाकर बनाई गई विपक्षी एकता का हश्र मध्यावधि चुनाव के रूप में 1977 और 1989 में देश देख /भुगत चुका है, एकबार फिर उसी तरह के घिसे-पिटे प्रयोग के परिणाम से जनता वाक़िफ है।

उन्होंने अपना बयान जारी कर कहा है कि देश में सिर्फ नकारात्मकता के आधार पर बिना कोई नये वैकल्पिक मॉडल के विपक्षी एकता का नतीजा मध्यावधी चुनावों के रूप में जनता देख चुकी है. 1977 और 1989 में देश उसको भुगत चुका है. एक बार फिर उसी तरह के बेतुके प्रयोग को महागठबंधन अपना रहा है।

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