केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी बोले- ‘इंवेस्टीगेशन से पहले रिपब्लिक का नाम लेना पूरी तरह गलत’

TRP को लेकर मुंबई पुलिस के कमिश्नर परमबीर सिंह ने झूठ को रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने देश की जनता के सामने बेनकाब कर दिया है। दरअसल, मुंबई के पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह ने 9 अक्टूबर को एक प्रेस कांफ्रेंस की और रिपब्लिक के खिलाफ एक कहानी सुनाई। जिसमें उन्होंने बताया कि टीआरपी घोटाले में रिपब्लिक के खिलाफ सबूत मिले हैं। लेकिन रिपब्लिक को भेजे गए मेल में BARC ने औपचारिक तौर पर माना कि रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के खिलाफ कोई सबूत नहीं है।

रिपब्लिक भारत के खुलासे पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि ‘रिपब्लिक को सच दिखाने और बोलने के लिए टारगेट किया जा रहा है। इंवेस्टीगेशन से पहले रिपब्लिक का नाम लेना पूरी तरह गलत है। महाराष्ट्र सरकार को एक्सपोज किया इसलिए रिपब्लिक को टारगेट किया जा रहा है इस मामले की जांच होनी जरूरी।

इसपर विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने ट्वीट कर कहा कि ”महाराष्ट्र की सोनिया-सेना सरकार लगता है पुलिस के कंधे से बंदूक चलाकर प्रखर राष्ट्रवादी चेहरों व लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ – पत्रकारों और रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क पर लगातार हमले करने के निम्नतम राजनैतिक हथकंडों पर उतर आई है। यह सर्वथा निंदनीय है।

बता दें,  मुंबई पुलिस कमिश्नर के आरोप के बाद हमने सबसे पहले वो FIR सामने लेकर आए, जो टीआरपी घोटाले में दर्ज की गयी थी। इस FIR में रिपब्लिक का नाम कहीं नहीं था। इसके बाद हम असली शिकायत की कॉपी लेकर सामने आए। इस शिकायत की कॉपी में भी रिपब्लिक का नाम कहीं नहीं था । इस बड़े झूठ का पर्दाफाश करते हुए हमने और सबूत ढूंढे। हमें वो सबूत मिले जिसमें बार्क की डिसिप्लिनरी कमिटी ने एक दूसरे चैनल को टीआरपी में गड़बड़ी का दोषी पाया था।

इन तमाम सबूत के सामने आने के बाद भी परम बीर सिंह लगातार रिपब्लिक को समन भेजते रहे। रिपब्लिक सभी समन का अनुपालन करता रहा। नेटवर्क के एडिटर्स, CEO, CFO और डिस्ट्रीब्यूशन हेड को क्राइम ब्रांच बुलाया गया। घंटों तक पूछताछ की गयी और फिर आखिर में 24 घंटे पहले ऑप इंडिया ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि इस केस की जांच में जुटे डीसीपी का तबादला कर दिया गया है। ये तबादला तब हुआ जब डीसीपी ने कहा कि रिपब्लिक के खिलाफ कोई आरोप नहीं है।
16 अक्टूबर को रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के CEO ने BARC के CEO को चिट्ठी लिखी। उसके जवाब में BAARC के सीईओ ने चिट्ठी लिख कर कहा कि; ‘ प्रिय श्री मान खानचंदानी, मैं BARC इंडिया के CEO को लिखी चिट्ठी के संदर्भ में ये लिख रहा हूं। BARC इंडिया की अंदरुनी प्रक्रिया पर भरोसा जताने के लिए आपका शुक्रिया. BAARC इंडिया के सभी कामकाज कोड ऑफ कॉन्डक्ट फॉर रिड्रेसिंग व्यूअरशिप मालप्रैक्टिसेज़ (कोड) के अंतर्गत गोपनीय रखे जाते हैं, ये कोड सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है।

ऐसे में यह साफ है अगर ARG आउटलायर्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की गयी होती तो BARC इंडिया आपको जरूर बताता और आपसे जरूरी दस्तावेजों के साथ जवाब मांगा जाता।

ये ईमेल साबित करते हैं कि BARC इंडिया को कभी रिपब्लिक के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले। रिपब्लिक ने कभी कोई गड़बड़ी नहीं की। इससे ये साबित होता है कि परमबीर सिंह ने जो रिपब्लिक के खिलाफ जो झूठ गढ़ा था उसका पर्दाफाश हो गया है। रिपब्लिक ने BARC से निवेदन किया था कि वो इस सच को सार्वजनिक करे, लेकिन उनकी तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया, हम ये ईमेल दिखाने को मजबूर हुए हैं क्योंकि हमे सच सामने लाना था।

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