केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार में किसान संवाद के जरिए की आत्मनिर्भर खेती की वकालत

बोले – “किसानों की सेवा मेरी सबसे बड़ी पूजा है”, छोटे जोतों पर मशीनीकरण और पशुपालन को बताया जरूरी विकल्प

पटना | 2 अगस्त 2025 | बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार को आयोजित किसान संवाद कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने में किसानों की भूमिका को सबसे अहम बताया। बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में आयोजित इस संवाद में उन्होंने किसानों की समस्याएं सुनीं और केंद्र सरकार की ओर से उनके समाधान का भरोसा दिलाया।

इस कार्यक्रम में बिहार सरकार की ओर से कृषि मंत्री विजय कुमार और उपमुख्यमंत्री एवं पशुपालन व मत्स्य पालन मंत्री रेणु देवी भी मौजूद रहीं। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि वे कोई औपचारिक दौरे पर नहीं, बल्कि किसानों की जमीन से जुड़ी चुनौतियों को समझने और समाधान के लिए संकल्प लेने आए हैं।


“मैं किसानों का मेहमान नहीं, सेवक हूं”

अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने कहा,
“मैं यहां कोई भाषण देने नहीं, बल्कि किसानों की समस्याएं सुनने आया हूं। अभी मैं गंगा आरती से लौटकर सीधे यहां पहुंचा हूं क्योंकि मैं मानता हूं कि भारत की आत्मा गांवों और खेतों में बसती है, और किसानों की सेवा करना मेरे लिए पूजा के समान है।”

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘राष्ट्र प्रथम’ की नीति ने भारतीय कृषि को विदेशी दबावों से बचाया है। उन्होंने ज़ोर दिया कि वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की सीधी पहुंच किसानों तक होनी चाहिए ताकि खेती में नवाचार तेजी से आए।


छोटे किसानों के लिए मशीनीकरण और तकनीकी हस्तक्षेप जरूरी

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिहार जैसे राज्यों में जहां अधिकांश किसान छोटे जोत वाले हैं, वहां मशीनीकरण और तकनीकी सहायता विशेष रूप से जरूरी है। उन्होंने कहा कि इससे प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ेगी और खेती की लागत घटेगी।

“हमें किसानों को सिर्फ परंपरागत तरीकों तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक खेती, मशीनीकृत साधन और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाना है।”


पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन को बताया पूरक विकल्प

शिवराज सिंह चौहान ने कृषि के साथ-साथ वैकल्पिक आजीविका स्रोतों पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि मवेशियों, मछलियों और मधुमक्खियों से जुड़े व्यवसाय किसानों की आमदनी बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। बिहार में 3 करोड़ से अधिक मवेशियों का जिक्र करते हुए उन्होंने देशी नस्लों के संरक्षण और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि को लेकर योजनाएं साझा कीं।

उन्होंने आवारा पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान पर चिंता जताते हुए कहा कि खेतों की घेराबंदी और स्थानीय व्यवस्थाएं राज्य सरकार के साथ मिलकर लागू की जाएंगी।


बिहार के किसानों की नवाचार क्षमता की सराहना

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिहार के किसान स्थानीय स्तर पर भी शोध और नवाचार कर रहे हैं, जो उनकी आत्मनिर्भरता का प्रमाण है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें और विदेशी विकल्पों पर निर्भरता कम करें।

“स्वदेशी को सम्मान दें, आत्मनिर्भर भारत को बल दें — यही किसान संवाद का मूल संदेश है।”


कार्यक्रम में किसान प्रतिनिधियों की भागीदारी

इस संवाद में राज्य के अलग-अलग जिलों से आए प्रगतिशील किसान, महिला किसान समूह, कृषि वैज्ञानिक और विश्वविद्यालय के छात्र मौजूद रहे। किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और समस्याओं से केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया।

शिवराज सिंह चौहान ने सभी से आग्रह किया कि वे खेतों और प्रयोगशालाओं के बीच की दूरी मिटाएं और साथ मिलकर ‘खेती को एक सशक्त आर्थिक शक्ति’ बनाने का संकल्प लें।


किसानों के हित में केंद्र-राज्य की साझेदारी मजबूत होगी

यह कार्यक्रम न केवल किसानों की समस्याओं को सुनने और साझा करने का मंच बना, बल्कि यह भरोसा भी जगा गया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर बिहार के कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएंगी।

किसान संवाद का सार यही था —
“खेती सिर्फ रोज़गार नहीं, आत्मसम्मान है। और हर किसान, राष्ट्रनिर्माता है।”


 

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